Monday, March 11, 2019

महिला दिवस मनाया JIH महिला विभाग नागपुर



जेआईएच वेस्ट की महिला विभाग ने मनाया महिला दिवस

नारी का ना हो अपमान- यही है इस्लाम का पैग़ाम - डॉ सबिहा हाशमी
    महिला के विरुद्ध अत्याचार जमाअ़त ए इस्लामी हिंद की थीम पर यह कार्यक्रम हो रहे हैं ।सभी प्रकार के अधिकारों के बावजूद महिलाएं बहुत से अत्याचारों से जूझ रही है । बलात्कार, शोषण, घरेलू हिंसा ,दहेज प्रताड़ना ऐसे बहुत से अत्याचारों से ग्रस्त है। स्वतंत्रता के नाम पर महिलाओं के साथ शोषण किया जा रहा है। भारतीय नारी की संस्कृति और सभ्यता प्रभावित हो रही है। आवाज़ उठाने पर रूढ़ीवादी कहकर इन अत्याचारों से ध्यान हटाया जाता है । शिक्षित महिला भी घरेलू हिंसा का शिकार है।
"नारी का ना हो अपमान- यही है इस्लाम का पैग़ाम"  के विषय पर  नागपुर महिला विभाग की शहर अध्यक्षा डॉ सबिहा हाशमी ने  अध्यक्षीय संबोधन में कहे। यह कार्यक्रम जेआईएच, नागपुर वेस्ट महिला विभाग के तत्वावधान में जाफ़र नगर के ओल्ड चौपड़े लान में आयोजित किया गया था । उन्होंने बताया कि इस्लाम में औरतों के साथ अच्छे व्यवहार का आदेश दिया गया है, वैवाहिक जीवन को सफल बनाने के लिए पति पत्नी के अधिकार बताए गए हैं , क़ुरआन में पत्नि के संबंध में कहा गया है कि हो सकता है एक बात तुम्हें नापसंद हो तो दूसरी ख़ूबी तलाश करो । आज संतान माता पिता की अवहेलना कर रही हैं ,माता पिता की सेवा करने की बजाए उन्हें वृद्धाश्रम पहुंचाया जाता है, लेकिन इस्लाम में इस वृद्ध आश्रम की कोई कल्पना नहीं है । उन्होंने कहा कि सामाजिक , आर्थिक शोषण और अर्ध नग्नता के पहनावे पर रोक लगना चाहिए  , कोई धर्म महिलाओं पर अत्याचार नहीं सिखाता ।
   दैनिक भास्कर, नागपुर की वरिष्ठ पत्रकार  श्रीमती सोनाली सिंह ने "भारतीय समाज में नारी कितनी सुरक्षित कितनी असुरक्षित " पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सैद्धांतिक रूप से महिला को सुरक्षित माना जा सकता है, लेकिन ऐसा पूरी तरह से ठीक नहीं है । आधुनिक और वैज्ञानिक युग में महिलाओं को काफी क्षति पहुंची है, टेक्नालॉजी का व्यवहार महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रहा है , मोबाइल और सोशल मीडिया इसके साधन बन गए हैं । दहेज दान में भी आधुनिक चीज़ें मांगी जा रही हैं। शिक्षित और जागरूक होकर ही महिलाएं किसी सकारात्मक दृष्टिकोण पर पहुंच सकती हैं।
  साकार फाउंडेशन की श्रीमति वैशाली चोपड़े ने " समाज के उत्थान में महिलाओं की भूमिका " पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भक्ति समाज के परिवर्तन का महत्वपूर्ण अंग है ,वह हमें निष्ठा सिखाती है ,किसी गलत कार्य पर अदृश्य शक्ति ही हमें डरती है । "मीरा बाई" के संदर्भ से वे अपनी बात कह रही थीं । एक मां ने ही शिवाजी के अंदर आदर्श संस्कार परावन चढ़ाए थे ।
  काउंसलर फ़रत क़ुरैशी ने " काउंसलर फ़रत क़ुरैशी ने " घरेलू हिंसा" पर प्रकाश डालते हुए कहा कि घरेलू हिंसा चार दीवारी में पारिवारिक सदस्यों के बीच घटित होती है जिसमें मानसिक, शारीरिक ,आर्थिक और अप शब्दों के इस्तेमाल से प्रताड़ित किया जाता है । दूसरी ओर हमें अपने बच्चों की सही परवरिश करनी होगी जिससे  ना हमारे बच्चे घरेलू हिंसा के शिकार हो और नाही किसी के साथ हिंसा करे। बच्चो को प्यार के साथ उन पर नज़र रखनी होगी कि हमारे सगे संबंधी या हमारे मित्रो का व्यवहार उन के साथ सही है या नही।  उन्होंने कहा कि बेटा बेटी दोनों की शिक्षा आदर , सम्मान वाली होना चाहिए , वह गृहस्थी को चलाने के लिए रुकावट नहीं बनना चाहिए , घरेलू हिंसा को मिल बैठकर हल किया जाना चाहिए , इस्लाम ने हम महिलाओं को समानता के बहुत से  अधिकार दिए हैं।
   मराठा सेवा संघ की श्रीमती प्रेमलता जाधव ने " बेटी का वरदान, नारी का सम्मान " विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं और बेटियों के बिना संसार नहीं चल सकता। बेटियों की ऊंचाइयां छूने में उनकी मां का प्रेरणादायक हाथों का कमाल होता है। आज का दिन हम सावित्रीबाई फुले, जिजाऊ माता, फ़ातिमा शेख को समर्पित करते हैं । इनके ही  परिश्रम ने महिलाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक बनाया गया था । आज युवतियों को नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है ।
   कार्यक्रम का आरंभ कुरआ़न पठन से अज़रा परवीन ने तथा
संचालन आबिदा ख़ान ने किया। अत्यधिक संख्या में महिलाएं और युवतियां उपस्थित थीं ।

डॉ एम ए रशीद
मीडिया सचिव
जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर

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