सद फीसद कामयाबी
ग़ज़ब तो दिल्ली के मुस्लमानों ने कर दिया
डाक्टर सलीम खान
दिल्ली के वजीरे आला अरविंद केजरीवाल ने एक हफ्ता पहले अयोध्या में राम मंदिर की तामीर के लिए पार्लीमान में वजीरे आजम नरेंद्र मोदी के जरिया ट्रस्ट बनाने के ऐलान का खैर-मक़्दम करते हुए उन्हें मुबारकबाद दी थी और कहा था कि अच्छे फैसलों का कोई समय नहीं होता है। इस के ठीक एक हफ्ता बाद वजीरे आजम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली असैंबली में आम आदमी पार्टी की जबरदस्त जीत पर वजीरे आला अरविंद केजरीवाल को मुबारकबाद दीते हुए कहा कि ‘‘आप पार्टी और मिस्टर अरविंद केजरीवाल को दिल्ली असैंबली इंतिख़ाबात में जीत की मुबारकबाद। दिल्ली के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए उन्हें बहुत बहुत नेक खाहिशात’’।
दोनों का हिसाब बराबर हो गया लेकिन इसी के साथ मुबारकबाद का एक सिलसिला चल पड़ा। राहुल गांधी, ममता बनर्जी, वाई एस जगन मोहन रेड्डी, एन चंद्रबाबू नायडू, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरैन, सीताराम यचूरी, अतुल अंजान, तेजस्वी यादव, एम के स्टालिन और पनारई विजयन ने भी केजरीवाल को मुबादक दी और उन्होंने सब का शुक्रिया अदा किया।
इस तवील लिस्ट में वजीरे आजम के अलावा वजीरे दिफाअ राजनाथ सिंह, बीजेपी के नए नवेले सद्र जगत प्रकाश नड्डा और बीजेपी दिल्ली के सद्र मनोज तिवारी तक का नाम शामिल था लेकिन दो महा पागल अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के नाम गायब थे। ऐसा इसलिए हुआ कि दिल्ली के इंतिख़ाबी मुहिम में सबसे ज़्यादा कहर बरसाने वाली राहू केतू की जोड़ी अब बावली हो गई है। वाराणसी में नामा निगार योगी का रद्दे अमल जानने के लिए उन के पीछे भागते रहे लेकिन वो मुँह छुपा कर भाग गए। मनोज तिवारी की तरह जय श्री राम का नारा तक नहीं लगा सके । हंटर चलाकर सारे अरकान पार्लीमान को ऐवान में हाजिर रहने की तलकीन करनेवाले वजीरे दाखि़ला भी ना जाने किस अक़ूबत खाना में रुपोश हो गए। अख़बार और टेलीविजन वाले उनका सुराग लगाते रहे मगर वो गधे के सर से सींग की तरह गायब हो गए थे। बीजेपी ने ऐवाने बाला के वक़्फा तआम को मंसूख करके ऐसी तशवीश फैलाई कि शाह जेके तरकश का आखिरी तीर यकसां सिवल कोड की क़ियास आराई होने लगी लेकिन बाक़ौल गालिब ‘‘देखने हम भी गए थे पे तमाशा ना हुआ।’’
योगी और शाह की नींद मुस्लमानों ने उड़ा रखी है। अआप ने इस बार 5 मुस्लमानों को टिकट दिया और पांचों भारी अक्सरीयत से कामयाब हो गए। उनको हराने के लिए शाह और योगी ने जो नफरत की आग लगाई इस में केजरीवाल तक झुलस गए और राम मंदिर ट्रस्ट का अभीनंदन करने के बाद हनूमान चालीसा का पाठ करने लगे लेकिन मुस्लमान टस से मस नहीं हुए । उन्हें पता था कि इस बार हाथ कमल को उखाड़ नहीं सकता लेकिन इसलिए जाफरानी झाड़ू से उसे साफ कर दिया । मुस्लमानों की सियासी दानिशमंदी ने संघ परिवार को हैरान कर दिया होगा। हिंदू समाज को मुत्तहिद करके किसी की मुखालफत कराने के लिए उसे ना जाने क्या क्या जतन करने पड़ते हैं । झूठ से काम नहीं चलता तो फसाद करवाने की नौबत आ जाती है लेकिन मुसलमान अपनी अक्ले आम से ना सिर्फ अव्वलीन दुश्मन को पहचान लेता है बल्कि उसको जेर करने वाले का भी पता लगा लेता है। इसके बाद दिल्ली जैसा चमत्कार होता है ।
ये हुस्ने इत्तिफाक़ है शाह जी ने 11 दिसंबर को कौमी शहरियत के कानून में तरमीम की तजवीज पार्लीमान में पेश की। इस के ठीक दो माह बाद उनको उस की भारी कीमत चुकानी पड़ी। 11 फरवरी को इंतिख़ाबी रुझानों के बाद पहला नतीजा सीलम पूर से आया। इस में अआप के उम्मीदवार अबदुर्रहमान ने बीजेपी के कौशल कुमार मिश्रा को 36 हजार से ज्यादा वोटों से हराने की खुशखबरी थी। इस तरह इब्तिदा ही एक मुस्लमान की फतह से हुई। यहां पर कांग्रेस के उम्मीदवार मतीन अहमद को भी बीस हजार वोट मिले लेकिन इस से कोई खास फर्क नहीं पड़ा। शुऐब इक़बाल ने मटिया महल से 67 हजार वोट हासिल करके बी जे पी के रवींद्र गुप्ता को हराया। उन को सिर्फ 17 हजार और कांग्रेस के मिर्जा अली जावेद को तीन हजार वोट मिले थे। बल्लीमारान में अआप के ऐम एलए इमरान हुसैन ने 64 फीसद यानी 66 हजार वोट हासिल किए जबकि बीजेपी की लता को सिर्फ 29 हजार वोट मिले । कांग्रेस के हारून यूसुफ को 4 हजार पर इकतिफा करना पड़ा।
मुस्तफाबाद वो हलके इंतिखाब है जहां से 2015 में बीजेपी के तीन में से एक उम्मीदवार कामयाब हो गया था। अमित शाह ने यहीं जाकर वोटिंग मशीन के जरिया शाहीन बाग तक करंट पहुंचाने की कोशिश की थी लेकिन अआप के हाजी यूनुस ने बीजेपी के जगदीश प्रधान को हरा दिया लेकिन ये कहानी ख़ासी दिलचस्प है। वोटों की गिनती के कुल 26 राउंड होते हैं 11 वीं राउंड के बाद बीजेपी के जगदीश प्रधान ने बत्तीस हजार वोट आगे चल रहे थे और जाफरानी खेमा में जश्न शुरू हो चुका था । 15वीं राउंड के बाद ही हाजी यूनुस ने जगदीश प्रधान से ज्यादा वोट हासिल करने शुरू किए। 21 वीं राउंड के बाद हाजी यूनुस को पाँच हजार वोटों की बढ़त मिल गई और 26वीं राउंड में गिनती ख़त्म होने के बाद वो 20 हजार 800 वोट के फर्क से बीजेपी के रुकन असैंबली को शिकस्ते फाश दे देते हैं । ये था वो बटन जिसे दबाने की अमित शाह ने तलकीन की थी जोर का झटका धीमे लगा ।
मुस्तफाबाद तो खासा दूर है लेकिन शाहीन बाग के हलके इंतिखाब ओखला (जहां योगी ने आकर मुँह जोरी की थी से जब सुब्ह-सवेरे ये रुझान आया कि अआप के उम्मीदवार अमानतुल्लाह खान बीजेपी से पीछे चल रहे हैं तो वाक़ई बिजली का झटका लगा लेकिन शाम तक मतला साफ गया।
ओखला से मजमूई तौर पर 67 फीसद वोट हासिल करने वाले अमानतुल्लाह ने बीजेपी के ब्रहम सिंह को 70 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दे दी। कांग्रेस के परवेज हाशमी को सिर्फ 5 हजार वोट मिले। इसी हलके इंतिखाब से एसडी पी आई के निहायत काबिल और मुख़लिस उम्मीदवार डाक्टर तस्लीम रहमानी को सिर्फ 141 वोट मिले जबकि एक लाख अट्ठाईस हजार राय दहिंदगान ने अमानतुल्लाह की ताईद की । ऐसा इसलिए हुआ कि मुस्लमानों ने बीजेपी को धूल चटाने का इरादा कर लिया था।
महा-भारत में स्वंवर के बाद अर्जुन से पूछा गया कि तुमने तेल कढ़ाई में देखकर ऊपर घूमने वाली मछली की आँख का निशाना कैसे साध लिया तो उसका जवाब था मुझे तो उस समय सिर्फ मछली की आँख दिखाई दे रही थी सो मैंने उस में तीर चला दिया। अमित शाह और योगी महाराज को इन नताइज के बाद महा-भारत का ये वाकिया जरूर याद आया होगा क्योंकि मुस्लमानों को भी इस बार सिर्फ कमल नजर आरहा था । अरविंद केजरीवाल के जुमला ‘‘आपने तो गजब कर दिया’’ इस के असली मुस्तहिक तो सद फीसद कामयाब होने वाले मुस्लमान उम्मीदवार और उन्हें कामयाब करने वाली मुस्लिम जनता है इसलिए कि ये एजाज ना तो अआप को मिला और ना बीजेपी को हासिल हुआ।

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