Monday, June 8, 2020

आईपीएस अब्दुल रहेमान एक बेहद शानदार किताब लिखी है —Denial and Deprivation. जरूर पढ़िए


ये हैं आईपीएस अब्दुर रहमान जी, वही अब्दुर रहमान जिन्होंने ‘नागरिकता संशोधन क़ानून’ के ख़िलाफ़ एक झटके में महाराष्ट्र पुलिस में अपने आईजी के पद से इस्तीफ़ा दे दिया और फिर आम लोगों की तरह सड़कों की खाक छानते हुए पूरे भारत में लोगों को जागरूक करते रहे. लॉकडाउन के दौरान जब मां बिस्तर पर थीं तब इन्हें अपनी क़ौम की फ़िक्र थी. कोई भी उन्हें कॉल करता या सोशल मीडिया पर उन्हें कोई सूचना देता तो तुरंत उसकी समस्या को हल करने में लग जाते.मुझे याद है कि जिस दिन इनकी अम्मी की इंतक़ाल हुआ था, उस दिन जनाज़े के तुरंत बाद भी वो अपने गांव के लोगों से मिलकर उनका दर्द जानने में लगे रहे… अब मुंबई में हैं, लेकिन दिन-रात में अपने हिसाब से लोगों की सेवा में लगे हुए हैं.और हां, भाई ने एक बेहद शानदार किताब लिखी है —Denial and Deprivation. सच पूछे तो ये किताब सच्चर कमिटी रिपोर्ट व रंगनाथ मिश्रा कमीशन की रिपोर्ट के बाद देश में मुसलमानों की हालत का एक जीता-जागता अहम दस्तावेज़ है.जिन लोगों को भी देश में मुसलमानों की हालत समझनी है उन्हें ये किताब हर हाल में ज़रूर पढ़नी चाहिए. लेकिन प्लीज़, मुफ़्त में मांगने की कोशिश न करें. किताब अमेज़न पर उपलब्ध है. बस गुगल पर सर्च करें, अमेज़न का लिंक आपके सामने होगा…

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