Friday, May 31, 2019

दारुल उलूम की बुनियाद



आज ही के दिन 30 मई 1866 में मौलाना क़ासिम नानौतवी ने दारुल उलूम की बुनियाद रखी थी। यह मिस्र और मदीना यूनिवर्सिटी के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इस्लामिक यूनिवर्सिटी है। यहां दुनिया भर से छात्र इस्लामिक तालीम के लिए आते है।

1857 की क्रांति के बाद एक तरफ सर सैय्यद अहमद खां ने मुसलमानों को अंग्रेजी ज़ुबान और पश्चिमी तालीम से जोड़ने के लिये अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना की वही दूसरी तरफ मौलना क़ासिम नानोतवी ने जो अंग्रेजी ज़ुबान और अंग्रेजों के खिलाफ थे उन्होंने इस्लामिक तहज़ीब बचने के लिये दारूल उलूम की स्थापना की।

ये 1857 के क्रांति का दौरान मौलान रहमतुल्लाह, मौलान रशीद अहमद गंगोही के साथ कई उल्मा ए देवबन्द शामली के शामिल रहे। ये वो दौर था जब मौलाना महमूद हसन उन सैनानियों में से एक थे उन्होंने न केवल भारत में बल्कि विदेशों (अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, तुर्की, सऊदी अरब व मिश्र) में जाकर ब्रिटिश साम्राज्य की मुख़ालफत की।

सन 1914 ई. में इन्ही के शागिर्द मौलाना उबैदुल्ला सिंधी ने अफ़गानिस्तान जाकर अंग्रेज़ों के विरूद्ध अभियान चलाया और काबुल में रहते हुए भारत की स्र्वप्रथम स्वंतत्र सरकार स्थापित की जिसका राष्ट्रपति राजा महेन्द्र प्रताप को बना गया।

शेखुल हिन्द 1915 ई. में हिजाज़ (सऊदी अरब का पहला नाम था) चले गये, उन्होने वहां रहते हुए अपने साथियों द्वारा तुर्की से संपर्क बना कर सैनिक सहायता की मांग की। मदीने में उस समय तुर्की का गवर्नर ग़ालिब पाशा ने उनको मदद का भरोसा दिया। लेकिन उसके फौरन बाद

सन 1916 ई. में अंग्रेज़ों ने किसी जासूस की मदद से शेखुल हिन्द को मदीने में गिरफ्तार कर लिया। हिजाज़ से उन्हें मिश्र लाया गया और फिर रोम सागर के एक टापू मालटा में उनके साथयों मौलाना हुसैन अहमद मदनी, मौलाना उज़ैर गुल हकीम नुसरत, मौलाना वहीद अहमद सहित जेल में डाल दिया था।

शेखुल हिन्द की अंग्रेजों के विरूद्ध तहरीके-रेशमी रूमाल, अभियान चलाया जो आज भी लंदन के लायब्रेरी में सुरक्षित है
दारुल उलूम ने आज़ादी के जंग में जो कुर्बानियां दी है उन्हें भुलाया नई जा सकता।

अल्लाह इनकी क़ुर्बानियों को कुबूल फरमाए

Sunday, May 26, 2019

जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी की पीएम मोदी को मुबारकबाद , कहा अल्पसंख्यकों के सम्बन्ध मे विशेष ध्यान देंगे मोदी।

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नई दिल्ली , 26 मई (प्रेस रिलीज )

जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर उनकी दूसरी बार चुनावी जीत पर मुबारकबाद पेश की है और उम्मीद की है कि वह अल्पसंख्यकों की शिक्षा ,स्वास्थ्य और रोजगार पर विशेष ध्यान देंगे ! मौलाना मदनी ने अपने पत्र में शनिवार की शाम संसद भवन के सेंट्रल हाल में प्रधानमंत्री के द्वारा अल्पसंख्यकों से संबंधित बयान और उनके इरादो को बहुत ही समयानुसार और आशातीत बताया है ! और कहा है कि हमें पूरी आशा है कि इसे पूरी गंभीरता और तेजी से व्यवहार में लाया जाएगा।

मौलाना मदनी ने जो खत लिखा है उसकी भाषा शैली यह है :

"जनाब वाला की दूसरी बार इंतखाबी जीत पर जमीयत उलेमा ए हिंद और अपनी तरफ से मुबारकबाद पेश करते हैं । आपके भारी बहुमत से जीत ने यह साबित कर दिया है कि अवाम आपके विकास एजेंडे की भरपूर हिमायत करते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि आप देश को तरक्की, अमन और खुशहाली की आला से आला मंजिलों तक ले जायेंगे। मुझे बड़ी उम्मीद है कि आप की पॉलिसी "सबका साथ सबका विकास" जो कि आपकी जीत का सबसे प्रमुख कारण है आप के जरिए पेश किए गए उद्देष्यों और सपनों को जल्द साकार करेगी। आपका हालिया बयान जिससे यह पता चलता है कि आप अल्पसंख्यकों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने के बजाय उनकी तालीम, सेहत और रोजगार पर विशेष धयान देंगे, बहुत ही समयानुसार और आशाजनक है और हमें पूरी उम्मीद है कि इसे पूरी गम्भीरता और तेज़ी से अमल में लाया जाएगा!----------

आपका

महमूद मदनी

महासचिव जमीअत उलमा-ए- हिन्द

Thursday, May 23, 2019

23 Muslim MP

पूरे देश से
इतने मुस्लिम कायद संसद भवन पहुंच गये हैं अल्लाह बातिल प्रस्तों के बीच में इन्हें हक़ की आवाज बुलंद करने वालों में शामिल फरमाये

*अस्साम*

1,बदरुद्दिन अजमल साब
*बिहार*

2,चौधरी मेहबुब अली कैसर
3, डॉ मोहम्मद जावेद

*जम्मु & कश्मीर*
4, हस्नैन मसुदी
5,मो अकबर लोन
6, फारूख अब्दुल्ला

*केरल*
7, ए एम आरीफ
8, ई टी मो बशिर

*लक्षदीप*
9, मो फैजल

*महाराष्ट्र*
10 , ईम्तियाज जलील

*पंजाब*
11, मो सादिक

*तेलंगाना*
12, औवेसी साहब

*उत्तर प्रदेश*
13 , कुंवर दानिश अली
14, अफजाल अंसारी
15, हाजी मो याकुब
16, एस टी हसन
17, मो आजम खान
18, हाजी फजलुर्रहमान
19, डॉ शफिकुर्रहमान बर्क


*पश्चिम बंगाल*
20 , नुसरत जहा रुही
21, खलिकुर्रहमान
22, अबु ताहिर खान
23, सजदा अहमद

Wednesday, May 22, 2019

APCR की बड़ी कामयाबी ।


*देर आये दुरुस्त आये*

_आकिद मिर्ज़ा की क़लम से_

_*उसूलों पे आँच आ जाये तो टकराना ज़रूरी है,*_
_*जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है*_

*1. पुसद अब्दुल मालिक केस के अहम तथ्य*

पुसद में ईद-उल-अज़हा के दौरान पुलिस कर्मचारियों पर अब्दुल मलिक अब्दुल रज्जाक ने जानलेवा हमला किया था ၊ जांच के दौरान उसे देश विरोधी गतिविधियों के लिए शोयब अहमद खान और हाफिज मुजीबुर रहमान के उकसाने की बात सामने आने पर एटीएस ने तीनो अभियुक्तों को हिरासत लेकर दोषारोप पत्र नागपुर जिल्हा न्यायालय में पेश किया था ၊ बाद में एक विशेष नोटिफिकेशन के तहत केस को नागपुर से अकोला ट्रांसफर किया गया। जहां एटीएस के विशेष न्यायाधीश ए एस जाधव ने 2 साल के लंबे अरसे चले मुकदमे के बाद मुख्य अभियुक्त अब्दुल मालिक को धारा ३५३ , ३३२ , ३२४ के तहत दोषी पाया जबकि न्यायालय ने शोएब और हाफिज मुजीब को एटीएस के आरोप से मुक्त कर, सभी गुनाहों से बाइज़्ज़त बरी किया । चूंके अब्दुल मालिक अपने हिस्से की 3 साल की सज़ा जेल में बिता चुका था, इस लिए उसे फाइन ले कर रिहा करदिया गया।

*2. जमीयत, जमाअत और घर के लोग*

 जमीयत उलेमा ए हिन्द, हलका महाराष्ट्र, मुल्क भर में बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को इंसाफ दिलाने का काम हमेशा से करती आई है। इस केस में भी जमीयत की तरफ़ से बहोत ही मारूफ़ व क़ाबिल वकील जनाब तहिवार पठान साहब व उनके मातहत जनाब इशरत खान साहब ने शुरुआती पैरवी की। तो वहीं जमाअत-ए-इस्लामी की जानिब से विदर्भ के मारूफ़ वकील नगमान अली साहब पैरवी कर रहे थे। मैं आकिद मिर्ज़ा हाफ़िज़ मुजीब और शोएब के वालिद और भाई (क्रमशः) के कहने के मुताबिक़ इन दोनों साहेबान को असिस्ट कर रहा था।
चूंके मैं भी पुसद शहर से ताल्लुक रखता हूं और मामला भी पुसद का था जिसमे शोएब और हाफ़िज़ मुजीब को मैं अच्छि तरह जानता था। और मुझे बखूबी पता था के ये इल्ज़ामात हर तऱीके से बेबुनियाद है। नागपुर ए. टी.एस. कोर्ट में जब भी पेशी होती, जमीयत, जमाअत और घर के वुकला के इलावा उनके इफ्राद भी कोर्ट में मौजूद रहते। जमीअत ओर जमाअत के लोगों को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता मगर क़ौम के दर्द के सामने परेशानियों को पीछे छोड़ कुछ कर गुजरने का जज़्बा सब के दिलों में था।

*3. चार्जशीट, बेल और केस का ट्रांसफर*

ए.टी.एस. ने मामलें में चार्जशीट दायर की। मामला नागपुर के मुख्य ज़िला न्यायाधीश के सामने विचाराधिन था। जमीअत केस में अब्दुल मालिक की ज़मानत अर्ज़ी निचली अदालत में ही लगा चुकी थी जो की निचली अदालत द्वारा ही नकार दी गयी थी। रिविज़न अर्ज़ी मुख्य ज़िला न्यायाधीश के समक्ष लगाई गई। जिसमें ATS ने जवाब दाखिल करने का उतना ही समय लिया जितना के अक्सर हम फिल्मों में सुनते आए है और तारीख पर तारीख होती रही। इसी दरमियान मुख्य ज़िला न्यायाधीश, नागपुर का प्रोमोशन हो कर उन्हें हाई कोर्ट जज बना दिया गया व मुख्य ज़िला न्यायाधीश कोर्ट ख़ाली (vacant) होगया।  कुछ हफ़्तों बाद नई मुख्य ज़िला न्यायाधीश, नागपुर आयीं और मामला आगे बढ़ा। उन्होंने एक या दो सुनवाई के बाद मामला स्पेशल कोर्ट मकोका, नागपुर में ट्रांसफर कर दिया।
  ATS अपने विशेष सीनियर सरकारी वकील, पी.के.साथिएनाथन साहब को अप्पोइंट कर मामले में अपना जवाब दाखिल कर चुकी थी। मामला अब सुनवाई के लिए रखा गया। तभी अचानक स्पेशल कोर्ट मकोका, नागपुर के जज साहब का ट्रांसफर होगया। कोर्ट फिर से ख़ाली (vacant) होगया। पेशी पर अभियुक्तों को लाया जाता और मैं उनसे मिलकर उनको मामले की नोइय्यत समझाया करता और हिम्मत अफ़ज़ाई करता।
  2016 के रमज़ान शुरू हो चुके थे। अब्दुल मालिक की ज़मानत अर्ज़ी लगी हुई थी और मामले में चार्ज फ्रेम न हो इसलिए शोएब की डिस्चार्ज अर्ज़ी लगाई हुई थी। कुछ दिन बाद हाफ़िज़ साहब की बेल अर्ज़ी लगाई गई। मामले में नए जज आये जो के मुस्लिम थे। सुनवाई हुई। तहीवार पठान साहब मुम्बई से नागपुर आये। उनके अल्फ़ाज़ से उनका दर्द छलक रहा था। उनका एक एक लफ्ज़ उनके दिल से निकल कर नश्तर का काम कर रहा था। उनके तर्क और उनके दलीलों का हक़ीक़त में कोई सानी नही था। मैं उनको मामले में असिस्ट कर रहा था।  सरकारी वकील ने मामले में सुनवाई के लिए वक़्त मांगा। मामला आगे बढ़ता रहा। तारीख पर तारीख होती रही। पठान साहब ने मुझे मामला देखने को कहा। मैंने एक दिन, गुस्से और बेचैनी के आलम में जज साहब से कहा "क्या आपने इस मामले को सिविल मामला समझ कर रखा है, 3 मासूम ज़िन्दगियों और उनसे जुड़े हज़ारो इमोशन्स का सवाल है और आप तारीख बढ़ाते हुए जा रहे है।" जज साहब ने जवाब दिया "वकील सहाब, ऐसी तो कोई बात नही है, सरकारी वकील साहब एक और केस में पैरवी कर रहे है जिसे उन्हें 3 महीने में ख़त्म करना है। हाई कोर्ट का आर्डर है।" मैने कहा "सर, आप उन्हें लास्ट चांस दीजिये, या फिर आर्डर करिये" बोले ठीक है।

 सुनवाई हुई, सरकारी वकील के पास हमारी दलिलों का कोई जवाब नही था। मामला अब आर्डर के लिए रखा गया। मामला कोर्ट के समझ मे आ चुका था की पूरा मामला ही फ़र्ज़ी है।  एक साधारण से केस को जबरदस्ती एक UAPA मे तब्दील किया गया था।

*4. साज़िश या हक़ीक़ी ट्रांसफर*

अब्दुल मालिक और हाफिज साहब की ज़मानत अर्ज़ी नकार दी गयी थी। इसी बिच मैंने शोएब की बेल एप्पलीकेशन लगाई। इत्तेफ़ाक़ ऐसे हुआ के जिस दिन मैंने शोएब की ज़मानत अर्ज़ी लगाई ठीक उसी दिन कोर्ट में मामला ट्रांसफर करने के लिए स्पेशल नोटिफिकेशन आया। मामला कहां ट्रांसफर होगा ये अभी साफ़ नही था। गर्मी की छुट्टिया लग चुकी थी। मामला पेंडिंग रखने के लिए कहा गया था। विशेष आर्डर के सिवा मामले में कोई भी स्टेप लेने का न्यालय को अधिकार नही था।फिर से वही तारीख पर तारीख होती रही लेकिन इंसाफ नही मिला। कई हफ़्ते गुज़र जाने के बाद भी न तो मामला ट्रांसफर किया गया और न ही कुछ क़दम न्यायालय द्वारा लिए गए।  फ़िर एक दिन मैंने मुख्य ज़िला न्यायाधीश मैडम से शिकायत की के "ये मामलें में क्या होरहा है, कोर्ट पर कोर्ट बदल रहे है और तारीख़ पर तारीख़ हो रही है, इतना समय तो सिविल केस में नही लगाते जितना आप इस केस में लगा रहे हो।" मैडम ने मुझे सुपरिटेंडेंट से मिलने को कहा, सुपरिटेंडेंट से मिला, उससे गुज़ारिश और कुछ देन के बाद कागज़ात पर मुख्य ज़िला न्यायाधीश के दस्तखत के लिए उसे लाया। मुख्य ज़िला न्यायाधीश ने दस्तख़त किये और मामला अकोला जाना तय हुआ।
मेरे और हम सभी के मन में विचार थे के ये सच मे हक़ीक़ी ट्रांसफर है या किसी साज़िश के तहत हुकूमत मामले को डिले करना चाह रही है।

*5. पठान साहब का कॉल*

मामले की फ़ाइल सील होचुकी थी। मामला अगले हफ़्ते अकोला जाना था। मामले के ट्रांसफर के एक दिन पहले की सुबह मुझे पठान साहब का कॉल आया के भाई मुझे अबदुल मालिक की जमानत अर्जी की सर्टिफाइड कॉपी चाहिए। मैने कहा सर, कोशिश कर सकता हूं क्यों कि फ़ाइल तो सील होगयी है। बोले जो बन पड़े करो। कोशिश करो। अल्लाह तुम्हे कामयाब करे।

*6.सर्टिफाइड बना सर दर्द*

मैंने सर्टिफाइड के लिए अर्ज़ी की।  बाबू से पहचान थी इसिलिए बिना कोई परेशानी के लिए फॉर्म का हमदस्त मिल गया। मैं हमदस्त ले कर कोर्ट में गया। कोर्ट ने मुझे कागज़ात देने से मना कर दिया। मैं स्तब्ध था। कोर्ट का तर्क भी बराबर था। मैंने बहोत मिन्नत की। कोर्ट का कहना था के "मामला कल अकोला जाना है और आप आज सर्टिफाइड के लिए आये हो। सर्टिफाइड सेक्शन अगर रिकॉर्ड चला गया तो कल तक रिकॉर्ड नही आएगा तब मैं क्या करूँगा?" मैंने कहा 'सर मैं पर्सनली गारंटी लेता हूं के रिकॉर्ड आज 4 बजे तक कोर्ट में आजाये। उसके लिए मुझसे जो बन पड़ेगा करूँगा" काफ़ी मिन्नतों के बाद जज साहब माने।

सील खुलवाई गयी, बाबू लोगों को काम पर लगाया गया। आनन फ़ानन में रिकॉर्ड तैयार किया गया। 7वें मज़ले से रिकॉर्ड 1लें मज़ले पर लाया गया। copying section में सबको अपने हाथों का काम छुड़ा कर पहले हमारा रेकॉर्ड तैयार करवाया गया। और 4 बजे के पहले ही फ़ाइल कोर्ट पोहचा दी गयी। सर्टिफाइड महज़ दो घंटों में तैयार करवाया गया।  मैने पेपर्स को तुरंत मुम्बई कूरियर किये। जमीयत ने मुझे लगने वाला खर्च के ज़बरदस्ती पैसे अदा किए। कोर्ट का स्टॉफ मुझसे कह रहा था "मिर्ज़ा साहब, ये क्या सर दर्द ले कर आगये, अच्छा हुआ जो मामला अकोला चला गया वरना आप तो जीना दुश्वार कर देते"

*7. मामला अकोला ट्रांसफर हुआ*

मामला अकोला ट्रांसफर हुआ। और जमाअत के तरफ से वहां जनाब अली रज़ा खान साहब को वकील रखा गया। अब मामले में नया मोड़ आचुका था। मैं और मेरे साथी नागपुर से अकोला शोएब के लिए जाते थे, मुम्बई से पठान साहब अब्दुल मालिक के लिए आया करते और अली रज़ा साहब हाफिज मुजीब के लिये आते।

*8. बेल, जेल ट्रांसफर और हम वुकला*

नया गड़ी नया राज वाली कहावत को अपनाया गया। फिरसे शोएब और अबदुल मालिक की बेल डाली गई। फिर से पठान साहब ने अब्दुल मलिक के लिए सुनवाई की। फिर एक बार सरकारी वकील साहब और ATS के अफ़राद चुप्पी साधे हुए थे। शोएब के लिए मेरे सीनियर और साथी समीर सर और मैंने दलीलें पेश की। एक सुंदर, जोशीले और दिल की बात कोर्ट के सामने रखी। मामला आर्डर के लिए लगाया गया। अगली दो तारीखों के बाद बेल नकार दी गयी। आर्डर में कोई दम खम नही था।

वुकला और तंज़ीमो के नुमाईंदों के बीच कोर्ट में चाय पर चर्चा हुई। जिसमें ये तय हुआ के बगैर एक दूसरे को बताए कोई भी मामले में कोई भी कदम नही लेंगा। हाफ़िज़ साहब की तबियत बिगड़ गयी थी इसीलये उन्हें नागपुर में भर्ती किया गया था। तय हुआ के हाफ़िज़ साहब की मेडिकल के लिए बेल अर्जी डाली जाए। बेल डाली गई। जो फिरसे नकार दी गयी।

*9. हाफ़िज़ साहब की बेल और पुसद शहर के सियासतदान*

तय हुआ के हाई कोर्ट, नागपुर में हाफ़िज़ साहब के लिए बेल अर्ज़ी मैं और समीर सर लगायेंगे। affidavit के लिए मौलाना साहब के वालिद बाबू भाई को हाई कोर्ट बुलाया गया चूंके उन्होंने हमें इस काम के लिए अप्पोइंट किया था। बेल फ़ाइल की गई। मामलें में सुनवाई हुई और ATS को नोटिस जारी हुई।
अब हुआ यूं के अगले दिन पुसद शहर के कुछ नामचीन लोगों के मुझे फ़ोन आने लगे के आप हाफिज साहब की बेल अर्ज़ी वापस ले ले। मैंने कहा क्यों लू मैं वापस तो कहने लगे के नही अब से ये मामला हम देखेंगे। रोज़ तक़रीबन 3 से 4 कॉल आते जो कि घंटो तक चलते ओर मैं उन्हें समझाया करता के कुछ दिन शायद एक हफ्ते में हाफ़िज़ साहब इंशा अल्लाह बाहर होंगे। लेकिन वो नही मानते। अब बात यहां तक पहोच गयी के मेरे वालिद साहब का नाम ले कर कहा गया के जाहेद भाई से हम बात कर लेंगे बस तुम हट जाओ। मैने जवाब दिया मैने ये केस मेरी मर्ज़ी और बाबू भाई की इजाज़त से लिया हु। जब तक बाबू भाई नही कहेंगे मैं पीछे नही हटूंगा। नतीजा ये निकला के उनपर दबाव लाया गया जिस की वजह से उन्होंने मुझे मामला वापिस लेने को कहा। मैंने उन्हें नागपुर बुलाया और केस वापसी के पेपर्स पर उनकी दस्तखत ली।

*10. दिल को चोट पोहची*

दिल को ना क़ाबिल बर्दाश्त चोट पोहची थी। कुछ लोग बस क्रेडिट लेने की होड़ में काज हुए थे। जिसकी वजह से मामले में देरी हो रही थी। काफी समझाने पर भी नही माने तो बेदिल हो कर, दिल पर पत्थर रख कर अवेस मिर्ज़ा साहब और बाबू भाई से माज़रत के साथ मैंने अकोला जाना बंद करदिया और उन दोनों से गुज़ारिश की के, केस को तमाम तरीके की सियासत से दूर रख कर एक हो कर लड़िये। फ़तेह अपनी ही है। बस इंतेज़ार ये है के हमारे बच्चे कब बाहर निकलेंगे। निकलेंगे तो ज़रूर।

*11. ट्रायल और जजमेंट*

अली रज़ा साहब, दिलदार खान साहब और नजीब साहब की कड़ी मेहनत, वाज़ेह और पुख्ता दलिलों  और अनथक कोशिशों के बाद केस की कार्यवाही मुकम्मिल हुई और शोएब और हाफिज मुजीब को रिहा किया गया। अब्दुल मलिक को 3 साल की सज़ा और 20,000/ रुपये जुर्माना सुनाया गया। चूंके अब्दुल मालिक 3साल से ज़्यादा जेल में रह चुका है इसलिए उसे भी रिहा कर दिया गया।

*12. काबा किस मुंह से जाओगे ग़ालिब,*
*शर्म तुमको मगर नही आती।*

जिन लोगों ने दस्तखत किए थे कार्यवाही के लिए, जिन लोगों ने मुझसे अर्ज़ी वापस लेने को कहा था , जिन लोगो के नाम चार्जशीट में तीनो अभियुक्तों से ज़्यादा बार आये थे मग़र उन्हें अभियुक्त नही बनाया गया कल वोह लोग अभियुक्तों की रिहाई का क्रेडिट लेते दिखे।

क्रेडिट और सलाम के असली हक़दार है अली रज़ा साहब, नजीब साहब, दिलदार खान साहब, तहिवार पठान साहब, इशरत खान साहब, अतीक साहब, नग़मान अली साहब, जमीयत के ओहदेदाराण, जमाअत के ओहदेदाराण, अभियुक्तों के घर वाले, उनके दोस्त अहबाब और वह हज़ारों लोग जिन्होंने उनके लिए दुआ की और थोड़ा बहोत ये नाचीज़ आकिद मिर्ज़ा जिसे अल्ल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने ये काम करवाया।

*"जिस बात पर कोई मुस्कुरा दे...*

*बात बस वहीं ख़ूबसूरत है...!!"*

दुआओं का तालिब।
अल्लाह हर मुसलमान को हर आफत व मुसीबत से बचाये।

आमीन

व सलाम

*एडवोकेट आकिद मिर्ज़ा, नागपुर (पुसद)*
मोबाइल नं. 8888603609

Monday, May 20, 2019

एनसीपी के अध्यक्ष श्री शरद पवार जिने अल्लाह ताला से दुवा करें.


पिछले कई सालों से हम इफ्तार दावत का आयोजन करते है। आप लोग बडी संख्या मे इकठ्ठा होकर इस रोजा इफ्तार की शान बढाते है इसकी मुझे बडी खुशी होती है।देश में चुनाव हो चुके है और देश किस राह पर जाऐगा, कौनसे विचारों की सरकार बनेगी ये कुछ दिनों मे पता चलेगा। लेकीन कल से मीडिया के माध्यम से इक अलग महौल तयार किया जा रहा है।कल से कई लोग मुझे संपर्क कर के चिंता व्यक्त कर रहे है।

कुछ मीडिया चैनल सत्ताधारी पक्ष के हातों की कठपुतली बन गये है। लेकीन चिंता न करे, कुछ दिनों मे चित्र स्पष्ट होगा।चुनाव होते रहेंगे, सरकारे बनती रहेंगी। सरकार का काम है लोगों के सवाल हल करना, पर आज जिनके हाथों मे सरकार है वो राजधानी छोड कर हिमालय मे जाके बैठे है।हम यहां भाईचारा बढाने की बात कर रहे है और कुछ लोग अलग संदेश देने की कोशिश कर रहे है। पर देश का माहौल जल्द बदलेगा इसका मुझे विश्वास है। देश मे भाईचारा बरकरार रहे, इसकी मे अल्लाह ताला से दुआ करता हूँ।

Thursday, May 9, 2019

क्यू नहीं मिला रहा है रूह अफज़ा बाजार में ?


रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है लेकिन भारतीय मुस्लिम इस बार जिस चीज़ को सबसे ज्यादा याद कर रहे हैं वह गर्मियों में हर घर में रहने वाला मशहूर शरबत रूह अफज़ा है

इस विज्ञापन को देखकर शायद आपको बचपन के दिन याद आ गए होंगे गर्मी के मौसम में माँ की आँखों से छुप-छुपाकर इसे पानी में मिलाकर पीना इसका स्वाद लेना हम सभी को अच्छा लगता था आज भी रूहअफ़्ज़ा का शरबत गर्मी के मौसम में हमारे पसंदीदा पेय में से एक है लेकिन इसके विज्ञापन के अलावा क्या आपने कभी ख़ुद इसे रूहअफ़्ज़ा की जगह ‘हमदर्द का रूहअफ़्ज़ा’ कहा या सुना? शायद नहीं। हम इसे रूहअफ़्ज़ा के नाम से ही जानते हैं ख़रीदते हैं और पीते है

सन 1906 में हकीम हाफिज अब्दुल माजिद ने रूह अफज़ा का उत्पादन शुरू किया था अब इसकी कमान उनके पोतों के हाथ में है भारत के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश भी काफी लोकप्रिय है रूह अफज़ा वैसे बाजार में रूह अफज़ा के विकल्प के रूप में डाबर का शरबते आजम भी मौजूद है लेकिन रूह अफज़ा की बात ही कुछ और है इंतजार है कि रूह अफज़ा बाजार में वापस आए

रूह अफ्जा यूनानी पद्धति से बनाया गया शरबत है जो भारतीय उपमहाद्वीप में प्यास बुझाने का आदर्श पेय माना जाता है। इसमें प्रयुक्त जड़ी बूटियाँ शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखने में मदद करती हैं। यह निर्जलन एवं लू लगने जैसी मुसीबतों से भी बचा लेता है। यह दस्त, पेटदर्द, बदहजमी आदि से भी निजात दिलाता है।

सभी जानना चाहते हैं कि इतना लोकप्रिय शर्बत होने और ऑन-सीजन होने के बावजूद रूह-अफजा की सप्लाई क्यों नहीं हो रही है रूह-अफजा बनाने वाली कंपनी हमदर्द के पार्टनर्स के बीच संपत्ति विवाद के चलते इस शर्बत का उत्पादन बंद हो गया है रूह-अफजा के बाजार से गायब होने की वजह चाहें जो हो लेकिन इस शर्बत के चाहने वाले बहुत परेशान हैं

काश रूह अफज़ा दोबारा शुरू हो जाए


Saturday, April 13, 2019

डॉ बाबासाहेब आंबेडकर और मुसलमान


डॉ बाबासाहब आंबेडकर और मुसलमान।
जब डॉ बाबासाहब आंबेडकर लंदन में गांधी ,कांग्रेस के खिलाफ जंग लड़ रहे है थे तब मुस्लिम नेता डॉ बाबासाहब आंबेडकर साथ थे ।मौलाना शौकत अली जी ने 29 जनवरी 1932 मुंबई में डॉ बाबासाहब आंबेडकर जी को अपने गले लगाया और मुस्लिम लोगो को खुले आम कहा कि डॉ बाबासाहब आंबेडकर मेरे अपने भाई है ।मौलाना शौकत अली ने अपने भाषण में कहा कि "हरेक धर्म और जाति के व्यक्ति ने अपने कार्य के बारे में विचलित न होते हुए श्रद्धा और हिम्मत दिखानी चाहिए।अछुतो के हित के संबंध डॉ बाबासाहब आंबेडकर ने लंदन में राउंड टेबल कोंफ़रनस में जो हिम्मत दिखाई है वह प्रशसंनीय है,अभिनंदनीय है। डॉ बाबासाहब आंबेडकर मेरे अपने छोटे भाई है!!!


डॉ बाबासाहेब आंबेडकर और मुसलमान
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बाबासाहेब ने जब चवदार तालाब का आंदोलन चलाया और सभा भरने के लिये बाबासाहेब को कोई हिन्दु जगह नहीं दे रहा था तब एक मुसलमान ने आगे आकर अपनी जगह दी और कहा बाबासाहेब आप मेरी जगह मे अपनी सभा भर सकते हो!!!
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गोलमेजी परिषद मे जब गांधी ने बाबासाहेब का विरोध किया और रात के १२ बजे गांधी ने मुसलमानो को बुलाकर कहा कि आप बाबासाहेब का विरोध करो तो मैं आपकी सभी मांगे पूरी करुंगा!!!
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तब मुसलमानो ने मना कर दिया और कहा कि हम बाबासाहेब का विरोध किसी भी हाल मे नहीं करेंगे और ये बात मुसलमानो ने आकर बाबासाहेब को कह दी कि गांधी हमे आपका विरोध करने के लिये कह रहे है!!!
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संविधान सभा मे जब सारे हिन्दु (गांधी, नेहरू और सरदार पटेल) ने मिलकर बाबासाहेब के लिये संविधान सभा के सारे दरवाजे और खिड़कीया भी बंध करदी थी तब पच्छिम बंगाल के मुसलमानो ने बाबासाहेब को वोट देकर चुनवाया और बाबासाहेब को संविधान सभा मे मुसलमानो ने भेजा!!!
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अगर बाबासाहेब को मुसलमान वोट नहीं देते और बाबासाहेब संविधान
सभा मे नहीं जाते तो आज हम कहां होते ज़रा सोचिये???

Saturday, April 6, 2019

UPSC का फाइनल रिजल्ट जारी, इन 28 मुस्लिम लड़कों ने फहराया परचम, देखें पूरी लिस्ट

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने केंद्रीय सेवाओं समेत भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय विदेश सेवा, भारतीय पुलिस सेवा के चयन के लिए हुई सिविल सेवा परीक्षा 2018 के फाइनल नतीजे शुक्रवार को घोषित कर दिए गए हैं.
इस परीक्षा में कनिष्क कटारिया ने टॉप किया है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि परीक्षा परिणामों के आधार पर सफल उम्मीदवारों का आईएएस, आईएफएस, आईपीएस और कई केंद्रीय सेवाओं (ग्रुप-ए और ग्रुप-बी) के लिए चयन किया गया है.
वहीं ज़कात फाउंडेशन के सहयोग से यूपीएससी की तैयारी करने वाले जुनैद अहमद ने आल इंडिया में तीसरी रैंक पाई है, इस बार कुल 28 मुस्लिमों ने अपनी कामयाबी का परचम लहराया है.
देखें पूरी लिस्ट
जुनैद अहमद
मुहम्मद अब्दुल शहीद
गौहर हसन
अम्बुल सुमिया
शफ़क़त अमना

रहना बशीर
शैख़ मुहम्मद जेब जाकिर
सय्यद रियाज़ा अहमद
बुशरा बनो
मुहम्मद जावेद हुसैन
मिर्ज़ा कादिर बेग
बाबर अली
मुहम्मद सज्जाद पी
शहजाद आलम
फ़राश टी
मुहम्मद अब्दुल जलील
मुहम्मद हाशिम
शहीद अहमद
मोहम्मद सरफ़राज़ आलम
ऐमन जमाल
अर्शी आदिल
अंसारी ज़ैद अहमद सईद अहमद
अली अबुबकर टीटी
फैसल खान
बाशा मोहम्मद बी
मुहम्मद तौसिफुल्लाह
मुहम्मद मुस्तफा एजाज़
मुहम्मद शहीद रजा खान

Wednesday, April 3, 2019

मुसलमानों के लिए अति महत्वपूर्ण मैसेज लोक सभा इलेक्शन 2019 ।


मुसलमानों के लिए अति महत्वपूर्ण मैसेज
    सभी सेकुलर पार्टियां अपना अपना ज
मफ़ाद  देख रही हैं और किसी को यह फिक्र नहीं है कि बीजेपी / आर एस एस को सत्ता में आने से कैसे रोका जाए ।इसलिए मुसलमानों को ख़ुद ही अक्लमंदी का इस्तेमाल करते हुए अपने वोटों को सेकुलर पार्टियों के दरमियान बिखरने से बचाना होगा। लिहाज़ा जहां जो पार्टी मज़बूत है सिर्फ़ उसी के कैंडिडेट को वोट दीजिए, ना कि अपनी फेवरेट पार्टी या लीडर को..... साथ ही मुस्लिम लीडर से भी अपील है कि एक ही इलाक़े से 10 - 10 उम्मीदवार खड़े होने की बजाय जो मुस्लिम उम्मीदवार सबसे मज़बूत हो उसी को सपोर्ट करें और अगर कोई दूसरा मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा हो तो
उसका हर तरीके से बाईकाट किया जाए.... सिर्फ़ इस बार पार्टी से वफ़ादारी की जगह क़ौम व मिल्लत से वफ़ादारी का सबूत दें ।

UP : SP/BSP no chance of Congress in UP (यूपी में कांग्रेस का कोई चांस नहीं है)

BIHAR : RJD/CONGRESS

RAJASTHAN : CONGRESS

MP : CONGRESS

MAHARASHTRA : CONGRESS/ NCP

CHHATISGARH : CONGRESS

TELENGANA : TRS/AIMIM

DELHI : AAP

GUJRAT : CONGRESS

HARYANA :CONGRESS

BANGAL : TMC/WPI

ASSAM : AIUDF

JHARKHAND : JMM/CONGRESS

Kishanganj, aurangabad, hyderabad....AIMIM

   इस बात से उलेमा और मिल्ली तंज़ीमें भी मुत्तफ़िक़  हैं और सभी पॉलीटिकल एक्सपर्ट का भी यही कहना है कि ऊपर दी गईं स्टेट/ राज्यों में सिर्फ़ इन्हीं पार्टियों को वोट दें, जिनका नाम स्टेट/ राज्य के सामने लिखा है , वरना 100% वहां से बीजेपी की सीट निकलेगी।
    इस मैसेज को इलेक्शन से पहले सभी ग्रुप्स/मुसलमानों तक ज़रूर पहुंचा दें।

Tuesday, April 2, 2019

जमाअ़त ए इस्लामी हिंद महाराष्ट्र की मज्लिसे शूरा (विधानसभा) ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन को समर्थन किया "कुछ सिटे छोड़कर"


     जमाअ़त-ए-इस्लामी हिंद महाराष्ट्र के अध्यक्ष आदरणीय तौफ़ीक़ असलम ख़ान साहब ने  समाचार पत्रों के लिए जारी अपने बयान  में कहा कि लोकसभा चुनाव 2019 का शेड्यूल जारी हो चुका है। अप्रैल महीने में महाराष्ट्र में चार चरणों में चुनाव होंगे। ये चुनाव फासीवादी और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा कि एक दूसरे पर आगे आने का फ़ैसला करेंगे। आपने कहा कि फासीवादी शक्तियों को सत्ता से दूर रखना जमाअ़त-ए-इस्लामी हिंद की सबसे पहली प्राथमिकता है और यह हर उस नागरिक की भी ज़िम्मेदारी है जो  भारतीय संविधान की रक्षा चाहता है। आपने कहा कि जमाअ़त-ए-इस्लामी हिंद महाराष्ट्र की मज्लिसे शूरा ने अपनी बैठक में यह बात बुनियादी तौर पर निर्धारित की है कि जो राजनीतिक दल फासीवादी विचारधारा रखने वाली राजनीतिक दलों को हराने की शक्ति रखती हों उसके प्रति  समर्थन निर्णय किया जाए। जमाअ़त कि निर्वाचन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र राज्य में कुछ एक सीटों को छोड़कर कांग्रेस और राकांपा ( एनसीपी) वह राजनीतिक गठबंधन है जो फासीवादी शक्तियों को हरा सकेंगी ।
    आदरणीय तौफ़ीक़ असलम खान ने कहा कि जमाअ़त-ए-इस्लाम हिंद महाराष्ट्र की विधानसभा परिषद ने सहमति से निर्णय किया है कि
पूरे राज्य में कुछ  क्षेत्रों को छोड़कर लोकसभा की एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन सीटों के उम्मीदवारों का समर्थन किया जाएगा।
     जमाअ़त-ए-इस्लामी हिंद महाराष्ट्र के अध्यक्ष आदरणीय तौफ़ीक़ असलम ख़ान ने लोगों से अपील की है कि वे अपने वोटों को विभाजन और तक़सीम होने से बचाएं और चुनाव में पूरे उत्तरदायित्व भावना (अहसासे ज़िम्मेदारी) के साथ चुनाव में हिस्सा लें।

रेहान अंसारी
राज्य मीडिया सचिव
जमाअ़त-ए-इस्लाम हिंद महाराष्ट्र

निशुल्क मेडिकल कैंप 200 से अधिक रोगियों ने लाभ उठाया, JIH नागपुर


जनसेवा का कार्य ऐसा है जैसे कि रात भर अल्लाह की इबादत करते रहना  -- रफ़ीक़ुर्रहमान

 टेका में आयोजित निःशुल्क मेडिकल कैंप में 200 से अधिक रोगियों ने लाभ उठाया

     पैगंबर हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.व. ने मानवता के तहत अपने विभिन्न कार्यों में जनसेवा को प्रमुखता दी थी , उसी अनुरूप
जमाअ़त ए इस्लामी हिंद ईश्वरी ग्रंथ पवित्र कुराआन और अंतिम दूत पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षा दीक्षा के अनुसार कार्य कर रही है , जनसेवा का कार्य ऐसा है जैसे कि रात भर अल्लाह की इबादत करते रहना । यह विचार रफ़ीक़ुर्रहमान ख़ान ने टेका के सिद्धार्थ नगर की बड़ी मस्जिद के पास स्थित संगठन के कार्यालय में  निशुल्क मेडिकल कैंप के उद्घाटन अवसर पर कहे ।  यह निःशुल्क मेडिकल कैंप

 जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नार्थ , मेडिकल सर्विस सोसायटी आॅफ़ इंडिया शाखा नागपुर, नागपुर महानगर पालिका एवं क्रिसेंट हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया था । उन्होंने कहा कि इस्लाम पर मनगढ़ंत आरोपों द्वारा उसे आतंकवाद की संज्ञा दी जाती है , जो कि एकदम ग़लत है । इस्लाम में मानवता से जुड़ी जनसेवा और उसमें ज़िंदगी जीने का तरीक़ा बताया गया है ‌। इस्लाम में इबादत ही नहीं बल्कि जनसेवा को सर्वश्रेष्ठ कार्य बताया गया है। यह मेडिकल कैंप उसी तहत आयोजित किया गया है।

     मेडिकल सर्विस सोसायटी आफ इंडिया (एम एस एस) नागपुर के ज़िला अध्यक्ष डॉ नईम नियाज़ी ने इस अपने संगठन का परिचय दिया । उन्होंने कहा कि एम एस एस विभिन्न शासकीय योजनाओं से निर्धनों का इलाज एवं हृदय के आपरेशन करवा रही है ।  इस कैंप में छावनी के "यू्वर फ़ीज़ियो (फ़ीज़ियो थैरेपी एंड पेन रिलीफ़ क्लिनिक) की टीम में सर्वेश मालू, आषुतोष, महवश सय्यद ने संबंधित रोगियों को फ़ीज़ियो थैरेपी के तरीके सिखाए। उन्होंने बताया कि इस कैंप में 70 रोगियों की ईसीजी, 100 रोगियों की  सुगर जांच तथा 30 रोगियों के एक्स रे लिए गए और रोगियों को नि: शुल्क दवाईयां भी वितरित की गई  । इस शिविर में 200 से अधिक
रोगियों ने  लाभ उठाया । संचालन शहज़ाद नवैद ने किया ।
    इस शिविर को सफल बनाने में नागपुर महानगर पालिका हेल्थ केयर  के सूर्यदीप तथा इन्दिरा अवलकर , क्रीसेंट हास्पिटल के डा. हसनुल बन्ना , सलीम क़ाज़ी, ज़ुबैर अहमद तथा शग़ुफ़्ता ज़ुबैर के अलावा जेआईएच नार्थ के अध्यक्ष इरशादुर्रहमान ख़ान , फार्मासिस्ट की टीम में शाबाज़ अंसारी , मोहसिन अंसारी वसीम अंसारी तथा उवैस अंसारी  समाज सेवी क़ाज़ी शफीक़ अहमद आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा ।

डॉ एम ए रशीद
मीडिया सचिव
जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर

Sunday, March 31, 2019

इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के सत्कार कार्यक्रम में जेआईएच और एम एस एस का सत्कार


इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज के सत्कार कार्यक्रम में जेआईएच और एम एस एस का सत्कार

     नागपुर - नागपुर के इंदिरा गांधी के सत्कार कार्यक्रम में जमाअ़त मेडिकल कॉलेज के कांफ्रेंस हाल में सत्कार कार्यक्रम के अंतर्गत शहर की 16 संगठनों को आमंत्रित किया गया था। इस सत्कार कार्यक्रम में जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता शफ़ीक़ अहमद , क़ाज़ी शफीक अहमद और मेडिकल सर्विस सोसायटी आफ इंडिया नागपुर के अध्यक्ष डॉ नईम नियाज़ी के कार्यों की सराहना करते हुए उनका सत्कार किया गया।

डॉ एम ए रशीद
मीडिया सचिव
जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर

Monday, March 25, 2019

निस्वार्थ जन सेवा करने वालों को टाइम ऑफ इंडिया ग्रुप ने किया सम्मानित


शहर में जमात ए इस्लामी हिंद नागपुर के विविध कार्यक्रम

नागपुर हीरो प्रोत्साहन से समाज में अवश्य ही सकारात्मक बदलाव आएगा -प्रो. अय्यूब ख़ान

    वर्तमान भौतिकवादी युग में निस्वार्थ  जन सेवा करने वाले अत्यधिक प्रशंसा के पात्र हैं । नागपुर में इस कार्य में जुटे लोगों को टाइम्स ऑफ इंडिया ने "नागपुर हीरो" के नाम से सम्मानित कर अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जनहितार्थ कार्य करने वालों के प्रोत्साहन से समाज में अवश्य ही सकारात्मक बदलाव आयेगा । उन्हें इन कार्यों को सुचारू रूप से आगे भी जारी रखना चाहिए । ये विचार जमात ए इस्लामी हिंद नार्थ वेस्ट के अध्यक्ष प्रोफेसर अयूब खान ने "नागपुर हीरो सत्कार कार्यक्रम" की अध्यक्षता में कहे । यह कार्यक्रम झींगा बाई टाकली के आविष्कार कालोनी में नार्थ वेस्ट संगठन के सभागृह में आयोजित किया गया था । उन्होंने   पवित्र क़ुरआन के संदर्भ से कहा कि ऐसे सामाजिक कल्याणकारी लोगों के प्रयासों से ही साक्षरता और अच्छाइयां फैलती हैं। जमात ए इस्लामी हिंद इस प्रकार के बहुत से जन सेवा भाव में कार्य कर रही है वह चिकित्सा शिविर, रक्तदान शिविर, निर्धन छात्र छात्राओं, विधवाओं और अनाथों की सहायता करती रहती है । उन्होंने कहा कि नागपुर के अलावा इस संगठन के द्वारा बहुत से स्थानों पर ब्याज से मुक्त सोसायटी भी चलाई जा रही है ।
कार्यक्रम के अतिथियों में जरीपटका के डॉ विनकी रुघवानी ने इस अवसर पर कहा कि हमारी संस्था की ओर से सिकल सेल और थैलेसीमिया का निशुल्क इलाज किया जाता है और इन लोगों के प्रति समाज में समय समय पर जागरुकता भी पैदा की जाती है हमारी संस्था की ओर से एक मुस्लिम बच्चे के बोन मैरो ट्रांसप्लांट का  निशुल्क इलाज बैंगलोर में कराया गया जिसका ख़र्च 15 लाख रुपए था।
   
       विष्णु मनोहर ने बताया कि विभिन्न समस्याओं के कारण किसानों की आत्महत्या से उनके बच्चों का जीवन संकट में हो जाता है, हम उन बच्चों की शिक्षा दीक्षा , पालन पोषण और स्वास्थ्य की देखभाल निशुल्क करते हैं, उन्हें अवसाद मुक्त करने की भरपूर कोशिश करते हैं । इस समय हमारे पास 24 बच्चे हैं। हमारी संस्था को इन बच्चों के लिए इतवारी के अनाज विक्रेता हबीब भाई ने 1 वर्ष का चावल दान किया है ।
       इक़बाल कश्मीरी ने बताया कि 10 से 12 वर्ष के आयु के बच्चों को फुटबॉल के अलावा दूसरे खेलों की निशुल्क ट्रेनिंग दी जा रही है । उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष महाराष्ट्र टीम में नागपुर के 34 बच्चों का चयन होता है और उन्हें एजी ऑफिस सिटी पुलिस एसी रेलवे सेंट्रल रेलवे आदि कार्यालयों में नौकरियां भी मिलती हैं । जिन बच्चों को शिक्षा में रुचि ना हो उन्हें हमारे साथ इन खेलों में ट्रेनिंग दिलवाई जाना चाहिए ।

      तनवीर मिर्ज़ा यशोधरा बहुउद्देशीय संस्था के संचालक हैं , उन्होंने बताया कि शहर में आज 850 कालेज हैं लेकिन उन्हें में इस और  रिसर्च नहीं हो पा रही है कि बढ़ते कचरे से किस प्रकार खाद्य बनाई जाए और  आसपास के किसान उससे लाभ प्राप्त कर सकें। पर्यावरण के के क्षेत्र में हमारा बहुत बड़ा योगदान है हमारे द्वारा पक्षियों के घोंसले और ऑर्गेनिक खाद बनाई जाती है , निशुल्क पौधे वितरित किए जाते हैं। उन्होंने पानी के संरक्षण और इंटरनेट को रिसर्च का माध्यम बनाने पर ज़ोर दिया ।

    कार्यक्रम में मोइन क़ाज़ी , युसुफ़ क़ाज़ी और जन आक्रोश के सदस्य भी उपस्थित हुए । जन आक्रोश के अध्यक्ष अशोक करंदिकर ने बताया कि हमारी संस्था से सेवानिवृत्त व्यक्ति जुड़ते हैं और नागपुर संभाग में यातायात दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए लोगों को ट्रैफिक नियमों का पालन करने बाबत जानकारियां दी जाती हैं ।

   हेपी थाट्स महादेव विटोले ने बताया कि हमारे माध्यम से वृक्षारोपण किया जाता है और पौधे की देखभाल तब तक की जाती है जब तक कि वे पेड़ न बन जाए।  कार्यक्रम का आरंभ हाफ़िज़ शाकिरुल अकरम फ़लाही ने पवित्र क़ुरआन पठन से किया , इफ़्तिख़ार अहमद ने प्रस्तावना रखी , नाज़िमुद्दीन ग़ाज़ी ने संचालन किया । कार्यक्रम में अत्यधिक संख्या में लोगों की उपस्थिति थी ।
 जमात के अन्य कार्यक्रम--
सेंट्रल संगठन की ओर से " टीबी डे" के रूप में मोमिनपुरा के विभिन्न स्थानों पर टीबी से संबंधित जानकारियों के बैनर लगाए गए ।
     नार्थ संगठन की ओर से चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया । यह शिविर मेडिकल सर्विस सोसायटी आफ इंडिया नागपुर , एनएमसी और कुणाल हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में भीम नगर के धामकुट्टी बुध विहार में आयोजित किया गया था। इस शिविर में 220 रोगियों ने लाभ उठाया । 50 रोगियों के ईसीजी किए गए तथा 100 रोगियों की शुगर जांच की गई। एनएमसी रेडियोलॉजिस्ट टीम ने 30 रोगियों को चेस्ट एक्स रे के लिए चुनाव किया , जिनका राजीव गांधी हेल्थ स्कीम के तहत उपचार किया जाएगा।
   कैंप का शुभारंभ नार्थ संगठन के अध्यक्ष इरशादुर्रहमान ख़ान के हाथों हुआ । इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समाज सेवा के माध्यम से ही हम गरीबों का दुख दर्द बांट सकते हैं। इस संबंध में पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा कि तुममें सर्वश्रेष्ठ वे हैं जो दूसरों के लिए लाभदायक हों। क़ाज़ी शफीक़ अहमद ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी ।
    इस शिविर में डॉ नासिर इकबाल , डॉ शाद अमन , डॉ आरिफ़ खान, डॉ हारिस ख़ान तथा कुणाल हॉस्पिटल के डॉ बलवीर सिंह, मैनेजर रणजीत प्रजापति, सिस्टर बर्खा कारोड़े,  अनामिका विश्वकर्मा, सिस्टर सुषमा वानखेड़े और एंबुलेंस इंचार्ज दिलीप ठाकरे के साथ ही क़ाज़ी शफ़ीक़ अहमद और एम एस एस नागपुर अध्यक्ष डॉ नईम नियाज़ी ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं ।
   एमआर टीम में शाहबाज़ अंसारी, रहीम तालिब, मुशरी अहमद, अवैस अंसारी, सादिक़ अंसारी, तहसीन अंसारी ने निशुल्क रोगियों को दवाइयां वितरित कीं।

डॉ एम ए रशीद
मीडिया सचिव
जमात ए इस्लामी नागपुर

Wednesday, March 13, 2019

भव्य नि:शुल्क चिकित्सा शिविर संपन्न, जमाअत इस्लामी हिंद नागपुर



भव्य निःशुल्क चिकित्सा शिविर में  1100 से अधिक रोगी लाभान्वित हुए

रोगी की जान बचाना हमारा प्रमुख कर्तव्य बनना चाहिए,  ना कि पैसे वसूलते रहना हमारा उद्देश्य हो - डॉ. परवेज़


 नागपूर: जमाअत ए इस्लामी हिंद नागपूर सेन्ट्रल और मेडिकल सर्विस सोसायटी आॅफ़ इंडिया नागपूर  के संयुक्त तत्वाधान में मोमिनपूरा के समाज भवन  में भव्य निशुल्क शिविर का आयोजन किया गया । इस शिविर का शुभारंभ मेडिकल  सर्विस सोसायटी के राज्य अध्यक्ष डॉ. परवेज़ मांडवीवाला  हस्ते किया गया । इस अवसर पर  डॉ. परवेज़ मांडवीवाला ने अपने संबोधन में कहा कि  मेडिकल सर्विस सोसायटी ऑफ इंडिया (एम एस एस)  चिकित्सकों का एक संगठन है। यह संगठन रोगियों की सेवा के लिए कार्यरत है । उन्होंने कहा कि अच्छे चिकित्सक वे हैं जो सत्य निष्ठा और उत्तरदायित्व के साथ रोगियों का इलाज व सेवा कर सके । चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर चिकित्सक यदि मानव सेवा मैं उसका व्यव्हार करता है तो वह सर्वश्रेष्ठ कार्य है ।
    उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का व्यवसाय इंसानों के दुख दर्द को दूर करने के लिए है, तभी पीड़ित और दुखित लोग उपचार के लिए अपनी परेशानियां लेकर चिकित्सकों के पास आते हैं। वे अपनी जान उनके हवाले कर देते हैं , उनकी जान बचाना हमारा प्रमुख कर्तव्य बनना चाहिए,  ना कि   पैसे वसूलते  रहना हमारा उद्देश्य हो । लालची और लोभी बनकर रुपए पैसा कमाना इस्लाम के अनुसार हराम अर्थात भ्रष्ट माध्यम है , इस में बरकत नहीं रहती, पुण्य नहीं मिलता , जबकि हलाल अर्थात नैतिक तरीके से कमाई गई दौलत में अल्लाह बरकत डालता है । इस बरकत से हमारी आवक भले ही थोड़ी सी क्यों ना हो उसका स्वरूप लाखों दर्जे का हो जाता है। शिक्षा प्राप्त करने पश्चात हमें क़ुरआन से मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए । क़ुरआन के  मार्गदर्शन से हम  इंसानियत की भलाई के लिए बेहतरीन कार्य कर सकते हैं । संगठन के ज़िलाध्यक्ष डॉ.आसिफुज़्ज़मा ख़ान ने संचालन और एमएसएस के ज़िला अध्यक्ष डॉ. नईम नियाज़ी ने आभार व्यक्त किया ।
   इस शिविर में नागपूर के सुप्रसिद्ध ह्रदय रोग तज्ञ डॉ .अज़ीज़ खान, होमियोपैथिक डॉ. रियाज़ अहमद, संगठन के शहर अध्यक्ष डॉ.अनवार सिद्दीकी तथा सेन्ट्रल जमाअ़त के अध्यक्ष अशरफ़ बेलिम उपस्थिति थे।
इस शिविर में महानगर के विशेषज्ञों में डॉ, सय्यद काशिफ़, डॉ.आसिफ़ कुरैशी, डॉ.फैसल ख़ान, डॉ.सय्यद तारिक़, डॉ. कशफ़ खान, डॉ.शबीना अंसारी, डॉ.वीरानी, डॉ.शफ़ी ख़ान, डॉ.बुशरा सरोश, डॉ. तय्यबा अंसारी, डॉ.ज़ुबैर क़ाज़ी, डॉ. शोएब ख़ान, डॉ. नुरुल अमीन , डॉ. इद्रीस शेख़ के अलावा बहुत से चिकित्सकों की टीम ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं । इस शिविर में ह्रदय, हड्डी, दंत , डायबिटीज़ जैसी बहुत से रोगों का उपचार कर उन्हें निशुल्क दवाइयां भी प्रदान की गईं । शिविर में  1100 से अधिक रोगी  लाभान्वित हुए ।

डॉ एम ए रशीद
मीडिया सचिव
जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर

Monday, March 11, 2019

महिला दिवस मनाया JIH महिला विभाग नागपुर



जेआईएच वेस्ट की महिला विभाग ने मनाया महिला दिवस

नारी का ना हो अपमान- यही है इस्लाम का पैग़ाम - डॉ सबिहा हाशमी
    महिला के विरुद्ध अत्याचार जमाअ़त ए इस्लामी हिंद की थीम पर यह कार्यक्रम हो रहे हैं ।सभी प्रकार के अधिकारों के बावजूद महिलाएं बहुत से अत्याचारों से जूझ रही है । बलात्कार, शोषण, घरेलू हिंसा ,दहेज प्रताड़ना ऐसे बहुत से अत्याचारों से ग्रस्त है। स्वतंत्रता के नाम पर महिलाओं के साथ शोषण किया जा रहा है। भारतीय नारी की संस्कृति और सभ्यता प्रभावित हो रही है। आवाज़ उठाने पर रूढ़ीवादी कहकर इन अत्याचारों से ध्यान हटाया जाता है । शिक्षित महिला भी घरेलू हिंसा का शिकार है।
"नारी का ना हो अपमान- यही है इस्लाम का पैग़ाम"  के विषय पर  नागपुर महिला विभाग की शहर अध्यक्षा डॉ सबिहा हाशमी ने  अध्यक्षीय संबोधन में कहे। यह कार्यक्रम जेआईएच, नागपुर वेस्ट महिला विभाग के तत्वावधान में जाफ़र नगर के ओल्ड चौपड़े लान में आयोजित किया गया था । उन्होंने बताया कि इस्लाम में औरतों के साथ अच्छे व्यवहार का आदेश दिया गया है, वैवाहिक जीवन को सफल बनाने के लिए पति पत्नी के अधिकार बताए गए हैं , क़ुरआन में पत्नि के संबंध में कहा गया है कि हो सकता है एक बात तुम्हें नापसंद हो तो दूसरी ख़ूबी तलाश करो । आज संतान माता पिता की अवहेलना कर रही हैं ,माता पिता की सेवा करने की बजाए उन्हें वृद्धाश्रम पहुंचाया जाता है, लेकिन इस्लाम में इस वृद्ध आश्रम की कोई कल्पना नहीं है । उन्होंने कहा कि सामाजिक , आर्थिक शोषण और अर्ध नग्नता के पहनावे पर रोक लगना चाहिए  , कोई धर्म महिलाओं पर अत्याचार नहीं सिखाता ।
   दैनिक भास्कर, नागपुर की वरिष्ठ पत्रकार  श्रीमती सोनाली सिंह ने "भारतीय समाज में नारी कितनी सुरक्षित कितनी असुरक्षित " पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सैद्धांतिक रूप से महिला को सुरक्षित माना जा सकता है, लेकिन ऐसा पूरी तरह से ठीक नहीं है । आधुनिक और वैज्ञानिक युग में महिलाओं को काफी क्षति पहुंची है, टेक्नालॉजी का व्यवहार महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रहा है , मोबाइल और सोशल मीडिया इसके साधन बन गए हैं । दहेज दान में भी आधुनिक चीज़ें मांगी जा रही हैं। शिक्षित और जागरूक होकर ही महिलाएं किसी सकारात्मक दृष्टिकोण पर पहुंच सकती हैं।
  साकार फाउंडेशन की श्रीमति वैशाली चोपड़े ने " समाज के उत्थान में महिलाओं की भूमिका " पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भक्ति समाज के परिवर्तन का महत्वपूर्ण अंग है ,वह हमें निष्ठा सिखाती है ,किसी गलत कार्य पर अदृश्य शक्ति ही हमें डरती है । "मीरा बाई" के संदर्भ से वे अपनी बात कह रही थीं । एक मां ने ही शिवाजी के अंदर आदर्श संस्कार परावन चढ़ाए थे ।
  काउंसलर फ़रत क़ुरैशी ने " काउंसलर फ़रत क़ुरैशी ने " घरेलू हिंसा" पर प्रकाश डालते हुए कहा कि घरेलू हिंसा चार दीवारी में पारिवारिक सदस्यों के बीच घटित होती है जिसमें मानसिक, शारीरिक ,आर्थिक और अप शब्दों के इस्तेमाल से प्रताड़ित किया जाता है । दूसरी ओर हमें अपने बच्चों की सही परवरिश करनी होगी जिससे  ना हमारे बच्चे घरेलू हिंसा के शिकार हो और नाही किसी के साथ हिंसा करे। बच्चो को प्यार के साथ उन पर नज़र रखनी होगी कि हमारे सगे संबंधी या हमारे मित्रो का व्यवहार उन के साथ सही है या नही।  उन्होंने कहा कि बेटा बेटी दोनों की शिक्षा आदर , सम्मान वाली होना चाहिए , वह गृहस्थी को चलाने के लिए रुकावट नहीं बनना चाहिए , घरेलू हिंसा को मिल बैठकर हल किया जाना चाहिए , इस्लाम ने हम महिलाओं को समानता के बहुत से  अधिकार दिए हैं।
   मराठा सेवा संघ की श्रीमती प्रेमलता जाधव ने " बेटी का वरदान, नारी का सम्मान " विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं और बेटियों के बिना संसार नहीं चल सकता। बेटियों की ऊंचाइयां छूने में उनकी मां का प्रेरणादायक हाथों का कमाल होता है। आज का दिन हम सावित्रीबाई फुले, जिजाऊ माता, फ़ातिमा शेख को समर्पित करते हैं । इनके ही  परिश्रम ने महिलाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक बनाया गया था । आज युवतियों को नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है ।
   कार्यक्रम का आरंभ कुरआ़न पठन से अज़रा परवीन ने तथा
संचालन आबिदा ख़ान ने किया। अत्यधिक संख्या में महिलाएं और युवतियां उपस्थित थीं ।

डॉ एम ए रशीद
मीडिया सचिव
जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर

Friday, March 8, 2019

WomenInIslam InternationalWomensDay विश्व_महिला_दिवस जमाअत ए इस्लामी हिंद महिला विभाग नागपुर


प्रेस विज्ञप्ति
   हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फ़रमान है कि " अगर कोई औरत या कोई लड़की किसी कारण भाई के घर में या पिता के घर में वापस आती है तो उसकी देखभाल करना और उसकी इज़्ज़त को ठेस ना पहुंचाना यह भाई के लिए और पिता के लिए बहुत ज़्यादा ज़रूरी है ।" अगर उसे किसी तरह की तकलीफ़ पहुंचाई जाती है तो वह पाप की सीमा में आएगा । और उस को इज़्ज़त देना , उसका ख़्याल रखना यह बाप के लिए और भाई के लिए बहुत ज़्यादा ज़रूरी है । इस्लामी शिक्षाओं के अंतर्गत कुरआन ए मजीद में आदेश दिया गया है कि पति को चाहिए कि वह पत्नी के साथ अच्छा बर्ताव करे। महिला को सताना या उसके लिए सताने  के रास्ता बनाना बहुत ग़लत बात है। इस्लामी शिक्षाओं के अंतर्गत
जो मां का अपमान करता है वह अल्लाह का अपमान करता है और जो अल्लाह का अपमान करता है उसका पतन निश्चित है।
इस्लाम में महिलाओं को विरासत का हक एक तिहाई दिया गया है,  पति की विरासत हो या पिता आदि की , सब में महिलाओं का हक़ सुनिश्चित किया गया है। इस्लाम में इस तरह के अधिकारों से बेटी की पैदाइश से घर में खुशी का माहौल होना चाहिए।
    समाज में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं अत्यधिक बढ़ती जा रही हैं । इस संबंध में हमारा इकट्ठा होकर आवाज़ उठाना इस बात की दलील है कि हम एक दूसरी महिला पर अत्याचार के प्रति कितने दुखित होते हैं । किसी भी संप्रदाय और धर्म की महिला पर किसी भी अपराध के होने पर हमें एहसास होता है कि वह हमारे ही वर्ग की है । इस बात का एहसास हम सबको होना चाहिए ताकि हम आगे मिलजुल कर हर कठिनाइयों और परेशानियों का मुकाबला कर सकेें। इस्लाम की शिक्षाएं सभी इंसानों के लिए हैं । हमें जागना चाहिए और अपने अधिकारों को जाना चाहिए। हमें संवैधानिक अधिकार दिए गए हैं, अधिकार मिलने के बावजूद भी महिलाएं असुरक्षित हैं । यदि हम अपने प्रत्येक अधिकारों के बारे में जागरूक हैं तो फिर कहा जा सकता है कि किसी भी महिला पर कोई अत्याचार नहीं कर सकता । नारी का काम कोई पुरुष नहीं कर सकता इसी कारण उनमें समानता नहीं हो सकती, लेकिन इन दोनों का बैलेंस होना ज़रूरी है । इस्लाम ने आज से 1400 वर्ष पहले वे अधिकार बता दिए जो नारी की आवश्यकता में आते हैं । इस्लाम ने नारी को जीने का अधिकार दिया है ।
यह विचार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में संविधान चौक पर आयोजित मानव श्रृंखला के अंतर्गत विभिन्न संगठनों की उपस्थित महिलाओं में उज़मा पारेख़, हैरिटेज इंटरनेशनल स्कूल की फ़ायज़ा रिज़वान मेम, वंदना वनकर रुमाना कौसर , अतियातुल्लाह,ताहिरा ख़ान और अर्चना एवं मयूरी माटे महिला अधिवक्ताओं आदि ने व्यक्त किए ।
    अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के  अवसर पर महिलाओं पर होने वाले उत्पीड़न जैसे घरेलू हिंसा, बलात्कार, शोषण, नौकरी पेशा करके घर चलाने को मजबूर करना, विज्ञापन  के नाम पर अश्लीलता, संतान की अवज्ञा , वृद्ध आश्रमों का बढ़ता चलन ,महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन के साथ मिलकर शहर की विभिन्न महिला संगठनों ने संविधान चौक पर मानव श्रृंखला बनाई गई और प्ले कार्ड्स द्वारा उन सभी पर रोकथाम की मांग की गई। इस कार्यक्रम में जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर की महिला विभाग तथा महिला पाणी मंच, अखिल भारतीय सत्यशोधक महिला महासंघ, आवाज़ फाउंडेशन, हिंदी महिला समिति, ओ बी सी महिला मंच, जिजाऊ ब्रिगेड आदि महिला संगठनों ने भाग लिया।
  इस कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं की ओर से आवाज़ उठाई गई कि नारी के मान , सम्मान की सुरक्षा से ही समाज में उसे उच्च स्तर का दर्जा मिल सकता है ।
   आज डोमेस्टिक वॉयलेंस,घरेलू हिंसा, फैमिली झगड़े,फ्लॉप मैरिज लाइफ,पति उत्पीडन, संतान की ओर से अनदेखी नारी जीवन को प्रभावित कर रही है , दूसरी ओर इन्हीं कारणों से बच्चों के संस्कारों का स्तर गिर रहा है ।
फैशन के नाम पर औरत का शारीरिक प्रर्दशन हो रहा है ,चरित्र का स्तर गिर रहा है ,बलात्कार, शारिरिक शोषण,कन्या भ्रूण हत्त्या, दहेज बलि  सामाजिक उत्पीडन का कारण बन रही है । नेट एडवरटाइज़िंग,महिलाओं की गुप्त बातें को एडवरटाइजिंग से समाज में फैलाना,अश्लील फिल्में,फैशन शो, मॉडलिंग अंतर्गत नारी का सांस्कृतिक उत्पीडन हो रहा है । घरेलू संपत्ति से बेदखल ,जबरन नौकरी और घर चलाने पर मजबूर करना,सेक्स वर्कर,डांस बार और वैश्या वृत्ति नारी के आर्थिक उत्पीडन का कारण बन रही है । कार्यक्रम समाप्ति पश्चात आदरणीय कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपा गया ।
डॉ एम ए रशीद
जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर

Wednesday, March 6, 2019

जमाअत ए इस्लामी हिंदी कमांडर इन चीफ ऑफ पीस आर्मी ऑफ इंडिया.


कमांडर इन चीफ ऑफ
पीस आर्मी ऑफ इंडिया

-एम. आय. शेख

हो ना ये फूल तो बुलबुल का तरन्नुम भी न हो
 चमने दहेर में कलियों का तबस्सुम भी न हो

          28 फरवरी को जब मरकजी हुकूमत (केंद्र सरकार) ने जमाते इस्लामी जम्मू अँड कश्मीर पर पाबंदी आयद की तो रिपब्लिक टि.व्ही. के अस्बीयत पसंद (पक्षपाती) अँकर अरनब गोस्वामी को मानो हिस्टेरिया (हर्षवायू) का सा झटका आ गया. उसी झटके के असर में उन्होंने जमाते इस्लामी हिंद के अमीरे जमात मोहतरम जलालुद्दीन उमरी सहाब को कुछ इस अंदाज में "कमांडर-इन-चीफ" कहेकर पेश किया के, गोया वो किसी अस्करी तंजीम (सशस्त्र दल) के कंमाडर हों. इतनाही नहीं उन्होंने मोहतरम उमरी सहाब की तस्वीर के बॅकग्राऊंड में मसूद अजहर की संपत्तीयों, बैतुल हराम, मस्जिदे नबवी और मस्जिदे अक्सा की तस्वीरें चला दी.

     इस खबर से मोहतरम उमरी एकदम लाईन लाईट (प्रकाशझोत)में आ गए. आप अमीरे जमात होने के बावजूद इस्लमी एटिकेट्स के कारण इतने लो प्रोफाईल रहते हैं के, गैर दिनी हलके के कई लोग आपके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते.

       जब जमात ने प्रेस कॉन्फ्रन्स करके रिपब्लिक टी.व्ही. के खिलाफ कानूनी कारवाई करने की बात कही तो अरनब गोस्वामी ने बिलाशर्त माफी मांगनेमे ही आफियत (खैर) जानी. अब चूंके मामला खतम हो चुका है मगर फिर भी मेरी दानिस्त में ये सही मौका है के अम्न के इस कमांडर इन चीफ का तआरूफ अवाम सेे कराया जाए.

           सय्यद जलालुद्दीन उमरी

    आपका पूरा नाम सय्यद जलालुद्दीन उमरी है. आप तामिलनाडू के अरकाट में 1935 में पैदा हुए. आप की शुरूवाती तालीम अरकाट में ही हुई. बाद अजां जामिया दारूस्सलाम उमेराबाद तामिलनाडू में आपने दाखला लिया. 1952 में फाजिल की सनद हासिल की. साथ ही मद्रास विश्‍वविद्यालय से फारसी भाषा में मुन्शि का कोर्स मुक्कमल किया. पढने के शौक के चलते आप यहीं पर नहीं रूके बल्के आपने अलिगढ मुस्लिम विश्‍वविद्यालय से इंग्लिश में बी.ए.किया.

         आपका शुमार दुनिया के बेहतरीन आलिम-ए-दीन में किया जाता है. आप अपने इब्तेदाई जिंदगी में ही जमाते इस्लामी हिंद से जुडे. आपने तीन दर्जन से ज्यादा किताबें लिखी हैं. जिनमें से 1. मारूफ व मुनकर 2. इस्लाम की दावत 3. मुस्लिम औरत के हुकूक और उनपर एतेराजाद का जायजा 4. सेहत ओ मर्ज और इस्लाम की तालीमात 5. इस्लाम में खिदमत-ए-खल्क का तस्सवूर जैसी बेस्ट सेलर किताबें शामिल हैं.

      आप ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के नायब सदर होने के साथ-साथ दर्जनों फलाही इदारों से मुन्सलिक हैं. आपने दुनियाभर की तंजीमों की दावत पर कई बार आलमे इस्लाम का सफर किया हुआ है.

     इतनाही नहीं आज भी कई इस्लामी मुल्कों के मेहमान जब दिल्ली में आते हैं तो उनमें के कई मर्कज-ए-जमाअत-ए-इस्लामी में आकर आपसे मिलकर फक्र महेसूस करते हैं. खुद जमाते इस्लामी में तो आपका एहतराम इतना है के, उसे लफ्जों में बयान नहीं किया जा सकता.

        आपकी अमारत में जमाते इस्लामी हिंद मुल्कभर में मजहबी, मुआशरती (सामाजिक) और तालीमी (शैक्षणिक) जैसे कई हल्कों (क्षेत्र) में काम करती है. इस लिहाज से आप के सारे मे कहा जा सकता है के, हां ! वो कमांडर इन चीफ हैं मगर किसी सशस्त्र दल के नहीं बल्के पीस आर्मी ऑफ इंडिया के.

     जमाते इस्लामी हिंद वाहेद जमात है जो हिंदू-मुस्लिम एकजहती के लिए 1941 से कोशां हैं. इसलिए के इस जमात के बानी सय्यद अबुल आला मौदूदी रहे. ने जहां सावरकर के ’हिंदू राष्ट्रवाद’ का विरोध किया था वहीं मुस्लिम लीग के ’मुस्लिम राष्ट्रवाद’ का भी विरोध किया था.

      जमाते इस्लामी पूरी इन्सानियत के भलाई की बात करती है और ये भलाई इस्लामी तालीमात को आम करने से आयेगी. इस बात पर एतेमाद (विश्‍वास) रखती है. इसीलिए अकामत-ए-दीन (दीन की स्थापना) को अपना नस्बुलऐन (उद्देश) मानती है.

      खिदमत-ए-खल्क (समाज सेवा) के काम में जमाते इस्लामी पेश-पेश रहती है. कई दवाखाने, बिलासुदी पतसंस्थाएं, स्कूल, कालेज जमात मुल्कभर में चलाती है.

     कुदरती आफात (प्राकृतीक आपदा) में जमात अपनी खिदमत बिला-तफरीक-ओ-मजहब-व-मिल्लत (धर्म का फर्क किए बिना) सबको देती है. पिछले दिनों केरला में आयी बाढ के बाद जमात ने रिलीफ का बडा काम किया. मुत्तासेरीन (बाढग्रस्त) के लिए जब घर बनाकर दिए तो मुसलमानों के साथ-साथ हिंदू जरूरतमंदों को भी दीए.

जमाते इस्लामी जम्मू अँड कश्मीर

     एक बात स्पष्ट है के, जमाते इस्लामी जम्मू अँड कश्मीर और जमाते इस्लामी हिंद का आपस में कोई संबंध नहीं है.

       जमाते इस्लामी के बानी सय्यद अबुल आला मौदूदी के विचार इतना प्रभावशाली थे के, उन विचारों को दुनिया के कई मुल्कों ने स्विकार किया है. इसलिए जमाते इस्लामी हिंद के साथ-साथ जमाते इस्लामी जे अँड के, श्रीलंका, बांग्लादेश, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात ही नहीं ग्रेट ब्रिटन में भी जाते इस्लमी मौजूद हैं. जिनमे से की की वेबसाईटें भी नेट पर मौजूद हैं. लेकिन इनका आपस में कोई संबंध नहीं है.

    इनकी मिसाल ऐसी है जैसे के भारत में पश्‍चिम बंगाल में तृणमुल काँग्रेस है तो महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी काँग्रेस. दोनों के नाम काँग्रेस कॉमन है मगर दोनों में कोई संबंध नहीं है.

       जमाते इस्लामी की स्थापना 26 अगस्त 1941 को लाहोर में हुई. मुल्क का जब बंटवारा हुआ तो जमाते इस्लामी हिंद 1948 में बनी. उस वक्त जम्मू अँड कश्मीर का इलाका भी जमाते इस्लामी हिंद के अंदर आता था.

        लेकिन 1952 में जमात ने जम्मू और कश्मीर का डिस्पूटेड नेचर (वादग्रस्त स्थान) को देखते हुए दो रूक्नी कमिटी का गठन किया. जिसमें मोहतरम अहेरार और गुलाम रसूल अब्दुल्लाह शामिल थे.

       इन दोनो ने जमाते इस्लामी जम्मू अँड कश्मीर को जमाते इस्लामी हिंद से अलग करने की शिफारिश तो की ही साथ ही जमाते इस्लामी जम्मू अँड कश्मीर का अलग संविधान बनाया. जो नवंबर 1953 में कुबूल किया गया. अक्तूबर 1954 में एक विशेष बैठक श्रीनगर के बरझाला में हुई जिसमें मोहतरम सलाहुद्दीन को अमीर जमात के रूप में चुना गया.

           जब के जमाते इस्लामी हिंद का संविधान 13 एप्रिल 1954 से लागू किया गया. इस तरह जमाते इस्लामी हिंद और जमाते इस्लामी जम्मू अँड कश्मीर को एक समझना जिहालत (अज्ञानता) के सिवा कुछ भी नहीं.

       जमाते इस्लामी हिंद का लिखित संविधान है. इतनाही नहीं हर चार साल का मन्सूबा (प्लानिंग) जिस दिन बनता है उसी दिन प्रेस में रिलीज करण्यात दिया जाता है के जमात आनेवाले चार सालों में क्या करने जा रही है. जमात किसी भी खुफिया गतिविधीयों और हिंसात्मक कारवाईयों में विश्‍वास नहीं रखती. ये बात इतिहास से साबित है.

        जमाते इस्लामी जम्मू अँड कश्मीर उस राज्य की इतनी प्रभावशाली जमात है के दो मुख्यमंत्री रहे मोहतरमा महेबूबा मुफ्ती और मोहतरम उमर अब्दुल्लाह जो के आपसमे एक दूसरे के कट्टर हरीफ (प्रतिस्पर्धी) हैं भी जमात को लेकर एक सुर में बोल रहे हैं. दोनों ने जमात पर लगाई गई पाबंदी का खुलके विरोध किया है.

      इतनाही नहीं बीबीसी हिंदी सर्व्हीस ने 4 मार्च को अपने न्यूज ’बुलेटिन दुनिया’ में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें जम्मू और कश्मीर की आम जनता की प्रतिक्रियाएं दिखाई गई हैं. जिसमें लोगों ने जमात की पाबंदी का खुलकर विरोध किया है. जमाते इस्लामी हिंद ने भी इस प्रतिबंध का विरोध किया है.

     राज्यपाल सत्यपाल मलीक खुद स्विकार करते हैं के जमात एक विचार है जिसे खत्म नहीं किया जा सकता. उनका आरोप है के जमात के लोग सामाजिक कामों के आड में कट्टरवाद को बढावा देते हैं. उनके अस्करियत पसंदों से संबंध हैं. इस प्रतिबंध से उनका विचार तो खत्म नहीं होगा लेकिन उनकी गतिविधीयां जरूर कम होंगी. इस बयान के तनाजूर (परीपेक्ष) में आप खुद सोंचिए के, जो जमात 1953 से राज्य में शांतीपूर्ण ढंग से काम कर रही हो उसपर 2019 में बॅन लगाना कोई न्यायोचित बात हो सकती है क्या?

Saturday, March 2, 2019

जमाते इस्लामी, जम्मू व कश्मीर (Jel) पर प्रतिबंध बेबुनियाद


शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए जमाअत इस्लामी हिन्द (JIH) के अध्यक्ष मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी ने कहा कि जमाते इस्लामी, जम्मू व कश्मीर पर लगाया गया प्रतिबंध बेबुनियाद और ग़लत है। जमाते इस्लामी, जम्मू व कश्मीर कई सालों से शिक्षा, समाज सुधार एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं को समाज तक पहुंचाने का काम कर रही है। मौलाना उमरी ने सरकार से मांग की कि जितने भी लोग गिरफ्तार किए गए हैं उन्हें सरकार रिहा करे तथा संगठन से प्रतिबंध भी हटाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमाअत इस्लामी हिंद (JIH) द्वारा की गई अन्य बातें

जमाअत इस्लामी हिंद ने पिछले दो हफ्तों से भारत और पकिस्तान के बीच व्याप्त बेहद तनावपूर्ण स्थिति में कमी की सराहना की है।

जमाअत के राष्ट्रीय महासचिव इं. मोहम्मद सलीम ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि, “हम इस तनावपूर्ण स्थिति को समाप्त करने के पहल की सराहना करते हैं। हमें उम्मीद है कि शांति और सौहार्द का माहौल कायम होगा। ऐसा लगता है कि दोनों देश बातचीत और शांति के रास्ते तलाश रहे हैं।“

इं. सलीम के अलावा जमात के अध्यक्ष मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी और उपाध्यक्ष नुसरत अली ने भी मीडिया को संबोधित किया।

जमात के नेताओं ने 14 फरवरी के पुलवामा आतंकी हमले की निंदा की जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान मारे गए थे। उन्होंने वर्तमान तनावपूर्ण स्थिति को चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश के लिए सत्तारूढ़ भाजपा की आलोचना भी की।

महासचिव इं मोहम्मद सलीम ने कहा कि हम 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले की निंदा करते हैं। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जिस तरह से सत्ताधारी दल ने चुनावी फायदे के लिए पुलवामा हमले का राजनीतिकरण करने कि कोशिश की है वह बहुत ही भयावह है। ज़्यादातर राजनीतिक दलों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। पुलवामा हमले के दौरान सामने आई सुरक्षा खामियों की उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिए और जो लोग दोषी पाए जाएँ उनके विरुद्ध उचित क़दम उठाया जाना चाहिए।

14 फरवरी के पुलवामा हमले के बाद  दोनों मुल्कों के बीच तनाव बढ़ गया था। 26 फरवरी की सुबह भारत ने पकिस्तान पे हवाई हमले किए, 27 फरवरी को दोनों देशों ने एक दुसरे पर हमला किया। दोनों का कहना था कि उन्होंने एक दूसरे के कम से कम एक लड़ाकू जेट विमान मार गिराया है जिसमें भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन को पाकिस्तानी सेना ने जीवित पकड़ लिया था और तनाव की स्थिति बढ़ गयी थी। हालांकि 28 फरवरी को पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान ने शुक्रवार (1 मार्च) को भारतीय पायलट के भारत वापसी की घोषणा कर दी और अभिनंदन को आखिरकार शुक्रवार रात वाघा सीमा पर भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया जिससे तनाव की स्थिति से उबर कर उपमहाद्वीप में राहत महसूस की जा रही है।

पिछले हफ़्तों में मीडिया के एक बड़े हिस्से की भूमिका विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना थी, उस समय जब दोनों देशों के बीच स्थिति बहुत नाज़ुक हो गई थी। ऐसा लग रहा था जैसे टीवी स्टूडियो वार रूम में बदल गए हैं। मीडिया ने युद्ध भड़काने और बड़े पैमाने पर उन्माद का माहौल बनाया था।

जमाअत ने मीडिया के नकारात्मक रवैये की निंदा की और युद्ध-उन्माद से बचने का आग्रह किया। जमात के महासचिव ने कहा कि,“मीडिया के एक बड़े हिस्से की भूमिका विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना थी, उस समय जब दोनों देशों के बीच स्थिति बहुत नाज़ुक हो गई थी। ऐसा लग रहा था जैसे टीवी स्टूडियो वार रूम में बदल गए हैं। मीडिया ने युद्ध भड़काने और बड़े पैमाने पर उन्माद का माहौल बनाया था। देश को अपने पड़ोसी के साथ युद्ध में धकेलने की पूरी कोशिश की गयी। मीडिया हॉउस से निकलने वाली बहस, चर्चा और समाचार उकसाने के साधन बन गए थे। जमाअत इस्लामी हिंद मीडिया से हमारे राष्ट्र की सुरक्षा से संबंधित मामलों में बहुत परिपक्व और जिम्मेदार भूमिका निभाने की उम्मीद करता है।”

Friday, March 1, 2019

में भारत जा कर अपना बयान नहीं बदलू गा । पाकिस्तानी आर्मी ने मेरा बहोत अछे से ख्याल रख्खा ।। अभिनन्दन ।।


भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनन्दन का मिग 21 pok में जा गिरा। स्थानीय जनता ने मोब्लिंचिंग की कोशिश की और उनको लहूलुहान कर दिया।हमारे देश मे विगत दिनों हुई मोब्लिंचिंग कि घटनाओं में यह देखा गया कि पुलिस घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर होने के बावजूद पीड़ित(मुसलमान) को बचाने नही पहुंचती ,मगर यहां पाकिस्तानी फौज ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंच कर हमारे जवान " अभिनन्दन" को भीड़ के हत्यारे पंजों से बचाया!खुद अभिनन्दन ने पाकिस्तानी मेजर के सवालों के जवाब में जो कुछ कहा ,वह बताता है कि सीमा के उस पार उतनी हैवानियत नही है जितनी इस पार न्यूज़ चैनलों द्वारा भौंक भौंक कर दिखाई जाती है।

अभिनन्दन ने  स्पष्ट कहा की पाकिस्तानी फौज ने मुझे भीड़ के खूनी पंजों से बचाया ,उसके लिए उनका बहुत बहुत धन्यवाद !
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अभिनन्दन ने यह भी कहा कि आप सभी (याने पाकिस्तानी )भले लोग हैं , मैं चाहता हूँ कि भारतीय फौज भी इसी तरह का व्यवहार करे।मैं पाकिस्तानी सेना से प्रभावित हूँ!!
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अभिनन्दन ने यह भी कहा कि यहां मेरे साथ अच्छा व्यवहार किया जा रहा है ,यहां तक कि आपने पाकिस्तानी फौज द्वारा पेश की गई चाय तक की तारीफ की और कहा कि चाय बहुत अच्छी है- थैंक यू !!!
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ये सारी बातें बताती हैं कि न्यूज़ चैनल आपको दिनरात जो नफरत परोस रहे हैं,उसके पीछे उनका एक खास एजेंडा है। जब पाकिस्तानी फौज एक युद्धबंदी ( ? ) के साथ अच्छा व्यवहार कर सकती है तो समझ लेना चाहिए कि युद्धोन्माद भड़काने के पीछे किसका स्वार्थ है जिसे न्यूज़ चैनलों के ज़रिए साधने की कोशिश की जा रही है।।।
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अभिनन्दन को वापस आने दीजिये।मुझे यकीन है कि जिस तरह पाकिस्तानी फौज ने अपने व्यवहार से उनका दिल जीता है ,उसी तरह वे भी अपने व्यवहार से पाकिस्तानी फौज का दिल जीत कर आएंगे। मुझे उम्मीद है कि जब वे भारत आएंगे तो एक " शांतिदूत" बन कर आएंगे जिसके आगमन से दोनो देशों के बीच घुमड़ रहे युद्ध के बादल छंट जाएंगे और एक ऐसी फ़िज़ां की तामीर होगी जिसमें सारे मसलों का हल आपसी बातचीत ,सौहार्द्र और परस्पर समन्वय के ज़रिए निकाला जा सकेगा ///

मोहम्मद आरिफ दगिया
28/02/2019

Thursday, February 28, 2019

भारत स्काउट ट्रेनिंग केम्प जमिअत यूथ कल्ब गुजरात बनासकांठा


गुजरात के जिले बनासकाठा के बावलचुडी मे जमिअत यूथ कल्ब की ओर से चल रहे 3 दिवसीय "भारत स्काउट ट्रेनिंग केम्प "का समापन*        
तीन  दिवसीय  प्रवेश कोर्स ओर ऐस ऐल ऐम मास्टर प्रशिक्षण शिविर  दिनांक 23/02/2019 से 25/02/2019 को बावलचुडी में गुजरात स्टेट भारत स्काउट एंड गाइड के द्वारा संचालित किया गया जिसका नेतृत्व जमीयत उलेमा ए हिंद कर रही थी इस शिविर में 26 स्काउट मास्टर ओर 69 स्काउट प्रवेश कोर्स ने प्रतिभाग कर सफलता प्राप्त की । इस शिविर में प्रतिभागियों को स्काउट गाइड आंदोलन की जानकारी, प्रार्थना, झंडा गीत ,नियम, प्रतिज्ञा ,बाया हाथ मिलाना, सैल्यूट, प्रथमिक चिकित्सा,  आग जलाना तथा आग बुझाना , तंबू लगाना ,बी.पी. सिक्स एक्सरसाइज, मार्चपास्ट,कैम्प फायर , प्रार्थना सभा,गांठे एवं बंधन, मीनार बनाना , स्मार्टनेस एंड गुड ऑर्डर आदि जैसे विषयों का गहन अध्ययन कराया गया समापन के मौके पर जमीयत उलेमा ए हिंद के सचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी, ओर जमिअत युथ क्लब इंचार्ज मोलाना कलीमुलला साहब.ओर सदर जमीअत उलेमा बनासकाठा मोलाना अब्दुल कुदुस साहब, मध्यप्रदेश के हिदायतुल्ला सीददीकी साहब ,जमीयत उलमा ऐ हिन्द की ओर से आये स्काउट टेनर जमीयत चिल्ड्र्न विलेज अजार से आये हुवे मास्टर करीम साहब मौलाना अबुल हसन साहब सेवानी,मोलाना हिफ़्जुर्रेहमान थुर्,मोलाना उमर साहब बावलचुडी स्काउट बेसीक टीचर  जावेद भाई,जाबीर भाई हिफ़जुर भाई सहाबुददीन भाई ईकबाल भाई ओर जुलफ़िक्कार भाई के साथ अन्य स्काउट गाइड पदाधिकारी मौजूद रहे  साथ ही साथ शिविर के समाप्ति पर।
जमीयत उलेमा बनासकाठा के जिम्मेदारान ने हाजरी देकार प्रोगाम को सफ़ल बनाया

Monday, February 25, 2019

निशुल्क चिकित्सा शिविर नारखेड़ जमात ए इस्लामी हिंद


प्रेस विज्ञप्ति

नरखेड़ के नगर परिषद स्कूल में भव्य निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन

600 से अधिक रोगियों ने उठाया लाभ
 
    नरखेड़ के नगर परिषद स्कूल में जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नरखेड और मेडिकल सर्विस सोसायटी आफ इंडिया नागपुर के तत्वावधान में भव्य निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया । इस शिविर में क्रिसेंट नर्सिंग होम नागपुर के चिकित्सकों का सराहनीय योगदान रहा ।

शिविर में हृदय , डायबिटीज़ , दमा,  बाल , हड्डी , दंत रोगों के  साथ ही फेफड़ों की जांच की गई और इसके अलावा बहुत सी बीमारियों की निशुल्क जांच कर रोगियों को निशुल्क दवाईयां भी प्रदान की गईं। शिविर में ब्लड शुगर , ब्लड प्रेशर और ईसीजी की निशुल्क जांचें की गई‌ । इस कैंप में क्रिसेंट नर्सिंग होम के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ काशिफ़ सैयद , ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ मोहम्मद फैसल, डायबिटीज़ विशेषज्ञ डॉ हसनुलबन्ना, छाती रोग के डॉ सय्यद तारीक़ , बाल रोग विशेषज्ञ डॉ मुस्तफा अली, दंत रोग विशेषज्ञ डा ज़ुबैर क़ाज़ी तथा जनरल फ़िज़ीशियन में डॉ कशफ़ ख़ान , डॉ नईम नियाज़ी, डॉ तारीक़ अजमल, डॉ हारिस ख़ान, डॉ सलीम क़ाज़ी, डॉ शाद अमन, डॉ अकरम अंसारी , डॉ अल्फिया, डॉ गज़ाला  और डॉ नूरुल अमीन ने अपनी सेवाएं अंजाम दीं।

    शिविर की सराहना करते हुए माजी नगरसेवक जावेद ख़ान पठान ने कहा कि इस क्षेत्र में पहली बार इतने भव्य रूप में शिविर का आयोजन किया गया और उसे अत्यधिक प्रतिसाद भी मिला । रोगियों को सर्वश्रेष्ठ कंपनियों की दवाइयां निशुल्क दी गईं। कुछ रोगियों को अपनी शुगर की मात्रा अधिक निकलने पर उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आई है। शिविर में पधारे हृदय विशेषज्ञ डॉ काशिफ़ सैयद ने कहा कि  6 रोगियों को उनके स्वास्थ्य की दृष्टि से एंजियोग्राफी की अत्यधिक आवश्यकता है ‌। ग़रीब परिवार और छोटे से फुटकर विक्रेता  दिलीप सुरजुसे ने बताया कि ऐसे शिवरों का आयोजन आज की बहुत बड़ी आवश्यकता है । हमें नागपुर की तरह आधुनिक चिकित्सा और सुविधाएं अपने क्षेत्र में नहीं मिल पा रही हैं । आर्थिके दशा खराब रहने के कारण हम अच्छे चिकित्सकों तक नहीं पहुंच पाते , लेकिन इस कैंप में विशेषज्ञों की उपस्थिति से हम निर्धनों को बहुत सी सुविधाएं प्राप्त हुई हैं ।
     इस अवसर पर हाजी अमीन शेख़ ने कहा कि जनसेवा हमारे मुक़ामी संगठन जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नरखेड़ का आवश्यक कार्य है । इसी के मद्देनज़र इस कैंप का आयोजन किया गया था , कि क्षेत्रवासी अधिक से अधिक लाभ उठा सकें । शिविर में 600 से अधिक रोगियों ने लाभ उठाया । शिविर को सफल बनाने में इक़बाल अहमद, जब्बार शेख , उर्दू टीचर जमील अरशद , राजू क़ाज़ी, नसीर शेख़,विलायत अली , ग़ुलाम अली , अल्ताफ़ शेख, नूर सर, ज़ाकिर ख़ान  के अत्यधिक परिश्रम से यह शिविर  सफल रहा ।

डॉ एम ए रशीद
मीडिया सचिव
जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर

जमाते ए इस्लामी गुजरात रिलीफ जूनागढ़ अमरेली



जमाते इस्लामी गुजरात की रिलीफ विंग इस्लामी रिलीफ कमिटी गुजरात के वोलेंटीयर्स की टीम जूनागढ़ से  अमरेली जिले के धारी के करीब बसे गाँव सेमरडी में पुलिस दमन के शिकार हुए इंसानो की खिदमत में लग गई है।

फौरी तौर पर 45 राशनकिट गाँव में तकसीम की गई है।

अल्हम्दुलिल्लाह हमारे वोलेंटीयर्स बिला तफरिक मज़हब व मिल्लत इंसानो की खिदमत कर रहे है।

जमाते के हलके के ज़िम्मेदार अमरेली पहोचे है ग्राउंड रिपोर्ट हशील करने के लीये।इस वफद में मोहम्मद शफी मदनी साहब (सदर,ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशावरत गुजरात) वासिफ हुसेन (सेक्रेटरी,जमाते इस्लामी हिन्द-गुजरात) इकराम बेग मिर्ज़ा साहब (सेक्रेटरी,apcr गुजरात चैप्टर) जूनागढ़ से आरिफ भाई चाबीवाला ओर हनीफ भाई जेठवा शामिल है।

Sunday, February 17, 2019

फुटाल तालाब पर कैंडल मार्च, जमाअत ए इस्लामी हिंद नागपुर ।


फुटाला तालाब पर शहीद सैनिकों के प्रति कैंडल मार्च

नागपुर एन सी सी के छात्र , छात्राओं ने शहीद जवानों के प्रति प्रस्तूत किया मार्मिक गान

  आज 17 फ़रवरी को जमाअ़त ए इस्लामी हिंद  नागपुर पश्चिम विभाग ने फुटाला तालाब पर कैंडल मार्च में उपस्थित होकर कश्मीर की घटना पर शहीद सैनिकों और संतृप्त परिवार के प्रति गहरा दुख  प्रकट करते हुए अब्दुल अज़ीज़ ने कहा कि  इस्लाम धर्म अमन शांति का प्रतीक है। इस में पूरी इंसानियत को अल्लाह का परिवार बताया गया है । यह घटना अत्यधिक निंदनीय है । उन्होने कहा कि जमाअ़त ए इस्लामी हिंद भारत देश  में मुस्लिम समुदाय की सबसे बड़ी संगठना है । पिछले दिनों कश्मीर के हादसे पर  संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरीने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए संपूर्ण मुस्लिम समुदाय की ओर से दुख प्रकट किया था।
 हादसे पर श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए वसंत पांडे ने कहा कि हमें किसी अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए, हमें मिल जुल कर रहना चाहिए , यही देशभक्ति है । दुखित परिवार की हर संभव सहायता हमारा प्रथम कर्तव्य बनना चाहिए ।
   मोहम्मद अब्दुल सईद ने कहा कि यह कहना गलत है कि किसी इंसान की मृत्यु कारित करने पर वह मुसलमान जन्नत में जाएगा। पवित्र क़ुरआन के अनुसार किसी भी इंसान का नाहक़ क़त्ल संपूर्ण मानव जाति का क़त्ल है। इस अवसर पर नागपुर एन सी सी के छात्र , छात्राओं ने शहीद जवानों के संबंध में मार्मिक गान प्रस्तुत किया । कार्यक्रम में शिक्षिका श्रीमती अनीता दुबे, श्रीमती ज्योति अवस्थी , अध्यापिका श्रीमती प्रेमलता तिवारी विशेष रूप से उपस्थित थीं। समाज सेवी शैलेन्द्र अवस्थी ने प्रबंधन भार संभाला। कार्यक्रम  श्रीमती अलका पांडे की ओर से आयोजित किया गया था । उन्होंने शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कर उपस्थितियों का आभार माना । अत्यधिक संख्या में लोगों की उपस्थिति थी ।

डॉ एम ए रशीद
मीडिया सचिव
 जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर

Friday, February 15, 2019

पुलवामा हमले के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया!



पुलवामा हमले के बाद सोशल मीडिया पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाऐं देखने को मिल रही हैं। एक महाशय एक पोस्टर जारी करके सवाल कर रहे है कि ‘आमिर खान और हामिद अंसारी अब डर तो नहीं लग रहा है, सच में आपसे अब हमें डर लग रहा है’। एक महाशय ने लिख रहे हैं कि ‘हे उलेमाओं,इस्लाम को बदनाम कर रहे इन मुस्लिम आतंकवादियों को इस्लाम का दुश्मन कब घोषित करोगे ?’ इस तरह के दर्जनों स्टेटस मेरी नज़र से गुजरे हैं, यानी देशभक्ती का दायरा सिर्फ इतना भर है कि ‘सेना के जवान से शुरू मुसलमान पर खत्म’। इसके अलावा काट डालो, मार डालो, चालीस के बदले चार सौ यह तो कल से ही चला आ रहा है। बाकी कुछ ‘देशभक्त’ अभी भी अपने ही देश के मुसलमान के चक्रव्यूह को तोड़ ही नहीं पा रहे हैं और ‘बहाने’ से गालियां देकर ‘देशभक्ती’ का सबूत दे रह हैं। दिमाग़ में जब गौबर भर दिया जाता है तो देशभक्ती का दायरा भी सीमित होकर अपने ही हमवतनों को गालियां देने तक रह जाता है। सवाल पूछना चाहिये सरकार से, लेकिन सरकार से क्यों पूछें यह सरकार तो भक्ती के लिये है, इसलिये साफ्ट टार्गेट पकड़ लिया मुसलमान, और लग गए देशभक्ती दिखाने के लिये। अभी राष्ट्रवादी चैनल ‘आज तक’ दिखा रहा है कि ‘जिस पाकिस्तान की परस्ती में जैश-ए-मोहम्मद ने CRPF जवानों पर कायराना आतंकी हमला किया आज वही बहादुर सीआरपीएफ जवान दिल्ली में पाकिस्तान दूतावास की हिफाजत कर रहे हैं.’ अब इस कूड़मगज को कौन बताए कि पाकिस्तान दूतावास कराची या इस्लामाबाद में नही है बल्कि भारत की राजधानी दिल्ली में है, अगर उस पर कोई हमला करता है तो अपने दूतावास को बचाने के लिये पाकिस्तान की सेना नहीं आएगी, और न इससे पाकिस्तान का लॉ एंड आर्डर डिस्टर्ब होगा, बल्कि भारत का लॉ एंड ऑर्डर डिस्टर्ब होगा और उसकी रक्षा करना भारत सरकार का ही फर्ज है पाकिस्तान का नही। उस दूतावास में काम करने वाले भी अक्सर भारतीय ही होंगे।


लेकिन क्या इलाज करें उन दिमागों का जिन्होंने गौबर को च्वनप्राश समझकर खा लिया है। राष्ट्रवाद के चश्म पहनकर सरकार से सवाल ही करना भूल गए हैं। कौन पूछेगा कि भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को तुरंत इस्तीफा देकर मानना चाहिए कि वो अपनी ज़िम्मेदारी बार-बार निभाने में विफल रहे ? भारत के गृहमंत्री से कौन सवाल कहे कि उन्हें देश की जनता से वादा करना चाहिए कि पुलवामा के दोषियों को सात दिन के भीतर उस जन्नत में पहुंचवाएंगे जहां का वादा करके वो कश्मीरी नौजवानों को बहलाते रहे हैं। कौन मांग करे कि प्रधानमंत्री मोदी हर शहीद के परिवार को नौकरी दें, पेट्रोल पंप जैसी आजीविका का साधन दें, परिवार के सदस्य को नौकरी दें और वादा करें कि इस हमले को चुनावों में भुनाएंगे नहीं। कौन मांग करे कि खुफिया एजेंसियों के कर्ता- धर्ताओं को पद से हटाया जाए क्योंकि जवानों पर सीधे हमले जितने पिछले साढ़े चार सालों में हुए उतने कभी नहीं हुए और ये लोग कुछ भी पता लगा पाने में नाकाम रहे। आज भी श्रीनगर से बीस किमी दूर हमला होने का मतलब है इंटेलीजेंस की बड़ी नाकामी है। प्रधानमंत्री से कौन कहे कि आपने सर्जिकल स्ट्राईल का श्रेय बहुत जल्दी लिया था अब इस हमले के लिये भी खुद को दोषी मानिये? कौन पूछे कि सेना के साथ फोटो खिंचाना ही आपका फर्ज नही बल्कि सेना जो देश की रक्षा कर रही है उसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी भी आपकी है? लेकिन खामोश सवाल कोई नहीं, सिर्फ लगे रहे मुसलमान, पाकिस्तान, जवान यही है आज की देशभक्ती की पहचान।
रिपोर्टर वसीम अकरम त्यागी जी

कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफ़िले पर हमल,आतंकी,घ्रणित और कायरतापूर्ण कार्य: मौलाना महमूद मदनी



नई दिल्ली [ 15 फरवरी 2019 ] जमीयत उलेमा-ए हिंद  के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफ़िलेपर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है ।  उन्होंने कहा कि यह आतंकी,अमानवीय,घ्रणित और कायरतापूर्ण कार्य है जो कभी जिहाद नहीं होसकता, हिन्दुस्तान के सारे न्याय प्रिय नागरिक इस दर्दनाक घटना पर शहीदों के प्रति अत्यधिक दुख,श्रधांजली और आतंकियों के प्रति अत्यधिकघ्रणा को प्रकट करते हैं । हम सब शहीदों और उनके शोकाकुल परिवारों के साथ बिना किसी भेदभाव के,कंधे से कंधा मिला कर खड़े हैं ।         

मौलाना मदनी ने कहा कि इस आतंकी कार्रवाही ने कश्मीर में शांति व्यवस्था की स्थापना को और अधिक ख़तरे में डाल दिया है लेकिन हमेंहरगिज़ निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि शांति – व्यवस्था की स्थापना और आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष को हर स्तर पर पूरी शक्ति के साथ जारी रखना चाहिए



         

प्रेस विज्ञप्ति कश्मीर आतंकवाद हमले पर जमाअ़त ए इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष का शोक संदेश



नई दिल्ली -कश्मीर में कल हुए आतंकवादी हमले की  घोर निंदा करते हुए जमाअ़त ए इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद जलालुद्दीन उमरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए इस घटना पर अत्यधिक दुख व अफ़सोस और शोक प्रकट किया है। मौलाना ने कहा कि आतंकवाद और हिंसात्मक गतिविधियां मृत्यु और विनाश  का कारण बन सकती हैं , लेकिन इससे किसी समस्या का हल नहीं हो सकता । संगठन के अध्यक्ष ने कहा कि कल की घटना में 44 जवानों की मृत्यु हो जाना अत्यधिक दुख और परेशानी का कारण है , इसलिए वहां  द्वेष और नफ़रत की बजाय अमन व शांति के रास्ते तलाश करने की ज्यादा ज़रूरत है । यह रास्ता पारस्परिक वार्तालाप से ही निकल सकता है, जिससे कश्मीर के लोगों की परेशानियां समाप्त हो सके और वहां अमन व शांति का माहौल स्थापित हो सके।
     मौलाना ने इस हमले की सरकार की ओर से जांच के एलान को उचित बताते  हुए कहा कि इससे सच्चाई सामने आने की उम्मीद की जा सकती है और यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह आतंकवादी हमला कहीं कश्मीर के वातावरण को खराब करने, भारत पाकिस्तान संबंधों में तनाव पैदा करने या फिर देश में होने वाले जनरल इलेक्शन से पहले वातावरण को बिगाड़ने की कोई बड़ा षड़यंत्र तो नहीं है । संगठन के अध्यक्ष ने हादसे में मौत का शिकार होने वाले फौजी जवानों के संबंधियों से हमदर्दी प्रकट की और गंभीर एवं घायल फौजियों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआ की ।
डॉ एम ए रशीद
मीडिया सचिव
जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर