Sunday, February 16, 2020

देश में चल रहे सीएए , एनआरसी और एनपीआर के विरोध में इंकिलाब 80 साल की वृद्धाओं , मां, बेटियों ने आरंभ किया, वह सराहनीय है। डॉ सैयद कासिम रसूल इलियास


जाफर नगर में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के संबंध में आयोजित हुई संवैधानिक जन जागरण हेतु विशाल जनसभा

देश में चल रहे सीएए , एनआरसी और एनपीआर के विरोध में इंकिलाब 80 साल की वृद्धाओं , मां, बेटियों ने आरंभ किया, वह सराहनीय है । फासीवादी ताकतें इन काले कानूनों के नाते फासीवादी व्यवस्था लाना चाहते हैं। ये लोग बहुत बहुत झूठे हैं । 15 लाख खाते में आ जाना उनकी धोखेबाजी है ।  पुलवामा में 42 जवानों की शहादत की जिम्मेदार यही केंद्र सरकार है । आज जीएसटी से व्यवसाय अत्यधिक खराब हो गए हैं। हमारी कोशिशों को ताकत से रोकने की कोशिश की जा रही है । यह अभिव्यक्ति ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला के प्रवक्ता और जमाअत ए इस्लामी हिंद की मजलिस ए शूरा के सदस्य डॉ सैयद कासिम रसूल इलियास ने अध्यक्षता करते हुए व्यक्त की । यह कार्यक्रम सी ए ए , एनआरसी और एनपीआर के विरोध में 61 सामाजिक संगठनों का फेडरेशन आफ ऑर्गेनाइजेशंस फॉर सोशल जस्टिस सेकुलरिज्म एंड डेमोक्रेसी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की गई थी । उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार विश्व को गुरु का दर्जा दिलाने चली थी और अब हाल यह है कि देश के एक तिहाई लोग कुपोषण के शिकार हो गए हैं । हमारी जागृति सी ए ए, एनआरसी और एनपीआर के साथ में तक ही नहीं बल्कि देश के सपनों को पूरा करने तक रहनी चाहिए ।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के जगजीत सिंह ने देश के क्रांतिकारियों को नमन कर उनके विचारों को याद दिलाया । मनुवादी विचार धारा को हम 100 वीं वर्षगांठ के दिन काला दिन दिखाएंगे । हमें इनसे देश छुड़ाना है । देश की स्वाधीनता में इनका कोई योगदान नहीं है । सीएए, एनआरसी, एनपीआर में हम इन्हें कोई जानकारी नहीं देंगे ।
गुरुदेव सेवा मंडल के ज्ञानेश्वर रक्षक ने कहा कि अब हम स्वतंत्रता के फर्ज को निभाने के लिए एक हो रहे हैं । उन्होंने संत तुकड़ोजी महाराज के संबंध से विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश डाला ।
सलीम शेख़ वेलफेयर पार्टी महाराष्ट्र अध्यक्ष ने आसाम एकार्ड पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इन काले कानूनों के माध्यम से हमारे बीच भेदभाव पैदा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जामिया के हमलावरों को आज तक गिरफ्तार नहीं किया गया । मीडिया विरोध प्रदर्शन की बात नहीं करता बल्कि वह एक पक्षीय बात रखता है । हमें मीडिया को त्यागना चाहिए ।
भूतपूर्व आईपीएस अब्दुल रहमान ने कहा कि सी एए ,एन आर सी शासन की जुमला बंदी नहीं हकीकत बन गई है । आज हम जिस उग्रता के साथ इन काले कानूनों का विरोध कर रहे हैं वह पहलू ख़ान , असलम खान आदि की मृत्यु के समय , पूना के दलितों को मौत के घाट उतारा गया था उस समय हमें यह उग्रता दिखाना चाहिए थी । हमने अपने अधिकारों को भुला दिया है । उन्होंने कहा कि इस सरकार के बनाए गए अधिकतर कानून अदालतों में चैलेंज बने हुए हैं । सरकार संविधान  को छोड़कर कानून बना रही है । वह 15 प्रतिशत उच्च कोटि और पूंजीपति लोगों से प्यार करती है , 80 प्रतिशत से नफ़रत ।
सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरुद्ध एलाइंस के राज्य संयोजक जस्टिस कोलसे पाटील ने कहा कि जिस फासीवादी व्यवस्था ने अपना घर बार छोड़कर आप महिलाओं को यहां आने पर मजबूर किया है हम उनका धन्यवाद करते हैं आज ईवीएम से चुने हुए लोग शासन चला रहे हैं , हम ईवीएम पर भरोसा नहीं कर सकते । उन्होंने न्यायधीश के हवाले से कहा कि खून के अपराध पर उन्हेंअपराधी बनाया जाना चाहिए और उन्हें कोई पद नहीं दिया जाना चाहिए। हिंदुत्ववादी मनुवादी हैं, हमें हिंदु कह कर वे हमें को कुचलना चाहते हैं , उन्हें हमारा संविधान जहरीला दिखाई देता है, वह हमसे मतदान का अधिकार चुनना चाहते हैं, सीएए जैसे काले कानूनों पर हम अभी संवाद करना चाहते हैं, ये कानून गुलाम बनाने की साज़िश हैं । हमें फातिमा , सावित्रीबाई फुले और बाबासाहेब अंबेडकर की शिक्षाओं का स्मरण करना चाहिए।

शाकिरूल अकरम फ़लाही ने पवित्र कुरआन की सुरह कसस की पंक्ति नं से 1- 6 के पठन से आरंभ हुआ। कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ अनवार सिद्दीकी ने रखी ।

डॉ कृष्ण कांबले ने आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम का संचालन डॉ नुरुल अमीन ने किया ।
  मंच पर प्रशांत बंसोड़, हाफ़िज़ अब्दुल बासित, प्रोफेसर मोहम्मद अय्यूब खान, डॉ आसिफुज्जमां ख़ान, नितिन सरदार, मराठा सेवा संघ के जिलाध्यक्ष दिलिप खोडगे , त्रिलोक हजारे, शोएब आसिम, जमियत उलेमा-ए-हिंद के हाफ़िज़ मसऊद आदि मान्यवर गण उपस्थित थे ।

Thursday, February 13, 2020

सद फीसद कामयाबी ग़ज़ब तो दिल्ली के मुस्लमानों ने कर दिया। डाक्टर सलीम खान


सद फीसद कामयाबी
ग़ज़ब तो दिल्ली के मुस्लमानों ने कर दिया
डाक्टर सलीम खान
दिल्ली के वजीरे आला अरविंद केजरीवाल ने एक हफ्ता पहले अयोध्या में राम मंदिर की तामीर के लिए पार्लीमान में वजीरे आजम नरेंद्र मोदी के जरिया ट्रस्ट बनाने के ऐलान का खैर-मक़्दम करते हुए उन्हें मुबारकबाद दी थी और कहा था कि अच्छे फैसलों का कोई समय नहीं होता है। इस के ठीक एक हफ्ता बाद वजीरे आजम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली असैंबली में आम आदमी पार्टी की जबरदस्त जीत पर वजीरे आला अरविंद केजरीवाल को मुबारकबाद दीते हुए कहा कि ‘‘आप पार्टी और मिस्टर अरविंद केजरीवाल को दिल्ली असैंबली इंतिख़ाबात में जीत की मुबारकबाद। दिल्ली के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए उन्हें बहुत बहुत नेक खाहिशात’’।
दोनों का हिसाब बराबर हो गया लेकिन इसी के साथ मुबारकबाद का एक सिलसिला चल पड़ा। राहुल गांधी, ममता बनर्जी, वाई एस जगन मोहन रेड्डी, एन चंद्रबाबू नायडू, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरैन, सीताराम यचूरी, अतुल अंजान, तेजस्वी यादव, एम के स्टालिन और पनारई विजयन ने भी केजरीवाल को मुबादक दी और उन्होंने सब का शुक्रिया अदा किया।
इस तवील लिस्ट में वजीरे आजम के अलावा वजीरे दिफाअ राजनाथ सिंह, बीजेपी के नए नवेले सद्र जगत प्रकाश नड्डा और बीजेपी दिल्ली के सद्र मनोज तिवारी तक का नाम शामिल था लेकिन दो महा पागल अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के नाम गायब थे। ऐसा इसलिए हुआ कि दिल्ली के इंतिख़ाबी मुहिम में सबसे ज़्यादा कहर बरसाने वाली राहू केतू की जोड़ी अब बावली हो गई है। वाराणसी में नामा निगार योगी का रद्दे अमल जानने के लिए उन के पीछे भागते रहे लेकिन वो मुँह छुपा कर भाग गए। मनोज तिवारी की तरह जय श्री राम का नारा तक नहीं लगा सके । हंटर चलाकर सारे अरकान पार्लीमान को ऐवान में हाजिर रहने की तलकीन करनेवाले वजीरे दाखि़ला भी ना जाने किस अक़ूबत खाना में रुपोश हो गए। अख़बार और टेलीविजन वाले उनका सुराग लगाते रहे मगर वो गधे के सर से सींग की तरह गायब हो गए थे। बीजेपी ने ऐवाने बाला के वक़्फा तआम को मंसूख करके ऐसी तशवीश फैलाई कि शाह जेके तरकश का आखिरी तीर यकसां सिवल कोड की क़ियास आराई होने लगी लेकिन बाक़ौल गालिब ‘‘देखने हम भी गए थे  पे तमाशा ना हुआ।’’
योगी और शाह की नींद मुस्लमानों ने उड़ा रखी है। अआप ने इस बार 5 मुस्लमानों को टिकट दिया और पांचों भारी अक्सरीयत से कामयाब हो गए। उनको हराने के लिए शाह और योगी ने जो नफरत की आग लगाई इस में केजरीवाल तक झुलस गए और राम मंदिर ट्रस्ट का अभीनंदन करने के बाद हनूमान चालीसा का पाठ करने लगे लेकिन मुस्लमान टस से मस नहीं हुए । उन्हें पता था कि इस बार हाथ कमल को उखाड़ नहीं सकता लेकिन इसलिए जाफरानी झाड़ू से उसे साफ कर दिया । मुस्लमानों की सियासी दानिशमंदी ने संघ परिवार को हैरान कर दिया होगा। हिंदू समाज को मुत्तहिद करके किसी की मुखालफत कराने के लिए उसे ना जाने क्या क्या जतन करने पड़ते हैं । झूठ से काम नहीं चलता तो फसाद करवाने की नौबत आ जाती है लेकिन मुसलमान अपनी अक्ले आम से ना सिर्फ अव्वलीन दुश्मन को पहचान लेता है बल्कि उसको जेर करने वाले का भी पता लगा लेता है। इसके बाद दिल्ली जैसा चमत्कार होता है ।
ये हुस्ने इत्तिफाक़ है शाह जी ने 11 दिसंबर को कौमी शहरियत के कानून में तरमीम की तजवीज  पार्लीमान में पेश की। इस के ठीक दो माह बाद उनको उस की भारी कीमत चुकानी पड़ी। 11 फरवरी को इंतिख़ाबी रुझानों के बाद पहला नतीजा सीलम पूर से आया। इस में अआप के उम्मीदवार अबदुर्रहमान ने बीजेपी के कौशल कुमार मिश्रा को 36 हजार से ज्यादा वोटों से हराने की खुशखबरी थी। इस तरह इब्तिदा ही एक मुस्लमान की फतह से हुई। यहां पर कांग्रेस के उम्मीदवार मतीन अहमद को भी बीस हजार वोट मिले लेकिन इस से कोई खास फर्क नहीं पड़ा। शुऐब इक़बाल ने मटिया महल से 67 हजार वोट हासिल करके बी जे पी के रवींद्र गुप्ता को हराया। उन को सिर्फ 17 हजार और कांग्रेस के मिर्जा अली जावेद को तीन हजार वोट मिले थे। बल्लीमारान में अआप के ऐम एलए इमरान हुसैन ने 64 फीसद यानी 66 हजार वोट हासिल किए जबकि बीजेपी की लता को सिर्फ 29 हजार वोट मिले । कांग्रेस के हारून यूसुफ को 4 हजार पर इकतिफा करना पड़ा।
मुस्तफाबाद वो हलके इंतिखाब है जहां से 2015 में बीजेपी के तीन में से एक उम्मीदवार कामयाब हो गया था। अमित शाह ने यहीं जाकर वोटिंग मशीन के जरिया शाहीन बाग तक करंट पहुंचाने की कोशिश की थी लेकिन अआप के हाजी यूनुस ने बीजेपी के जगदीश प्रधान को हरा दिया लेकिन ये कहानी ख़ासी दिलचस्प है। वोटों की गिनती के कुल 26 राउंड होते हैं 11 वीं राउंड के बाद बीजेपी के जगदीश प्रधान ने बत्तीस हजार वोट आगे चल रहे थे और जाफरानी खेमा में जश्न शुरू हो चुका था । 15वीं राउंड के बाद ही हाजी यूनुस ने जगदीश प्रधान से ज्यादा वोट हासिल करने शुरू किए। 21 वीं राउंड के बाद हाजी यूनुस को पाँच हजार वोटों की बढ़त मिल गई और 26वीं राउंड में गिनती ख़त्म होने के बाद वो 20 हजार 800 वोट के फर्क से बीजेपी के रुकन असैंबली को शिकस्ते फाश दे देते हैं । ये था वो बटन जिसे दबाने की अमित शाह ने तलकीन की थी जोर का झटका धीमे लगा ।
मुस्तफाबाद तो खासा दूर है लेकिन शाहीन बाग के हलके इंतिखाब ओखला (जहां योगी ने आकर मुँह जोरी की थी से जब सुब्ह-सवेरे ये रुझान आया कि अआप के उम्मीदवार अमानतुल्लाह खान बीजेपी से पीछे चल रहे हैं तो वाक़ई बिजली का झटका लगा लेकिन शाम तक मतला साफ गया।
ओखला से मजमूई तौर पर 67 फीसद वोट हासिल करने वाले अमानतुल्लाह ने बीजेपी के ब्रहम सिंह को 70 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दे दी। कांग्रेस के परवेज हाशमी को सिर्फ 5 हजार वोट मिले। इसी हलके इंतिखाब से एसडी पी आई के निहायत काबिल और मुख़लिस उम्मीदवार डाक्टर तस्लीम रहमानी को सिर्फ 141 वोट मिले जबकि एक लाख अट्ठाईस हजार राय दहिंदगान ने अमानतुल्लाह की ताईद की । ऐसा इसलिए हुआ कि मुस्लमानों ने बीजेपी को धूल चटाने का इरादा कर लिया था।
 महा-भारत में स्वंवर के बाद अर्जुन से पूछा गया कि तुमने तेल कढ़ाई में देखकर ऊपर घूमने वाली मछली की आँख का निशाना कैसे साध लिया तो उसका जवाब था मुझे तो उस समय सिर्फ मछली की आँख दिखाई दे रही थी सो मैंने उस में तीर चला दिया। अमित शाह और योगी महाराज को इन नताइज के बाद महा-भारत का ये वाकिया जरूर याद आया होगा क्योंकि मुस्लमानों को भी इस बार सिर्फ कमल नजर आरहा था । अरविंद केजरीवाल के जुमला ‘‘आपने तो गजब कर दिया’’ इस के असली मुस्तहिक तो सद फीसद कामयाब होने वाले मुस्लमान उम्मीदवार और उन्हें कामयाब करने वाली मुस्लिम जनता है इसलिए कि ये एजाज ना तो अआप को मिला और ना बीजेपी को हासिल हुआ।