नागरिकता संशोधन क़ानून 2019 (सीएए), संयुक्त नेशनल पोपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ इंडियन सिटिज़न (एनआरआइसी) के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा नयी नागरिकता व्यवस्था लाने के प्रयास का हम, निम्न संगठनों और आन्दोलनों की समन्वय और गठबंधन समिति विरोध कर रहे हैं, क्योंकि हमारा इस बात पर विश्वास है कि ये क़ानून भारत के संविधान की आत्मा के ख़िलाफ, समाज को बांटने वाला और पक्षपात पर आधारित है और हमारे स्वतंत्रता संघर्ष एवं सभ्यता के मूल्यों के विरुद्ध है।
इस दृष्टि से गठबंधन और समन्वय समिति एनपीआर को पहले ही खारिज कर चुकी है और बहिष्कार का एलान भी कर दी है, क्योंकि एनपीआर एनआरसी लाने का पहला क्रम है और नयी नागरिकता व्यवस्था लाने की तरफ पहला क़दम। इसके अतिरिक्त हमने जनगणना के साथ एनपीआर को जोड़ने का भी विरोध किया है क्योंकि एनपीआर और जनगणना एक साथ करने के नतीजे में जनगणना की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी। इससे नागरिकों की जानकारी, नीजता, गोपनीयता और महत्वपूर्ण डेटा को खतरा है। बहुत से राज्यों ने अपने विधानसभाओं में एनपीआर के वर्तमान स्वरूप को लागू करने के विरोध में प्रस्ताव पारित किया है।
उपरोक्त के प्रकाश में, हमने 12 मार्च 2020 को राज्यसभा में माननीय गृहमंत्री अमित शाह के वक्तव्यों पर विचार किया जिसमें उनहोंने एनपीआर के संदर्भ में राष्ट्र को स्पष्ट रूप से आश्वाशन दिया है कि यदि किसी व्यक्ति के पास कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है या जो जानकारी उपलब्ध कराना चाहे तो वह (स्त्री/पुरुष) उन्हें पेश कर सकता है, जानकारी में कमी की स्थिति में किसी भी नागरिक को ‘‘संदिग्ध’’ के तौर पर वर्गीकृत करने के लिए एनपीआर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। हम माननीय गृहमंत्री की भावना का स्वागत करते हैं और अब हम इसकी क़ानूनी हैसियत और विधिसंगत बनाने के इच्छुक हैं वह इस तरह कि केंद्र सरकार नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियम, 2003 में संशोधन लाकर एनपीआर को इस क़ानून से हटाए। सरकार 2003 के नियमों और क़ानून के दफाओं 3 (5), 4 (3), 4 (4) को ख़त्म करे जो नागरिकों को बतौर संदिग्ध पहचान करने और एनआरआईसी से उनके विलोपन के लिए उपयोग करने की अनुमति देता है। सरकार नियम 7 (2) और 17 में भी उचित संशोधन करे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एनपीआर में जानकारी प्रदान करना स्वैचिछक होगा और जानकारी उपलब्ध न कराने की स्थिति में दंडित नहीं किये जाएंगे। हमारा विश्वास है कि यह संशोधन सदन के पटल पर मान्नीय प्रधानमंत्री के बयान को प्रभावकारी बनाएगा और एनपीआर को लेकर व्यापक आशंकाओं को दूर करेगा।
केंद्र सरकार संशोधन लाने में जितना जल्दी करेगी, हम एनपीआर के बहिष्कार के आह्वान को वापस लेने के लिए तत्पर होंगे। जहां तक सीएए, एनआरसी और पक्षपातपूर्ण नागरिकता व्यवस्था के ख़िलाफ यह आन्दोलन शान्तिपूर्ण, अहिंसात्मक और लोतांत्रिक स्वरूप में जारी रहेगा।
> श्री रवि नायर (संयोजक, अलायन्स अगेंस्ट सीएए-एनआरसी-एनपीआर)
> श्री यशवंत सिन्हा (भारत के पूर्व वित्त मंत्री)
> मौलाना तौक़ीर रज़ा (नेता, अध्यक्ष इत्तेहाद-ए-मिलत परिषद)
> श्री योगेंद्र यादव (स्वराज अभियान)
> मौलाना महमूद मदनी (नेता और सेक्यजामियत उलेमा-ए-हिंद)
> श्री हर्ष मंदर (अमन बिरादरी)
> श्री इंजीनियर सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी (अमीर जमाअत इस्लामी हिंद)
> श्री संदीप पांडे (लखनऊ)
> मौलाना असग़र इमाम सलफ़ी (अमीर मरकज़ी जमीअत अहले हदीस)
> श्री। निखिल डे (जयपुर)
> मौलाना वलीरहमानी एसबी (अमीर इमारत शरिया बिहार / ओडिसा)
> प्रो रतन लाल (प्रोफेसर डीयू)
> डॉ ज़फरुल इस्लाम खान (अध्यक्ष दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग)
> श्री। प्रशांत टंडन (पत्रकार टीओआई)
> मौलाना पीर तनवीर हाशमी (सज्जादा खानकाह हाशमिया बीजापुर)
> प्रो अपूर्वानंद (प्रोफेसर डीयू)
> डॉ मंज़ूर आलम (जनरल सेक्रेटरी मिल्ली काउंसिल)
> श्री अंबरीश राय (एक्टिविस्ट, आरटीई)
> डॉ संदीप पांडे (रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित)
> श्री नावेद हामिद (राष्ट्रीय अध्यक्ष AIMMM)
> जस्टिस कोलसे पाटिल (सेवानिवृत जज Bombay HC)
> मौलाना मोहसिन तकवी साहब (इमाम शिया जामा मस्जिद, नई दिल्ली)
> जस्टिस चंद्रा कुमार (सेवानिवृत जज आँध्रप्रदेश HC)
> डॉ मुफ्ती मुकर्रम साहब (शाही इमाम मस्जिद फतेहपुरी)
> डॉ नरेंद्र नागरवाल (प्रोफेसर डीयू)
> मौलाना सज्जाद नोमानी (सज्जादा खानकाहे नोमानिया)
> श्री राघवन श्रीनिवासन (लोकराज संगठन)
> मौलाना शब्बीर अहमद नदवी (बैंगलोर)
> श्री अशोक वर्मा (रांची)
> श्री कमाल फारूकी (पूर्व अध्यक्ष दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग)
> Adv. अवीक साहा (कोलकाता)
> मौलाना नियाज़ फ़ारूकी (Sec JUH)
> श्री लबीद शफ़ी (अध्यक्ष एसआईओ)
> डॉ ज़फर महमूद (संयोजक वतन की फ़िक्र)
> प्रोफ़ेसर इंजीनियर सलीम (GS FDCA)
> हाफ़िज़ सैयद अतहर अली (नाज़िम मदरसा मोहम्मदिया मुंबई)
> श्री उमर खालिद (युवा नेता)
> श्री। नदीम खान (UAH)
> Adv. ज़फ़रयाब जिलानी (लखनऊ)
> श्री एम एम खान (GS .APCR)
> श्रीमती फराह नकवी (कार्यकर्ता और पूर्व सदस्य NIC)
> मौलाना सैफ अब्बास रिज़वी (शिया धर्मगुरु और नेता)
> श्रीमती रहमतुन्निसा (सेक्रेटरी जेआईएच)
मुजतबा फारूक
(सह-संयोजक, अलायन्स अगेंस्ट सीएए-एनआरसी-एनपीआर)


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