Thursday, September 27, 2018

क्या है Adultery section 497 । क्या है इस के नुकसान ।



साल १८६६ में बना Adultery Act, इंडियन पैनल कोड की धारा 497 को सुप्रीम कोर्ट की ५ जजों की बेंच ने फैसला सुनाते हुए संविधान के खिलाफ बताया, चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने कहा कि 'पति नहीं है पत्नी का मालिक' ,
इस कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति या उसकी पत्नी किसी गैर शादी शुदा से या किसी पराए से शारीरिक संबंध रखता है या रखती तब वो गुनाह नहीं होगा और ना ही पत्नी या पति के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी...।

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पहले LGBT और अब adultery को हरी झंडी दिखाने का मतलब यह है की देश मे जारी सियासी खाना जंगी का हाल अब हर घर तक पहुंचने वाला है।।

हमारे देश में कुछ वक़्त से आज़ादी,सब को बराबर हक़ और इंसाफ देने के नाम पर जो बर्बादी हाथ में ली जा रही है उसका किसी को अंदाज़ा नहीं,
शादी शुदा लोग अब बिना किसी रोक टोक के किसी भी पराई औरत की ज़िन्दगी के साथ खेल सकते हैं।

सड़कों पर पड़ी नजायेज़ औलादें, हर दिन १५० से अधिक होने वाले रेप केस, छोटे लड़के और लड़कियों के अपहरण के मामले ख़तम होती खुशियां, टूटते हुवे रिश्ते, जलती हुई लड़कियों के मामलात, और बढ़ते हुए परिवारिक समस्याओं का समाधान अभी तक नहीं हो पाया था कि यह परिवर्तन कर दिया गया जो कि खुले आम बुराई की दावत देने का ही काम करेगा,

कोर्ट का काम सिर्फ इतना ही नहीं है की जो केस आए हैं उन्हे ही सोच कर फैसला सुनाया जाए बल्कि उनका भी खयाल करना चाहिए जो कोर्ट के बाहर हो रहा है या अब होने वाला है।
कितने अफसोस की बात है कि कोर्ट यह कह रही है के पति पत्नी का मालिक नहीं होता, जबकि हर पति की सब से बड़ी ज़िम्मेदारी उसकी पत्नी ही होती है...अब जब की इस फैसले को सुना दिया गया है तो ज़माना भी देख ले के इस फैसले से बराबरी का हक़ मांगने वाले को तो हक़ मिल जाएगा लेकिन कितनी ही मासूम लडकियों का हक़ मारा जाएगा, उनकी ज़िन्दगी से खिलवाड़ किया जाएगा...रेप, मर्डर, तलाक़ और परिवारिक जीवन में झगड़े के मामलात भी बढ़ जाएगे जिसे होश रखने वाले अपनी आंखों से देखेगे...
इस लिए इस फैसले का साथ देने की बजाए आवाज़ उठानी चाहिए इसी मे सब के साथ इंसाफ होगा।

✍️ तोसिफ जाफर खान