जाफर नगर में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के संबंध में आयोजित हुई संवैधानिक जन जागरण हेतु विशाल जनसभा
देश में चल रहे सीएए , एनआरसी और एनपीआर के विरोध में इंकिलाब 80 साल की वृद्धाओं , मां, बेटियों ने आरंभ किया, वह सराहनीय है । फासीवादी ताकतें इन काले कानूनों के नाते फासीवादी व्यवस्था लाना चाहते हैं। ये लोग बहुत बहुत झूठे हैं । 15 लाख खाते में आ जाना उनकी धोखेबाजी है । पुलवामा में 42 जवानों की शहादत की जिम्मेदार यही केंद्र सरकार है । आज जीएसटी से व्यवसाय अत्यधिक खराब हो गए हैं। हमारी कोशिशों को ताकत से रोकने की कोशिश की जा रही है । यह अभिव्यक्ति ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला के प्रवक्ता और जमाअत ए इस्लामी हिंद की मजलिस ए शूरा के सदस्य डॉ सैयद कासिम रसूल इलियास ने अध्यक्षता करते हुए व्यक्त की । यह कार्यक्रम सी ए ए , एनआरसी और एनपीआर के विरोध में 61 सामाजिक संगठनों का फेडरेशन आफ ऑर्गेनाइजेशंस फॉर सोशल जस्टिस सेकुलरिज्म एंड डेमोक्रेसी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित की गई थी । उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार विश्व को गुरु का दर्जा दिलाने चली थी और अब हाल यह है कि देश के एक तिहाई लोग कुपोषण के शिकार हो गए हैं । हमारी जागृति सी ए ए, एनआरसी और एनपीआर के साथ में तक ही नहीं बल्कि देश के सपनों को पूरा करने तक रहनी चाहिए ।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के जगजीत सिंह ने देश के क्रांतिकारियों को नमन कर उनके विचारों को याद दिलाया । मनुवादी विचार धारा को हम 100 वीं वर्षगांठ के दिन काला दिन दिखाएंगे । हमें इनसे देश छुड़ाना है । देश की स्वाधीनता में इनका कोई योगदान नहीं है । सीएए, एनआरसी, एनपीआर में हम इन्हें कोई जानकारी नहीं देंगे ।
गुरुदेव सेवा मंडल के ज्ञानेश्वर रक्षक ने कहा कि अब हम स्वतंत्रता के फर्ज को निभाने के लिए एक हो रहे हैं । उन्होंने संत तुकड़ोजी महाराज के संबंध से विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश डाला ।
सलीम शेख़ वेलफेयर पार्टी महाराष्ट्र अध्यक्ष ने आसाम एकार्ड पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इन काले कानूनों के माध्यम से हमारे बीच भेदभाव पैदा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जामिया के हमलावरों को आज तक गिरफ्तार नहीं किया गया । मीडिया विरोध प्रदर्शन की बात नहीं करता बल्कि वह एक पक्षीय बात रखता है । हमें मीडिया को त्यागना चाहिए ।
भूतपूर्व आईपीएस अब्दुल रहमान ने कहा कि सी एए ,एन आर सी शासन की जुमला बंदी नहीं हकीकत बन गई है । आज हम जिस उग्रता के साथ इन काले कानूनों का विरोध कर रहे हैं वह पहलू ख़ान , असलम खान आदि की मृत्यु के समय , पूना के दलितों को मौत के घाट उतारा गया था उस समय हमें यह उग्रता दिखाना चाहिए थी । हमने अपने अधिकारों को भुला दिया है । उन्होंने कहा कि इस सरकार के बनाए गए अधिकतर कानून अदालतों में चैलेंज बने हुए हैं । सरकार संविधान को छोड़कर कानून बना रही है । वह 15 प्रतिशत उच्च कोटि और पूंजीपति लोगों से प्यार करती है , 80 प्रतिशत से नफ़रत ।
सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरुद्ध एलाइंस के राज्य संयोजक जस्टिस कोलसे पाटील ने कहा कि जिस फासीवादी व्यवस्था ने अपना घर बार छोड़कर आप महिलाओं को यहां आने पर मजबूर किया है हम उनका धन्यवाद करते हैं आज ईवीएम से चुने हुए लोग शासन चला रहे हैं , हम ईवीएम पर भरोसा नहीं कर सकते । उन्होंने न्यायधीश के हवाले से कहा कि खून के अपराध पर उन्हेंअपराधी बनाया जाना चाहिए और उन्हें कोई पद नहीं दिया जाना चाहिए। हिंदुत्ववादी मनुवादी हैं, हमें हिंदु कह कर वे हमें को कुचलना चाहते हैं , उन्हें हमारा संविधान जहरीला दिखाई देता है, वह हमसे मतदान का अधिकार चुनना चाहते हैं, सीएए जैसे काले कानूनों पर हम अभी संवाद करना चाहते हैं, ये कानून गुलाम बनाने की साज़िश हैं । हमें फातिमा , सावित्रीबाई फुले और बाबासाहेब अंबेडकर की शिक्षाओं का स्मरण करना चाहिए।
शाकिरूल अकरम फ़लाही ने पवित्र कुरआन की सुरह कसस की पंक्ति नं से 1- 6 के पठन से आरंभ हुआ। कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ अनवार सिद्दीकी ने रखी ।
डॉ कृष्ण कांबले ने आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम का संचालन डॉ नुरुल अमीन ने किया ।
मंच पर प्रशांत बंसोड़, हाफ़िज़ अब्दुल बासित, प्रोफेसर मोहम्मद अय्यूब खान, डॉ आसिफुज्जमां ख़ान, नितिन सरदार, मराठा सेवा संघ के जिलाध्यक्ष दिलिप खोडगे , त्रिलोक हजारे, शोएब आसिम, जमियत उलेमा-ए-हिंद के हाफ़िज़ मसऊद आदि मान्यवर गण उपस्थित थे ।

