कल्याण शहर में अभिभावकों के मार्गदर्शन के सिलसिले में सोमवार, 25 दिसंबर को नेशनल उर्दू हाई स्कूल के विशाल मैदान में "पर्रश" नामक एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन कल्याण यूनिट (एसआईओ) और एस्पायर एजुकेशन सेंटर के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में शहर भर से करीब 2000 अभिभावकों ने हिस्सा लिया.
आधुनिक युग में माता-पिता की जिम्मेदारियां, बाल मनोविज्ञान और बच्चों की शिक्षा जैसे कई विषयों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की.
इस कार्यशाला में कल्याण शहर के जाने-माने शैक्षणिक एवं सामाजिक व्यक्तित्व डॉ. फुरकान मरमकर ने कहा कि शिक्षा और प्रशिक्षण जाहिर तौर पर एक साथ आने वाले शब्द हैं, लेकिन दोनों में अंतर है और इस अंतर को पहचानने के बाद ही गंभीरता का लेंस, एक आदर्श पालन-पोषण की गारंटी दी जा सकती है।
औरंगाबाद से आईं बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. खान मुबाशेरा फिरदौस ने प्रशिक्षण के क्षेत्र में मां की भूमिका क्या है विषय पर बहुमूल्य मार्गदर्शन दिया। इसके बाद श्री अदनान सरखोट साहब द्वारा "काश" नामक एक भावनात्मक नाटक प्रस्तुत किया गया। दर्शकों ने शुरू से अंत तक नम आंखों से इस नाटक को न सिर्फ देखा बल्कि महसूस भी किया.
कल्याण शहर के प्रसिद्ध कैरियर काउंसलर श्री मेशाल चौधरी ने प्रशिक्षण के संबंध में युवाओं का मार्गदर्शन किया।
विशिष्ट अतिथि श्री एस. अमीनुल हसन ने दर्शकों को बच्चों के मनोविज्ञान के बारे में बहुमूल्य बातचीत दी और उन्हें एहसास कराया कि उनमें से प्रत्येक अपने भाग्य के लिए एक रोल मॉडल है और उनके लिए यह महसूस करना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करके माता-पिता उनके मन में विद्रोही विचार पैदा करने के अलावा कोई लक्ष्य हासिल नहीं कर सकते।
कार्यशाला की दर्शकों द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की गई तथा भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का अनुरोध किया गया।


