रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है लेकिन भारतीय मुस्लिम इस बार जिस चीज़ को सबसे ज्यादा याद कर रहे हैं वह गर्मियों में हर घर में रहने वाला मशहूर शरबत रूह अफज़ा है
इस विज्ञापन को देखकर शायद आपको बचपन के दिन याद आ गए होंगे गर्मी के मौसम में माँ की आँखों से छुप-छुपाकर इसे पानी में मिलाकर पीना इसका स्वाद लेना हम सभी को अच्छा लगता था आज भी रूहअफ़्ज़ा का शरबत गर्मी के मौसम में हमारे पसंदीदा पेय में से एक है लेकिन इसके विज्ञापन के अलावा क्या आपने कभी ख़ुद इसे रूहअफ़्ज़ा की जगह ‘हमदर्द का रूहअफ़्ज़ा’ कहा या सुना? शायद नहीं। हम इसे रूहअफ़्ज़ा के नाम से ही जानते हैं ख़रीदते हैं और पीते है
सन 1906 में हकीम हाफिज अब्दुल माजिद ने रूह अफज़ा का उत्पादन शुरू किया था अब इसकी कमान उनके पोतों के हाथ में है भारत के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश भी काफी लोकप्रिय है रूह अफज़ा वैसे बाजार में रूह अफज़ा के विकल्प के रूप में डाबर का शरबते आजम भी मौजूद है लेकिन रूह अफज़ा की बात ही कुछ और है इंतजार है कि रूह अफज़ा बाजार में वापस आए
रूह अफ्जा यूनानी पद्धति से बनाया गया शरबत है जो भारतीय उपमहाद्वीप में प्यास बुझाने का आदर्श पेय माना जाता है। इसमें प्रयुक्त जड़ी बूटियाँ शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखने में मदद करती हैं। यह निर्जलन एवं लू लगने जैसी मुसीबतों से भी बचा लेता है। यह दस्त, पेटदर्द, बदहजमी आदि से भी निजात दिलाता है।
सभी जानना चाहते हैं कि इतना लोकप्रिय शर्बत होने और ऑन-सीजन होने के बावजूद रूह-अफजा की सप्लाई क्यों नहीं हो रही है रूह-अफजा बनाने वाली कंपनी हमदर्द के पार्टनर्स के बीच संपत्ति विवाद के चलते इस शर्बत का उत्पादन बंद हो गया है रूह-अफजा के बाजार से गायब होने की वजह चाहें जो हो लेकिन इस शर्बत के चाहने वाले बहुत परेशान हैं
काश रूह अफज़ा दोबारा शुरू हो जाए

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