Wednesday, June 17, 2020

एर्तग्रल देखें या न देखें?



एर्तग्रल ड्रामा इस वक़्त आम व खास मे बहस का मौज़ू बना हुआ है । जो ड्रामा देखने के क़ायल नहीं हैं वह इसे मुख्तलिफ वुजूहात के सबब हराम और शौक़ीन हज़रात इसे देखने की तलक़ीन करते नही थक रहे हैं ।
ज़रूरत एतिदाल की राह इख्तियार करने की है ।
अगर हम गौर करेंगे तो महसूस होगा कि पिछ्ली चार दहाइयों से बिलखुसूस दुनिया नज़रियाती और तहज़ीबी जंग मे मुब्तिला है और हर तहज़ीब के मानने वाले अपनी तहज़ीब को बरतर साबित करके आम करने की कोशिश करने मे मसरूफ हैं । मीडिया का इस्तेमाल इसके लिये बहुत बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। यह मीडिया तहज़ीब, रिवायात, खबरें वगेरह आम करने के साथ-साथ कारोबार का भी बहुत बड़ा ज़रिया है ।
इंसानी दिलचस्पी का एक बड़ा साधन अदब (लिटरेचर) है और यह अदब ही इस मीडिया की मक़बूलियत और कामयाबी का खास ज़रिया है । इसी के ज़रिये बड़े पैमाने पर अज़्हान बनाये और बिगाड़े जा रहे हैं ।
यह सब आम तौर से मुआशरे की अक्कासी करता है । हालांकि लिट्रेरी थ्योरी में यह बात भी बड़े वज़न के साथ कही जाती है कि मुआशरे के हालात के पलट थियेटर/सिनेमा वगेरह पसंद किये जाते हैं मसलन समाज खुशहाली के वक़्त ट्रेजिडी और ट्रेजिडी के वक़्त कॉमेडी पसंद करता है । यह भी थ्योरी है कि समाज को दोनो हालात से वाक़िफ़ कराने के लिये अदब का यह इस्तेमाल किया जाता है ।
जैसा कि अर्ज़ किया जा चुका है कि यह दौर तहज़ीबी बरतरी साबित करने का है। इसी मक़सद के तहत हमारे मुल्के अज़ीज़ मे रामायण और महाभारत को नश्र किया गया और फिर से किया जा रहा है । इन ड्रामो के मुख्तलिफ किरदारों को चुनाव मे उतार कर राय आम्मा (पब्लिक ओपिनियन)  को आज़माया गया और इनकी कामयाबी को मद्देनजर रखकर इस काम को आगे बढ़ाया गया । पिछ्ले सालों मे शुरु हुए मुख्तलिफ डैली सोप्स मे मज़हबी रिवायात को फरोग, हर त्योहार और रुसूम को बहुत बारीक़ी और तरतीब के साथ दिखाकर मुक़ामी त्योहारों वगैरह को क़ौमी बनाना बड़ा मक़सद था जिसके ज़रिये मुख्तलिफ तब्क़ात मे बटे हुए समाज को जोड़ने की काफी हद तक कामयाब कोशिश की गई जिसे हम अपने मुआशरे मे काफी हद तक महसूस भी कर रहे हैं ।

*अब बात करते हैं एर्तग्रल ड्रामे की।*
इसमे कोई शक नही कि यह महज़ एक ड्रामा है और इसे तक़्वे के फरोग के लिये नहीं बनाया गया है ।
एक ज़माना किताबो का था और आज का ज़माना डिजिटल और विज़ुअल किताबों का है ।
एर्तग्रल मे यह ज़रूर बात है कि यह मुस्लिम तारीख के एक अहम बाब खिलाफते उस्मानिया के क़याम और उसके ज़रिये किये गये कारनामों को किसी हद तक दिखाता है । ड्रामे गुलू (बातों को बढ़ा चढ़ा कर बताना) से खाली नही होते। लेकिन इसमे बार-बार नमाज़, अद्ल, सिलह रहमी, शक के बावजूद सबूत न होने पर सज़ा न देना, तादाद की क़िल्लत के बावजूद ईमान की ताक़त पर आगे बढ़ना और जुर्रत करना वगेरह जैसे मस्बत पहलुओं को उजागर किया गया । मुस्लिम तारीख जिसे आज हम में से 90% से ज़्यादा लोग भूल चुके हैं उसे फिर से याद दिलाने में यह ड्रामा मुआविन साबित हो रहा है । इससे पहले यह खिदमत नसीम हिजाज़ी वगैरह की नावल्स अदा करती रही हैं जिन्हे पढ़ कर न जाने कितने लोगों के ईमान ताज़ा हुए।

इससे पहले न जाने कितने ड्रामे तारीखी वाक़ेआत पर बन चुके हैं लेकिन आखिर क्या वजह है कि इसी एक एर्तग्रल ड्रामे से बहुत से लोगों की नींदें हराम और ईमान पर हमले महसूस हो रहे हैं?
यह दोनो चीज़ें एक साथ होना कुछ अजीब और साज़िशी तो नही ?

यह भी याद रखने के क़ाबिल है कि तुर्की फह्हाशी और उर्यानियत का गढ़ रहा है । पूरा मगरिबी  कल्चर वहाँ आम करके इस्लाम को खुरच-खुरच कर खत्म करने की कोशिश की गई। वहाँ हिजाब और दीगर इस्लामी शआइर पर पाबंदी यहाँ तक कि एक लम्बे अर्से तक अरबी ज़बान मे अज़ान तक पर भी पाबंदी रही और बड़ी क़ुर्बानियों के बाद अरबी अज़ान से पाबंदी हटाई गई।
वह मुल्क जहाँ शायद इस्लामी शआइर को दिखाना किसी खतरे से खाली नहीं था और बगेर उर्यानियत और फह्हाशी के किसी ड्रामे और फिल्म की कामयाबी के इम्कान ही न समझे जा सकते हों वहाँ इन तमाम बुराइयों से तक़रीबन पाक ड्रामा बनाना बहुत बड़े जिगर की बात है खास कर उसके प्रोड्यूसर के लिये।
इस ड्रामे की पूरी दुनिया मे मक़्बूलियत से यह बात भी साबित होती है कि इस मिल्लत में  ईमान की शमा अभी तक रोशन है चाहे मद्धम ज़रूर पड़ गई हो। यह भी साबित होता है कि अगर मिल्लत को अच्छे ऑप्शन दिये जायें तो बुराई से रुकना आसान हो जाता है ।
इस ड्रामे से इस्लाम के बुनियादी उसूल तौहीद, रिसालत, आखिरत, अद्ल वगैरह ज़ाहिर होते हैं जिसे दुनिया उस वक़्त देख रही है जब इस्लाम को दहशतगर्दी के नाम पर बदनाम करने की एक लम्बे अर्से से नापाक कोशिश जारी है ।
हमारी लाख कोशिशों के बावजूद हम इस झूठे इल्जाम से दामन नहीं छुटा पा रहे हैं । ऐसे मे इस ड्रामे से दुनिया भर मे बहुत मसबत नताइज सामने आ रहे हैं जैसा कि सोशल मीडिया पर रिव्यूज़ देखने और पढ़ने मे आ रहे हैं । न्यूयार्क टाइम्स ने इसे "सॉफ़्ट बम" बताने मे हिचकिचाहट महसूस नहीं की हो।
इसके ज़रिये मुसलमान अपने ताबनाक माजी से अगर वाक़िफ़ हो रहे हैं तो इसलिए इस तरह के ड्रामे ज़्यादा से ज़्यादा बनना चाहिए ताकि आम इंसानों को बुराई के रास्ते पर ले जाने की साज़िश नाकाम हो सके।
हर ज़माने मे अपनी बात पहुँचाने के ज़राय अलग-अलग होते हैं । अदब, ड्रामे, फिल्म, थिएटर वगैरह आज के ज़राय हैं । हम बायकाट करके कामयाबी हासिल नही कर सकते अलबत्ता उन ज़राय का जायज़ इस्तेमाल करके अवाम को मस्बत मुताबादिल पेश करना लाज़िम है ।
आखिर में यह बात ज़रूर अर्ज़ करूंगा कि जो ड्रामे नही देखते वह चाहें तो इसे न देखे और अपने तक़्वे पर हर्फ न आने दें अलबत्ता जो ड्रामे देखते हैं उन्हें ज़रूर एर्तग्रल ड्रामा देखकर यह जानना चाहिये कि ड्रामे कैसे होने चाहिये और आज तक ड्रामे के नाम पर क्या देखते आ रहे है ?
इस ड्रामे की कामयाबी पाक और बामक़सद अदब और ड्रामे बनाने की राह ज़रूर खोलेगी और दुनिया बातिल के नापाक मंसूबों को नाकाम होते हुए ज़रूर देखेगी इन्शाअल्लाह ।
📝 मुहम्मद इमरान

अमिश देवगन के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाएगी जमीयत उलेमा-ए-हिंद


मौलाना अरशद मदनी- ‘अमिश देवगन के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाएगी जमीयत उलेमा-ए-हिंद’
 जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा कि मोईनुल हिन्द हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी की शान में एक टीवी चैनल के एंकर ने जिस तरह से अपशब्द कहे और उनको अक्रांता और लुटेरा तक कह डाला है उस से भारत ही नहीं पूरी दुनिया में सभी धर्मों के लोग जो ख्वाजा साहब में अपनी आस्था रखते हैं उनके दिल को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि हजरत ख्वाजा अजमेरी सिर्फ मुसलमान ही नहीं बल्कि दुनिया में पाए जाने वाले सभी जात धर्म और समुदायों के एक बड़े हिस्से को प्रिय हैं।

Sunday, June 14, 2020

आत्महत्या और इस्लाम


आत्महत्या करना एक महापाप है।

मार्गदर्शन:

    ★ज्यादा तर आत्महत्या करने वाले लोग किसी चीज से निराश हो कर आत्महत्या करने का कदम उठाते हैं। टेन्शन के कारण आत्महत्या करते हैं। अल्लाह तआला ने कठिन स्थिति और नाजुक हालात में सब्र से काम लेने का आदेश दिया है और अल्लाह की नेमतों से निराश न होने पर उभारा है। इस्लाम में आत्महत्या करना भी बहुत बड़ा पाप है। क्योंकि यह जीवन अल्लाह की ओर से दी गई है, जिसे अल्लाह के आदेश से अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चल कर गुज़ारना है। अल्लाह का फरमान है।

وَلَا تَقْتُلُوا أَنفُسَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّـهَ كَانَ بِكُمْ رَ‌حِيمًا -وَمَن يَفْعَلْ ذَٰلِكَ عُدْوَانًا وَظُلْمًا فَسَوْفَ نُصْلِيهِ نَارً‌ا ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّـهِ يَسِيرً‌ا – إِن تَجْتَنِبُوا كَبَائِرَ‌ مَا تُنْهَوْنَ عَنْهُ نُكَفِّرْ‌ عَنكُمْ سَيِّئَاتِكُمْ وَنُدْخِلْكُم مُّدْخَلًا كَرِ‌يمًا. (سورة النساء: 31)

और न ही आत्महत्या करो। निस्संदेह अल्लाह तुम पर बहुत दयावान है – और जो कोई ज़ुल्म और ज़्यादती से ऐसा करेगा, तो उसे हम जल्द ही जहन्नम में झोंक देंगे, और यह अल्लाह के लिए सरल है-यदितुम उन बड़े गुनाहों से बचते रहो, जिन से तुम्हें रोका जा रहा है, तो हमतुम्हारी बुराइयों को तुम से दूर कर देंगे और तुम्हें प्रतिष्टित स्थान मेंप्रवेश कराएँगे। (सूरह अन्निसाः 29,30,31)

जिस व्यक्ति ने आत्महत्या किया, तो वह हमेशा हमेश के लिए जन्नहम में दाखिल होगा। जहन्नम में अपने आप को उसी वस्तु से कष्ट देता रहेगा, जिस वस्तु से दुनिया में आत्महत्या किया था। सिवाए कि अल्लाह उसे क्षमा कर दे।

مَن قتل نفسه بشيء في الدنيا عذب به يوم القيامة. (صحيح البخاري: 5700) و(صحيحمسلم: 110

रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का कथन हैः जिसने दुनिया में किसी वस्तु से आत्महत्या किया तो उसी से क़ियामत के दिन उसे यातना दिया जाएगा। (सही बुखारीः 5700 व सही मुस्लिमः110)

इस अज़ाब के प्रति कुछ विस्तार से दुसरी हदीस में इस प्रकार विवरण हुआ है। रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ) के इस कथन पर विचार करें।

عن أبي هريرة رضي الله عنه عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: مَن تردى من جبل فقتل نفسه فهو في نار جهنم يتردى فيه خالداً مخلداً فيها أبداً، ومَن تحسَّى سمّاً فقتل نفسه فسمُّه في يده يتحساه في نار جهنم خالداً مخلداً فيها أبداً، ومَن قتل نفسه بحديدة فحديدته في يده يجأ بها في بطنه في نار جهنم خالداً مخلداً فيها أبداً.  (صحيح البخاري: 5442) و(صحيح مسلم: 109

अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णन है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः जिस ने पहाड़ से गिर कर आत्महत्या किया, तो वह जहन्नम में दाखिल होगा और उस में हमेशा हमेश अपने आप को पहाड़ से गिरा कर सज़ा देता रहेगा और जिसने जहर खा कर आत्महत्या किया तो जहन्नम में दाखिल होगा और जहर उस के हाथ में होगा जिस से वह हमेशा स्वयं सज़ा देता रहेगा। और जिस ने धारदार छुरी से आत्महत्या किया। तो जहन्नम में धारदार छुरी उस के हाथ में होगा और हमेशा हमेश वह अपने आप को उस से सज़ा देता रहेगा।  (सही बुखारीः 5442 व मुस्लिमः 109)

आत्महत्या करने वाला व्यक्ति अल्लाह पर विश्वास नहीं करता और अल्लाह की दी हुइ जीवन को बिना उसके अनुमति के खत्म करता है तो अल्लाह तआला उस पर जन्नत हराम कर देता जैसा कि रसूल(सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम)ने पूर्व लोगों में से एक व्यक्ति का किस्सा इस प्रकार बयान फरमाया हैः

وعن جندب بن عبد الله رضي الله عنه قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: كان فيمن كان قبلكم رجل به جرح فجزع فأخذ سكيناً فحز بها يده فما رقأ الدم حتى مات. قال الله تعالى: بادرني عبدي بنفسه حرمت عليه الجنة.   ( البخاري: 3276 ) و(صحيح مسلم: 113

जुन्दुब बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णन है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः तुम से पूर्व समाज में एक व्यक्ति था जब वह ज़ख्मी हो गया जिस से उसे बहुत पीड़ा का अनुभव हुआ और पीड़ा के कारण उसने एक चाकू लिया और अपने हाथ को काट लिया जिस कारण रक्त बहता रहा, यहाँ तक उसकी मृत्यु हो गई। तो अल्लाह ने फरमायाः मेरे इस दास ने अपने आप के साथ जल्दबाज़ी की तो मैंने इस पर जन्नत को वर्जित कर दिया है।  (सही बुखारीः 3276 व सही मुस्लिमः 113)

जो लोग भी आत्महत्या करते हैं। तो वास्तव में ऐसे लोग बुज्दिल हैं। जो समस्याओं के समाधान से डर कर भागते हैं और अपने परिवार वालों के जिवन में दड़ाड़ उत्पन्न करते हैं और अपने सृष्टिकर्ता के आदेश की अवज्ञा करते हैं। अल्लाह तआला पर विश्वास और भरोसा नहीं करते हैं। जिस कारण अल्लाह तआला ऐसे लोगों से सख्त नाराज होता है और उन्हें कठोर यातनाओं में ग्रस्त करेगा। जैसा कि उपर कुछ दलीलें बयान किया गया है।

Monday, June 8, 2020

आईपीएस अब्दुल रहेमान एक बेहद शानदार किताब लिखी है —Denial and Deprivation. जरूर पढ़िए


ये हैं आईपीएस अब्दुर रहमान जी, वही अब्दुर रहमान जिन्होंने ‘नागरिकता संशोधन क़ानून’ के ख़िलाफ़ एक झटके में महाराष्ट्र पुलिस में अपने आईजी के पद से इस्तीफ़ा दे दिया और फिर आम लोगों की तरह सड़कों की खाक छानते हुए पूरे भारत में लोगों को जागरूक करते रहे. लॉकडाउन के दौरान जब मां बिस्तर पर थीं तब इन्हें अपनी क़ौम की फ़िक्र थी. कोई भी उन्हें कॉल करता या सोशल मीडिया पर उन्हें कोई सूचना देता तो तुरंत उसकी समस्या को हल करने में लग जाते.मुझे याद है कि जिस दिन इनकी अम्मी की इंतक़ाल हुआ था, उस दिन जनाज़े के तुरंत बाद भी वो अपने गांव के लोगों से मिलकर उनका दर्द जानने में लगे रहे… अब मुंबई में हैं, लेकिन दिन-रात में अपने हिसाब से लोगों की सेवा में लगे हुए हैं.और हां, भाई ने एक बेहद शानदार किताब लिखी है —Denial and Deprivation. सच पूछे तो ये किताब सच्चर कमिटी रिपोर्ट व रंगनाथ मिश्रा कमीशन की रिपोर्ट के बाद देश में मुसलमानों की हालत का एक जीता-जागता अहम दस्तावेज़ है.जिन लोगों को भी देश में मुसलमानों की हालत समझनी है उन्हें ये किताब हर हाल में ज़रूर पढ़नी चाहिए. लेकिन प्लीज़, मुफ़्त में मांगने की कोशिश न करें. किताब अमेज़न पर उपलब्ध है. बस गुगल पर सर्च करें, अमेज़न का लिंक आपके सामने होगा…

Wednesday, March 18, 2020

भारत के नागरिकों से अपील NPR का बहिष्कार #Boycott NPR


नागरिकता संशोधन क़ानून 2019 (सीएए), संयुक्त नेशनल पोपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ इंडियन सिटिज़न (एनआरआइसी) के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा नयी नागरिकता व्यवस्था लाने के प्रयास का हम, निम्न संगठनों और आन्दोलनों की समन्वय और गठबंधन समिति विरोध कर रहे हैं, क्योंकि हमारा इस बात पर विश्वास है कि ये क़ानून भारत के संविधान की आत्मा के ख़िलाफ, समाज को बांटने वाला और पक्षपात पर आधारित है और हमारे स्वतंत्रता संघर्ष एवं सभ्यता के मूल्यों के विरुद्ध है।


इस दृष्टि से गठबंधन और समन्वय समिति एनपीआर को पहले ही खारिज कर चुकी है और बहिष्कार का एलान भी कर दी है, क्योंकि एनपीआर एनआरसी लाने का पहला क्रम है और नयी नागरिकता व्यवस्था लाने की तरफ पहला क़दम। इसके अतिरिक्त हमने जनगणना के साथ एनपीआर को जोड़ने का भी विरोध किया है क्योंकि एनपीआर और जनगणना एक साथ करने के नतीजे में जनगणना की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी। इससे नागरिकों की जानकारी, नीजता, गोपनीयता और महत्वपूर्ण डेटा को खतरा है। बहुत से राज्यों ने अपने विधानसभाओं में एनपीआर के वर्तमान स्वरूप को लागू करने के विरोध में प्रस्ताव पारित किया है।
उपरोक्त के प्रकाश में, हमने 12 मार्च 2020 को राज्यसभा में माननीय गृहमंत्री अमित शाह के वक्तव्यों पर विचार किया जिसमें उनहोंने एनपीआर के संदर्भ में राष्ट्र को स्पष्ट रूप से आश्वाशन दिया है कि यदि किसी व्यक्ति के पास कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है या जो जानकारी उपलब्ध कराना चाहे तो वह (स्त्री/पुरुष) उन्हें पेश कर सकता है, जानकारी में कमी की स्थिति में किसी भी नागरिक को ‘‘संदिग्ध’’ के तौर पर वर्गीकृत करने के लिए एनपीआर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। हम माननीय गृहमंत्री की भावना का स्वागत करते हैं और अब हम इसकी क़ानूनी हैसियत और विधिसंगत बनाने के इच्छुक हैं वह इस तरह कि केंद्र सरकार नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियम, 2003 में संशोधन लाकर एनपीआर को इस क़ानून से हटाए। सरकार 2003 के नियमों और क़ानून के दफाओं 3 (5), 4 (3), 4 (4) को ख़त्म करे जो नागरिकों को बतौर संदिग्ध पहचान करने और एनआरआईसी से उनके विलोपन के लिए उपयोग करने की अनुमति देता है। सरकार नियम 7 (2) और 17 में भी उचित संशोधन करे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एनपीआर में जानकारी प्रदान करना स्वैचिछक होगा और जानकारी उपलब्ध न कराने की स्थिति में दंडित नहीं किये जाएंगे। हमारा विश्वास है कि यह संशोधन सदन के पटल पर मान्नीय प्रधानमंत्री के बयान को प्रभावकारी बनाएगा और एनपीआर को लेकर व्यापक आशंकाओं को दूर करेगा।
केंद्र सरकार संशोधन लाने में जितना जल्दी करेगी, हम एनपीआर के बहिष्कार के आह्वान को वापस लेने के लिए तत्पर होंगे। जहां तक सीएए, एनआरसी और पक्षपातपूर्ण नागरिकता व्यवस्था के ख़िलाफ यह आन्दोलन शान्तिपूर्ण, अहिंसात्मक और लोतांत्रिक स्वरूप में जारी रहेगा।

> श्री रवि नायर (संयोजक, अलायन्स अगेंस्ट सीएए-एनआरसी-एनपीआर)
> श्री यशवंत सिन्हा (भारत के पूर्व वित्त मंत्री)
> मौलाना तौक़ीर रज़ा (नेता, अध्यक्ष इत्तेहाद-ए-मिलत परिषद)
> श्री योगेंद्र यादव (स्वराज अभियान)
> मौलाना महमूद मदनी (नेता और सेक्यजामियत उलेमा-ए-हिंद)
> श्री हर्ष मंदर (अमन बिरादरी)
> श्री  इंजीनियर सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी (अमीर जमाअत इस्लामी हिंद)
> श्री संदीप पांडे (लखनऊ)
> मौलाना असग़र इमाम सलफ़ी (अमीर मरकज़ी जमीअत अहले हदीस)
> श्री। निखिल डे (जयपुर)
> मौलाना वलीरहमानी एसबी (अमीर इमारत शरिया बिहार / ओडिसा)
> प्रो रतन लाल (प्रोफेसर डीयू)
> डॉ ज़फरुल इस्लाम खान (अध्यक्ष दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग)
> श्री। प्रशांत टंडन (पत्रकार टीओआई)
> मौलाना पीर तनवीर हाशमी (सज्जादा खानकाह हाशमिया बीजापुर)
> प्रो अपूर्वानंद (प्रोफेसर डीयू)
> डॉ मंज़ूर आलम (जनरल सेक्रेटरी मिल्ली काउंसिल)
> श्री अंबरीश राय (एक्टिविस्ट, आरटीई)
> डॉ संदीप पांडे (रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित)
> श्री नावेद हामिद (राष्ट्रीय अध्यक्ष AIMMM)
> जस्टिस कोलसे पाटिल (सेवानिवृत जज Bombay HC)
> मौलाना मोहसिन तकवी साहब (इमाम शिया जामा मस्जिद, नई दिल्ली)
> जस्टिस चंद्रा कुमार (सेवानिवृत जज आँध्रप्रदेश HC)
> डॉ मुफ्ती मुकर्रम साहब (शाही इमाम मस्जिद फतेहपुरी)
> डॉ नरेंद्र नागरवाल (प्रोफेसर डीयू)
> मौलाना सज्जाद नोमानी (सज्जादा खानकाहे नोमानिया)
 > श्री राघवन श्रीनिवासन (लोकराज संगठन)
> मौलाना शब्बीर अहमद नदवी (बैंगलोर)
> श्री अशोक वर्मा (रांची)
> श्री कमाल फारूकी (पूर्व अध्यक्ष दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग)
> Adv. अवीक साहा (कोलकाता)
> मौलाना नियाज़ फ़ारूकी (Sec JUH)
> श्री लबीद शफ़ी (अध्यक्ष एसआईओ)
> डॉ ज़फर महमूद (संयोजक वतन की फ़िक्र)
> प्रोफ़ेसर इंजीनियर सलीम (GS FDCA)
> हाफ़िज़ सैयद अतहर अली (नाज़िम मदरसा मोहम्मदिया मुंबई)
> श्री उमर खालिद (युवा नेता)
> श्री। नदीम खान (UAH)
> Adv. ज़फ़रयाब जिलानी (लखनऊ)
> श्री एम एम खान (GS .APCR)
> श्रीमती फराह नकवी (कार्यकर्ता और पूर्व सदस्य NIC)
> मौलाना सैफ अब्बास रिज़वी (शिया धर्मगुरु और नेता)
> श्रीमती रहमतुन्निसा (सेक्रेटरी जेआईएच)

मुजतबा फारूक
(सह-संयोजक, अलायन्स अगेंस्ट सीएए-एनआरसी-एनपीआर)

Sunday, February 16, 2020

देश में चल रहे सीएए , एनआरसी और एनपीआर के विरोध में इंकिलाब 80 साल की वृद्धाओं , मां, बेटियों ने आरंभ किया, वह सराहनीय है। डॉ सैयद कासिम रसूल इलियास


जाफर नगर में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के संबंध में आयोजित हुई संवैधानिक जन जागरण हेतु विशाल जनसभा

देश में चल रहे सीएए , एनआरसी और एनपीआर के विरोध में इंकिलाब 80 साल की वृद्धाओं , मां, बेटियों ने आरंभ किया, वह सराहनीय है । फासीवादी ताकतें इन काले कानूनों के नाते फासीवादी व्यवस्था लाना चाहते हैं। ये लोग बहुत बहुत झूठे हैं । 15 लाख खाते में आ जाना उनकी धोखेबाजी है ।  पुलवामा में 42 जवानों की शहादत की जिम्मेदार यही केंद्र सरकार है । आज जीएसटी से व्यवसाय अत्यधिक खराब हो गए हैं। हमारी कोशिशों को ताकत से रोकने की कोशिश की जा रही है । यह अभिव्यक्ति ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला के प्रवक्ता और जमाअत ए इस्लामी हिंद की मजलिस ए शूरा के सदस्य डॉ सैयद कासिम रसूल इलियास ने अध्यक्षता करते हुए व्यक्त की । यह कार्यक्रम सी ए ए , एनआरसी और एनपीआर के विरोध में 61 सामाजिक संगठनों का फेडरेशन आफ ऑर्गेनाइजेशंस फॉर सोशल जस्टिस सेकुलरिज्म एंड डेमोक्रेसी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की गई थी । उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार विश्व को गुरु का दर्जा दिलाने चली थी और अब हाल यह है कि देश के एक तिहाई लोग कुपोषण के शिकार हो गए हैं । हमारी जागृति सी ए ए, एनआरसी और एनपीआर के साथ में तक ही नहीं बल्कि देश के सपनों को पूरा करने तक रहनी चाहिए ।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के जगजीत सिंह ने देश के क्रांतिकारियों को नमन कर उनके विचारों को याद दिलाया । मनुवादी विचार धारा को हम 100 वीं वर्षगांठ के दिन काला दिन दिखाएंगे । हमें इनसे देश छुड़ाना है । देश की स्वाधीनता में इनका कोई योगदान नहीं है । सीएए, एनआरसी, एनपीआर में हम इन्हें कोई जानकारी नहीं देंगे ।
गुरुदेव सेवा मंडल के ज्ञानेश्वर रक्षक ने कहा कि अब हम स्वतंत्रता के फर्ज को निभाने के लिए एक हो रहे हैं । उन्होंने संत तुकड़ोजी महाराज के संबंध से विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश डाला ।
सलीम शेख़ वेलफेयर पार्टी महाराष्ट्र अध्यक्ष ने आसाम एकार्ड पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इन काले कानूनों के माध्यम से हमारे बीच भेदभाव पैदा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जामिया के हमलावरों को आज तक गिरफ्तार नहीं किया गया । मीडिया विरोध प्रदर्शन की बात नहीं करता बल्कि वह एक पक्षीय बात रखता है । हमें मीडिया को त्यागना चाहिए ।
भूतपूर्व आईपीएस अब्दुल रहमान ने कहा कि सी एए ,एन आर सी शासन की जुमला बंदी नहीं हकीकत बन गई है । आज हम जिस उग्रता के साथ इन काले कानूनों का विरोध कर रहे हैं वह पहलू ख़ान , असलम खान आदि की मृत्यु के समय , पूना के दलितों को मौत के घाट उतारा गया था उस समय हमें यह उग्रता दिखाना चाहिए थी । हमने अपने अधिकारों को भुला दिया है । उन्होंने कहा कि इस सरकार के बनाए गए अधिकतर कानून अदालतों में चैलेंज बने हुए हैं । सरकार संविधान  को छोड़कर कानून बना रही है । वह 15 प्रतिशत उच्च कोटि और पूंजीपति लोगों से प्यार करती है , 80 प्रतिशत से नफ़रत ।
सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरुद्ध एलाइंस के राज्य संयोजक जस्टिस कोलसे पाटील ने कहा कि जिस फासीवादी व्यवस्था ने अपना घर बार छोड़कर आप महिलाओं को यहां आने पर मजबूर किया है हम उनका धन्यवाद करते हैं आज ईवीएम से चुने हुए लोग शासन चला रहे हैं , हम ईवीएम पर भरोसा नहीं कर सकते । उन्होंने न्यायधीश के हवाले से कहा कि खून के अपराध पर उन्हेंअपराधी बनाया जाना चाहिए और उन्हें कोई पद नहीं दिया जाना चाहिए। हिंदुत्ववादी मनुवादी हैं, हमें हिंदु कह कर वे हमें को कुचलना चाहते हैं , उन्हें हमारा संविधान जहरीला दिखाई देता है, वह हमसे मतदान का अधिकार चुनना चाहते हैं, सीएए जैसे काले कानूनों पर हम अभी संवाद करना चाहते हैं, ये कानून गुलाम बनाने की साज़िश हैं । हमें फातिमा , सावित्रीबाई फुले और बाबासाहेब अंबेडकर की शिक्षाओं का स्मरण करना चाहिए।

शाकिरूल अकरम फ़लाही ने पवित्र कुरआन की सुरह कसस की पंक्ति नं से 1- 6 के पठन से आरंभ हुआ। कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ अनवार सिद्दीकी ने रखी ।

डॉ कृष्ण कांबले ने आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम का संचालन डॉ नुरुल अमीन ने किया ।
  मंच पर प्रशांत बंसोड़, हाफ़िज़ अब्दुल बासित, प्रोफेसर मोहम्मद अय्यूब खान, डॉ आसिफुज्जमां ख़ान, नितिन सरदार, मराठा सेवा संघ के जिलाध्यक्ष दिलिप खोडगे , त्रिलोक हजारे, शोएब आसिम, जमियत उलेमा-ए-हिंद के हाफ़िज़ मसऊद आदि मान्यवर गण उपस्थित थे ।

Thursday, February 13, 2020

सद फीसद कामयाबी ग़ज़ब तो दिल्ली के मुस्लमानों ने कर दिया। डाक्टर सलीम खान


सद फीसद कामयाबी
ग़ज़ब तो दिल्ली के मुस्लमानों ने कर दिया
डाक्टर सलीम खान
दिल्ली के वजीरे आला अरविंद केजरीवाल ने एक हफ्ता पहले अयोध्या में राम मंदिर की तामीर के लिए पार्लीमान में वजीरे आजम नरेंद्र मोदी के जरिया ट्रस्ट बनाने के ऐलान का खैर-मक़्दम करते हुए उन्हें मुबारकबाद दी थी और कहा था कि अच्छे फैसलों का कोई समय नहीं होता है। इस के ठीक एक हफ्ता बाद वजीरे आजम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली असैंबली में आम आदमी पार्टी की जबरदस्त जीत पर वजीरे आला अरविंद केजरीवाल को मुबारकबाद दीते हुए कहा कि ‘‘आप पार्टी और मिस्टर अरविंद केजरीवाल को दिल्ली असैंबली इंतिख़ाबात में जीत की मुबारकबाद। दिल्ली के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए उन्हें बहुत बहुत नेक खाहिशात’’।
दोनों का हिसाब बराबर हो गया लेकिन इसी के साथ मुबारकबाद का एक सिलसिला चल पड़ा। राहुल गांधी, ममता बनर्जी, वाई एस जगन मोहन रेड्डी, एन चंद्रबाबू नायडू, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरैन, सीताराम यचूरी, अतुल अंजान, तेजस्वी यादव, एम के स्टालिन और पनारई विजयन ने भी केजरीवाल को मुबादक दी और उन्होंने सब का शुक्रिया अदा किया।
इस तवील लिस्ट में वजीरे आजम के अलावा वजीरे दिफाअ राजनाथ सिंह, बीजेपी के नए नवेले सद्र जगत प्रकाश नड्डा और बीजेपी दिल्ली के सद्र मनोज तिवारी तक का नाम शामिल था लेकिन दो महा पागल अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के नाम गायब थे। ऐसा इसलिए हुआ कि दिल्ली के इंतिख़ाबी मुहिम में सबसे ज़्यादा कहर बरसाने वाली राहू केतू की जोड़ी अब बावली हो गई है। वाराणसी में नामा निगार योगी का रद्दे अमल जानने के लिए उन के पीछे भागते रहे लेकिन वो मुँह छुपा कर भाग गए। मनोज तिवारी की तरह जय श्री राम का नारा तक नहीं लगा सके । हंटर चलाकर सारे अरकान पार्लीमान को ऐवान में हाजिर रहने की तलकीन करनेवाले वजीरे दाखि़ला भी ना जाने किस अक़ूबत खाना में रुपोश हो गए। अख़बार और टेलीविजन वाले उनका सुराग लगाते रहे मगर वो गधे के सर से सींग की तरह गायब हो गए थे। बीजेपी ने ऐवाने बाला के वक़्फा तआम को मंसूख करके ऐसी तशवीश फैलाई कि शाह जेके तरकश का आखिरी तीर यकसां सिवल कोड की क़ियास आराई होने लगी लेकिन बाक़ौल गालिब ‘‘देखने हम भी गए थे  पे तमाशा ना हुआ।’’
योगी और शाह की नींद मुस्लमानों ने उड़ा रखी है। अआप ने इस बार 5 मुस्लमानों को टिकट दिया और पांचों भारी अक्सरीयत से कामयाब हो गए। उनको हराने के लिए शाह और योगी ने जो नफरत की आग लगाई इस में केजरीवाल तक झुलस गए और राम मंदिर ट्रस्ट का अभीनंदन करने के बाद हनूमान चालीसा का पाठ करने लगे लेकिन मुस्लमान टस से मस नहीं हुए । उन्हें पता था कि इस बार हाथ कमल को उखाड़ नहीं सकता लेकिन इसलिए जाफरानी झाड़ू से उसे साफ कर दिया । मुस्लमानों की सियासी दानिशमंदी ने संघ परिवार को हैरान कर दिया होगा। हिंदू समाज को मुत्तहिद करके किसी की मुखालफत कराने के लिए उसे ना जाने क्या क्या जतन करने पड़ते हैं । झूठ से काम नहीं चलता तो फसाद करवाने की नौबत आ जाती है लेकिन मुसलमान अपनी अक्ले आम से ना सिर्फ अव्वलीन दुश्मन को पहचान लेता है बल्कि उसको जेर करने वाले का भी पता लगा लेता है। इसके बाद दिल्ली जैसा चमत्कार होता है ।
ये हुस्ने इत्तिफाक़ है शाह जी ने 11 दिसंबर को कौमी शहरियत के कानून में तरमीम की तजवीज  पार्लीमान में पेश की। इस के ठीक दो माह बाद उनको उस की भारी कीमत चुकानी पड़ी। 11 फरवरी को इंतिख़ाबी रुझानों के बाद पहला नतीजा सीलम पूर से आया। इस में अआप के उम्मीदवार अबदुर्रहमान ने बीजेपी के कौशल कुमार मिश्रा को 36 हजार से ज्यादा वोटों से हराने की खुशखबरी थी। इस तरह इब्तिदा ही एक मुस्लमान की फतह से हुई। यहां पर कांग्रेस के उम्मीदवार मतीन अहमद को भी बीस हजार वोट मिले लेकिन इस से कोई खास फर्क नहीं पड़ा। शुऐब इक़बाल ने मटिया महल से 67 हजार वोट हासिल करके बी जे पी के रवींद्र गुप्ता को हराया। उन को सिर्फ 17 हजार और कांग्रेस के मिर्जा अली जावेद को तीन हजार वोट मिले थे। बल्लीमारान में अआप के ऐम एलए इमरान हुसैन ने 64 फीसद यानी 66 हजार वोट हासिल किए जबकि बीजेपी की लता को सिर्फ 29 हजार वोट मिले । कांग्रेस के हारून यूसुफ को 4 हजार पर इकतिफा करना पड़ा।
मुस्तफाबाद वो हलके इंतिखाब है जहां से 2015 में बीजेपी के तीन में से एक उम्मीदवार कामयाब हो गया था। अमित शाह ने यहीं जाकर वोटिंग मशीन के जरिया शाहीन बाग तक करंट पहुंचाने की कोशिश की थी लेकिन अआप के हाजी यूनुस ने बीजेपी के जगदीश प्रधान को हरा दिया लेकिन ये कहानी ख़ासी दिलचस्प है। वोटों की गिनती के कुल 26 राउंड होते हैं 11 वीं राउंड के बाद बीजेपी के जगदीश प्रधान ने बत्तीस हजार वोट आगे चल रहे थे और जाफरानी खेमा में जश्न शुरू हो चुका था । 15वीं राउंड के बाद ही हाजी यूनुस ने जगदीश प्रधान से ज्यादा वोट हासिल करने शुरू किए। 21 वीं राउंड के बाद हाजी यूनुस को पाँच हजार वोटों की बढ़त मिल गई और 26वीं राउंड में गिनती ख़त्म होने के बाद वो 20 हजार 800 वोट के फर्क से बीजेपी के रुकन असैंबली को शिकस्ते फाश दे देते हैं । ये था वो बटन जिसे दबाने की अमित शाह ने तलकीन की थी जोर का झटका धीमे लगा ।
मुस्तफाबाद तो खासा दूर है लेकिन शाहीन बाग के हलके इंतिखाब ओखला (जहां योगी ने आकर मुँह जोरी की थी से जब सुब्ह-सवेरे ये रुझान आया कि अआप के उम्मीदवार अमानतुल्लाह खान बीजेपी से पीछे चल रहे हैं तो वाक़ई बिजली का झटका लगा लेकिन शाम तक मतला साफ गया।
ओखला से मजमूई तौर पर 67 फीसद वोट हासिल करने वाले अमानतुल्लाह ने बीजेपी के ब्रहम सिंह को 70 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दे दी। कांग्रेस के परवेज हाशमी को सिर्फ 5 हजार वोट मिले। इसी हलके इंतिखाब से एसडी पी आई के निहायत काबिल और मुख़लिस उम्मीदवार डाक्टर तस्लीम रहमानी को सिर्फ 141 वोट मिले जबकि एक लाख अट्ठाईस हजार राय दहिंदगान ने अमानतुल्लाह की ताईद की । ऐसा इसलिए हुआ कि मुस्लमानों ने बीजेपी को धूल चटाने का इरादा कर लिया था।
 महा-भारत में स्वंवर के बाद अर्जुन से पूछा गया कि तुमने तेल कढ़ाई में देखकर ऊपर घूमने वाली मछली की आँख का निशाना कैसे साध लिया तो उसका जवाब था मुझे तो उस समय सिर्फ मछली की आँख दिखाई दे रही थी सो मैंने उस में तीर चला दिया। अमित शाह और योगी महाराज को इन नताइज के बाद महा-भारत का ये वाकिया जरूर याद आया होगा क्योंकि मुस्लमानों को भी इस बार सिर्फ कमल नजर आरहा था । अरविंद केजरीवाल के जुमला ‘‘आपने तो गजब कर दिया’’ इस के असली मुस्तहिक तो सद फीसद कामयाब होने वाले मुस्लमान उम्मीदवार और उन्हें कामयाब करने वाली मुस्लिम जनता है इसलिए कि ये एजाज ना तो अआप को मिला और ना बीजेपी को हासिल हुआ।

Tuesday, January 28, 2020

'देश वासियों की सेवा में जमात-ए-इस्लामी हमेशा सक्रीय रहती है - सैयद ज़मीर कादरी



 कोल्हापुर: जमात-ए-इस्लामी हिंद महाराष्ट्र और आइडियल रिलीफ कमिटी ट्रस्ट ने 26 जनवरी, 2020 को कोल्हापुर जिले में बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए घरों के निर्माण की आधारशिला रखी।  परियोजना के लिए आइडियल रिलीफ कमिटी ट्रस्ट और जिला परिषद कोल्हापुर के बीच 20 जनवरी 2020 को एक समझौता करार पर हस्ताक्षर किए गए थे।  जिसके अनुसार संगठन द्वारा घरों के निर्माण के लिए कोल्हापुर जिले के कांवड़ गांव का चयन किया गया था।
 इसे हेतु शिलान्यास के लिए एक कार्यक्रम आयोजन किया गया था और गांव के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए घरों का निर्माण कार्य
अनिल भीमवशाह पूरे के घर की आधारशिला से शुरू हुआ ।  सैय्यद ज़मीर क़ादरी, जमात-ए-इस्लामी हिंद महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष, पुलिस अधिक्षक किशोर काले तथा शंकर कुवितके बीडीओ, सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकांत यादव और गनी अजरीकर मुस्लिम बोर्डिंग कोल्हापुर,  इंजीनियर आसिफ जमदार और बाबासाहेब आरसगोंडा  सरपंच कंवाड़ उपस्थित थे।

 प्रारंभिक चरण में, 38 बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए घरों का निर्माण किया जाएगा और शुद्ध पीने के पानी के लिए 2 शोधक सिस्टम लगाए जाएंगे।
 कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र कुरान के पाठ के साथ हुई।  इसके बाद मजहर फारूक , सचिव जनसेवा विभाग, जमात-ए-इस्लामी महाराष्ट्र ने बाढ़ और घरों के निर्माण के संबंध में जमात द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा प्रस्तुत की । उन्होंने कहा कि बाढ़ के बाद हम लोग नाव से महिशाल तक पहुंचे और हमने धर्म, जाति और सभी प्रकार के भेदभाव को मिटाकर लोगों की मदद की । हम इसे एक आदर्श और अद्वितीय गाँव बनाना चाहते हैं, ऐसे गांव की परिकल्पना मात्र सफाई सुथराई , अच्छे रास्ते , स्वच्छता, अच्छी सड़कें, विशाल घर और अन्य सुविधाएँ प्रदान करके संभव नहीं । बल्कि यहाँ रहने वाले हर वर्ग और समाज के लोगों  को चाहिए कि वे एक दूसरे की मदद के लिए आगे बढ़ते रहें,  दूसरे के दर्द को अपना दर्द समझते हैं, और एकजुटता का उदाहरण देते हैं, हम सभी एक समृद्ध भारत के लिए मिलकर काम करेंगे।

 सामुदायिक स्वयंसेवकों की भावुक सेवा से प्रेरित होकर,
कांवड़ के सरपंच आरसगोंडा ने कहा कि हमारे भीतर मानवता और सेवा का जुनून होना चाहिए। कुछ समय से जमात-ए-इस्लामी संगठन जाति और धर्म की परवाह किए बिना सेवा में लगा हुआ है, जब भी हम उन्हें आवाज देते हैं तो वे हमारी मदद के लिए वहां मौजूद होता है।  वै हमारी मदद को महत्व देते हैं। 

 किशोर काले डीसीपी जय शसिंहपुर ने कहा कि कई सरकारी व गैर सरकारी संगठनों ने 2 अगस्त की बाढ़ में पीड़ितों की मदद की लेकिन जमात-ए-इस्लामी का काम महत्वपूर्ण है।  जब भी जरूरत होगी प्रशासन  पूरा सहयोग करेगा।
 जमात-ए-इस्लामी महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष सैयद ज़मीर कादरी ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी संगठन ने हमेशा  देश वासीयों की सेवा में सक्रीय भूमिका निभाई है ।  पैगंबर हज़रत मोहम्मद (सअव) की शिक्षाएं हमें इस काम को करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।  इसलिए हम यह सेवा अल्लाह की खुशी के लिए कर रहे हैं और यह हमारी योजना का हिस्सा है।  उन्होंने यह भी सलाह दी कि वे पर्यावरण का ध्यान रखें ताकि यह स्थिति दोबारा न हो।
 कार्यक्रम का संचालन कोल्हापुर के नदीम सिद्दीकी ने किया । इस अवसर पर अनवर पठान, अशफाक पठान, इस्माइल शेख, अकील अली आजमद और अख्तर पटेल उपस्थित थे।

Thursday, January 23, 2020


कोल्हापुर - जमाअत-ए-इस्लामी, महाराष्ट्र और  जिला परिषद कोल्हापुर के मध्य 20 जनवरी 2020 एक समझौता हुआ ।

समझौते के अनुसार, कोल्हापुर जिले के कनवाड़ गांव को घरों  के निर्माण के लिए चुना गया है।  इसके पहले चरण में 38 बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए घर बनाए जाएंगे और पीने के पानी के लिए 2 शुद्ध पेयजल  व्यवस्था भी की जाएगी।

स्पष्ट हो कि कोल्हापुर जिले का शिरोल ताल्लुका कुछ महीनों पहले आई विनाशकारी बाढ़ में  सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

इसी ताल्लुका के कनवाड़ और अन्य गाँव कई दिनों तक  शत-प्रतिशत बाढ़ की चपेट में रहे हैं। इन गांवों में शुरुआत से ही जमाअत ए इस्लामी हिंद महाराष्ट्र की  आपदा प्रबंधन इकाई आई आर डब्ल्यू (IRW) के स्वयंसेवकों ने राहत कार्य और बचाव कार्य को अंजाम दिया है।

शासन की ओर से फ्लड रिलीफ़ फंड / आवास और घरकुल योजना के अंतर्गत 95000 से 120000 रुपए योजना के तहत पात्र होने के बाद मिलते हैं । यह राशि एक छोटे लेकिन मजबूत मकान के निर्माण के लिए अपर्याप्त है ।

इसीलिए जमाअत ए इस्लामी हिन्द महाराष्ट्र और आइडियल रिलीफ़ कमेटी ट्रस्ट ने इस गाँव का गहन सर्वेक्षण किया, नष्ट हुए घरों के लिए इंजीनियरों के माध्यम से निर्माण योजना तैयार की, जिसके अनुसार एक घर के आरसीसी निर्माण का न्यूनतम अनुमान 300000 (तीन लाख) रुपये है।

बाढ़ राहत कोष और आवास योजना से प्राप्त धन के अलावा संगठन प्रति घर 200000 (दो लाख) की वित्तीय सहायता के साथ घर बनाएगा।



यदि बारिश से पहले यह काम पूरा हो जाता है, तो दूसरे चरण में कोल्हापुर जिले के कुरूंदवाड, राजापुर, हेरवाड़ और सांगली जिले के भीलवाड़ी में घरों का निर्माण किया जाएगा।

इसके अलावा छात्र संगठन एसआईओ स्कूलों की बुनियादी आवश्यकताओं और पुस्तकालयों के लिए पुस्तकों के सेट प्रदान करेगा।

इस पुनर्वास परियोजना की लागत लगभग 2,48,00,000 रुपये (दो करोड़ अड़तालिस लाख) है।
 
समझौते के अवसर पर श्री अमन मित्तल साहिब IAS (सीईओ जिला परिषद, कोल्हापुर), मोहम्मद मज़हर फारूक (सचिव, जनसेवा विभाग, जमाअत ए इस्लामी हिंद महाराष्ट्र ), अजय कुमार माने (परियोजना निदेशक डीआरडीए), वैशाली महसके (जिला परियोजना अधिकारी), इस्माइल शेख (जमाअत ए इस्लामी हिंद कोल्हापुर) और अशफाक पठान (एसआईओ कोल्हापुर) उपस्थित थे।
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Wednesday, January 22, 2020

Jama'at-e-Islami Hind, Maharashtra and Ideal Relief Committee Trust to start construction of houses for flood victims of Kolhapur district from 26th January 2020.



Kolhapur - An agreement (MoU) was signed between Jama'at-e-Islami Hind, Maharashtra and Zilla Parishad Kolhapur on 20th January 2020.

As per the agreement, Kanwad village in Kolhapur district has been selected for construction of houses. In the first phase, houses will be constructed for 38 flood affected families and 2 purified water system will also be made for drinking water.


It may be noted that Shirol Taluka of Kolhapur district has been worst affected by the devastating floods that occurred a few months ago.

Kanwad and other villages of this taluka have been in the grip of 100% flood for several days. In these villages, volunteers from IRW (disaster management unit) of Jama'at-e-Islami Hind, Maharashtra have carried out rescue and relief work.

Flood Relief Fund / Awas Yojna  from the government gets 95,000/- to 1,20,000/- rupees under housing and household scheme after becoming eligible under the scheme. This amount is insufficient to build a small but strong house. That is why Jama'at-e-Islami Hind, Maharashtra and Ideal Relief Committee Trust conducted an in-depth survey of the village, prepared a construction plan through engineers for the destroyed houses, according to which the minimum estimate for the RCC construction of a house is Rs 300,000/- (three lakhs).

In addition to the funds received from the Flood Relief Fund and Housing Scheme, the organization will build houses with financial assistance of 200,000/- (two lakhs) per house.

If this work is completed before the rains,
in the second phase, houses will be constructed in Kurundwad, Rajapur, Herwad in Kolhapur district and Bhilwadi in Sangli district.

 In addition, the student organization SIO will provide a set of books for the basic needs of schools and libraries.

The cost of this rehabilitation project is about 2,48,00,000/- rupees (Two Crore Forty-Eight Lakh). 

On the occasion of the agreement, Mr. Aman Mittal IAS, (CEO Zilla Parishad, Kolhapur), Mohammad Mazher Farooque (Secretary, Department of Social Service, Jama’at-e-Islami Hind, Maharashtra), Ajay Kumar Mane (Project Director DRDA), Vaishali Mhaske (District Project Officer), Ismail Sheikh (Jama'at-e-Islami Hind, Kolhapur) and Ashfaque Pathan (SIO Kolhapur) were present.

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