Friday, March 8, 2019

WomenInIslam InternationalWomensDay विश्व_महिला_दिवस जमाअत ए इस्लामी हिंद महिला विभाग नागपुर


प्रेस विज्ञप्ति
   हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फ़रमान है कि " अगर कोई औरत या कोई लड़की किसी कारण भाई के घर में या पिता के घर में वापस आती है तो उसकी देखभाल करना और उसकी इज़्ज़त को ठेस ना पहुंचाना यह भाई के लिए और पिता के लिए बहुत ज़्यादा ज़रूरी है ।" अगर उसे किसी तरह की तकलीफ़ पहुंचाई जाती है तो वह पाप की सीमा में आएगा । और उस को इज़्ज़त देना , उसका ख़्याल रखना यह बाप के लिए और भाई के लिए बहुत ज़्यादा ज़रूरी है । इस्लामी शिक्षाओं के अंतर्गत कुरआन ए मजीद में आदेश दिया गया है कि पति को चाहिए कि वह पत्नी के साथ अच्छा बर्ताव करे। महिला को सताना या उसके लिए सताने  के रास्ता बनाना बहुत ग़लत बात है। इस्लामी शिक्षाओं के अंतर्गत
जो मां का अपमान करता है वह अल्लाह का अपमान करता है और जो अल्लाह का अपमान करता है उसका पतन निश्चित है।
इस्लाम में महिलाओं को विरासत का हक एक तिहाई दिया गया है,  पति की विरासत हो या पिता आदि की , सब में महिलाओं का हक़ सुनिश्चित किया गया है। इस्लाम में इस तरह के अधिकारों से बेटी की पैदाइश से घर में खुशी का माहौल होना चाहिए।
    समाज में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं अत्यधिक बढ़ती जा रही हैं । इस संबंध में हमारा इकट्ठा होकर आवाज़ उठाना इस बात की दलील है कि हम एक दूसरी महिला पर अत्याचार के प्रति कितने दुखित होते हैं । किसी भी संप्रदाय और धर्म की महिला पर किसी भी अपराध के होने पर हमें एहसास होता है कि वह हमारे ही वर्ग की है । इस बात का एहसास हम सबको होना चाहिए ताकि हम आगे मिलजुल कर हर कठिनाइयों और परेशानियों का मुकाबला कर सकेें। इस्लाम की शिक्षाएं सभी इंसानों के लिए हैं । हमें जागना चाहिए और अपने अधिकारों को जाना चाहिए। हमें संवैधानिक अधिकार दिए गए हैं, अधिकार मिलने के बावजूद भी महिलाएं असुरक्षित हैं । यदि हम अपने प्रत्येक अधिकारों के बारे में जागरूक हैं तो फिर कहा जा सकता है कि किसी भी महिला पर कोई अत्याचार नहीं कर सकता । नारी का काम कोई पुरुष नहीं कर सकता इसी कारण उनमें समानता नहीं हो सकती, लेकिन इन दोनों का बैलेंस होना ज़रूरी है । इस्लाम ने आज से 1400 वर्ष पहले वे अधिकार बता दिए जो नारी की आवश्यकता में आते हैं । इस्लाम ने नारी को जीने का अधिकार दिया है ।
यह विचार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में संविधान चौक पर आयोजित मानव श्रृंखला के अंतर्गत विभिन्न संगठनों की उपस्थित महिलाओं में उज़मा पारेख़, हैरिटेज इंटरनेशनल स्कूल की फ़ायज़ा रिज़वान मेम, वंदना वनकर रुमाना कौसर , अतियातुल्लाह,ताहिरा ख़ान और अर्चना एवं मयूरी माटे महिला अधिवक्ताओं आदि ने व्यक्त किए ।
    अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के  अवसर पर महिलाओं पर होने वाले उत्पीड़न जैसे घरेलू हिंसा, बलात्कार, शोषण, नौकरी पेशा करके घर चलाने को मजबूर करना, विज्ञापन  के नाम पर अश्लीलता, संतान की अवज्ञा , वृद्ध आश्रमों का बढ़ता चलन ,महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन के साथ मिलकर शहर की विभिन्न महिला संगठनों ने संविधान चौक पर मानव श्रृंखला बनाई गई और प्ले कार्ड्स द्वारा उन सभी पर रोकथाम की मांग की गई। इस कार्यक्रम में जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर की महिला विभाग तथा महिला पाणी मंच, अखिल भारतीय सत्यशोधक महिला महासंघ, आवाज़ फाउंडेशन, हिंदी महिला समिति, ओ बी सी महिला मंच, जिजाऊ ब्रिगेड आदि महिला संगठनों ने भाग लिया।
  इस कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं की ओर से आवाज़ उठाई गई कि नारी के मान , सम्मान की सुरक्षा से ही समाज में उसे उच्च स्तर का दर्जा मिल सकता है ।
   आज डोमेस्टिक वॉयलेंस,घरेलू हिंसा, फैमिली झगड़े,फ्लॉप मैरिज लाइफ,पति उत्पीडन, संतान की ओर से अनदेखी नारी जीवन को प्रभावित कर रही है , दूसरी ओर इन्हीं कारणों से बच्चों के संस्कारों का स्तर गिर रहा है ।
फैशन के नाम पर औरत का शारीरिक प्रर्दशन हो रहा है ,चरित्र का स्तर गिर रहा है ,बलात्कार, शारिरिक शोषण,कन्या भ्रूण हत्त्या, दहेज बलि  सामाजिक उत्पीडन का कारण बन रही है । नेट एडवरटाइज़िंग,महिलाओं की गुप्त बातें को एडवरटाइजिंग से समाज में फैलाना,अश्लील फिल्में,फैशन शो, मॉडलिंग अंतर्गत नारी का सांस्कृतिक उत्पीडन हो रहा है । घरेलू संपत्ति से बेदखल ,जबरन नौकरी और घर चलाने पर मजबूर करना,सेक्स वर्कर,डांस बार और वैश्या वृत्ति नारी के आर्थिक उत्पीडन का कारण बन रही है । कार्यक्रम समाप्ति पश्चात आदरणीय कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपा गया ।
डॉ एम ए रशीद
जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर

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